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आयुर्वेदिक दवाओं से संक्रमित फेफड़ों का उपचार संभव
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आयुर्वेदिक दवाओं से संक्रमित फेफड़ों का उपचार संभव
मेरठ। वर्ष 2016 में आए चिकनगुनिया का उपचार तो लोगों को मिला, लेकिन आज तक भी उस बीमारी के अंश किसी न किसी रूप में लोगों के भीतर मौजूद हैं। उस समय उपचार की पद्धति पर ध्यान दिया गया होता तो शायद ऐसा नहीं होता। यह कहना है कोरोना संक्रमित मरीजों का आयुर्वेद उपचार करने वाले डॉ. नवीन अग्रवाल का। उनका दावा है कि आयुर्वेद से संक्रमित फेफड़ों का उपचार संभव है।
डॉ. नवीन अग्रवाल का कहना है कि कोरोना के प्रथम चरण में जान का जोखिम बेहद कम था। अब दूसरे चरण में यह फेफड़ों को प्रभावित कर रहा। संक्रमण से फेफड़े इतने कमजोर हो जाते हैं कि उनकी ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता घट जाती है। लंबे समय तक एलोपैथिक दवाओं का सेवन करने से उनके दुष्प्रभाव शरीर पर पड़ने लगते हैं, लेकिन यदि इनके साथ आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग किया जाए तो मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं और कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है। उन्होंने काफी मरीजों को ऐसे उपचार दिया गया, वे अब शारीरिक के साथ ही मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं।
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इनके लिए वरदान बना आयुर्वेद
- मुझे कोविड होने के बाद गला घुटने का एहसास होता था। सांस में दिक्कत हो रही थी, लेकिन आयुर्वेदिक दवाओं ने राहत दी और एक सप्ताह में ठीक हो गया। सबसे बड़ी बात यह कि इस उपचार ने मानसिक मजबूती दी। - मनीष शर्मा, व्यापारी
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- तेज बुखार, सुगंध-स्वाद जाना और सांस फूलने जैसी समस्या के बावजूद एक सप्ताह में सबकुछ ठीक हो गया। कोरोना संक्रमण में आयुर्वेद की सलाह लोगों को दी, जिनको लाभ हुआ। - उषा मांगलिक, गृहिणी
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मेरठ। वर्ष 2016 में आए चिकनगुनिया का उपचार तो लोगों को मिला, लेकिन आज तक भी उस बीमारी के अंश किसी न किसी रूप में लोगों के भीतर मौजूद हैं। उस समय उपचार की पद्धति पर ध्यान दिया गया होता तो शायद ऐसा नहीं होता। यह कहना है कोरोना संक्रमित मरीजों का आयुर्वेद उपचार करने वाले डॉ. नवीन अग्रवाल का। उनका दावा है कि आयुर्वेद से संक्रमित फेफड़ों का उपचार संभव है।
डॉ. नवीन अग्रवाल का कहना है कि कोरोना के प्रथम चरण में जान का जोखिम बेहद कम था। अब दूसरे चरण में यह फेफड़ों को प्रभावित कर रहा। संक्रमण से फेफड़े इतने कमजोर हो जाते हैं कि उनकी ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता घट जाती है। लंबे समय तक एलोपैथिक दवाओं का सेवन करने से उनके दुष्प्रभाव शरीर पर पड़ने लगते हैं, लेकिन यदि इनके साथ आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग किया जाए तो मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं और कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है। उन्होंने काफी मरीजों को ऐसे उपचार दिया गया, वे अब शारीरिक के साथ ही मानसिक रूप से काफी मजबूत हैं।
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इनके लिए वरदान बना आयुर्वेद
- मुझे कोविड होने के बाद गला घुटने का एहसास होता था। सांस में दिक्कत हो रही थी, लेकिन आयुर्वेदिक दवाओं ने राहत दी और एक सप्ताह में ठीक हो गया। सबसे बड़ी बात यह कि इस उपचार ने मानसिक मजबूती दी। - मनीष शर्मा, व्यापारी
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- तेज बुखार, सुगंध-स्वाद जाना और सांस फूलने जैसी समस्या के बावजूद एक सप्ताह में सबकुछ ठीक हो गया। कोरोना संक्रमण में आयुर्वेद की सलाह लोगों को दी, जिनको लाभ हुआ। - उषा मांगलिक, गृहिणी