मुजफ्फरनगर: सरधना विधानसभा की पतवार तय करेगी जीत या हार, पिछले चुनाव में बना था रिकॉर्ड
- पिछले चुनाव में डॉ. संजीव बालियान को 12.6 लाख मत मिले थे
- चुनावी मैदान से सपा और बसपा 88 हजार मत ले गए थे
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मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट पर सरधना विधानसभा की अहम भूमिका होती है। यह सीट किसी भी दल के प्रत्याशी की हार-जीत तय करती है। पिछले चुनाव में इस विधानसभा ने भाजपा के लिए जीत की नींव मजबूत करने का काम किया था।
यहां से सबसे अधिक वोट भाजपा प्रत्याशी के खाते में ही गए थे। इस सीट पर चुनाव में जातीय समीकरण पर पार्टी समीकरण हावी हो जाता है। पिछले चुनावों के परिणाम यही कह रहे हैं। इस बार भाजपा और गठबंधन का फोकस इस विधानसभा की तैयारियों पर है।
इस बार भी सरधना विधानसभा के मतदाताओं का रुख मुजफ्फरनगर लोकसभा की हार-जीत में अहम किरदार निभाएगा। बीते संसदीय चुनाव में वोटरों की पहली पसंद भाजपा रही थी। लोकसभा 2014 के चुनाव में मोदी लहर में भी इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान ने रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की थी। इस बार इस सीट पर सपा, बसपा और रालोद गठबंधन का प्रत्याशी चुनाव मैदान में है।
इस सीट को गठबंधन ने रालोद को दिया है। रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह इस सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि कांग्रेस ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। राजनीति गलियारे में चर्चा है कि कांग्रेस ने यह सीट गठबंधन प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए खाली रखी है। इस समीकरण के बाद इस सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है।
किसे पसंद करेंगे मतदाता
मुजफ्फरनगर सीट पर भाजपा को इस बार कड़ी चुनौती का मुकाबला करना होगा। गठबंधन प्रत्याशी मुस्लिम, जाट, दलित समीकरण के साथ चुनाव मैदान में है जबकि भाजपा के सामने दलित और जाट वोट बैंक में सेंध लगाने की चुनौती होगी।
अब देखना यही है कि इस चुनाव में सरधना विधानसभा के मतदाता इस बार अपनी पसंद किसे चुनते हैं। अभी तक लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा वोट डॉ. संजीव बालियान को मिले है। इस बार भी वह पूर्व के चुनाव की तरह ही वोटों को पाने के लिए लगे हैं। लेकिन इस बार सामने कोई मुस्लिम प्रत्याशी नहीं होने से मुश्किल हो सकती है।
सरधना में बनाया था रिकॉर्ड
मोदी लहर में पहली बार चुनाव लड़े और सांसद बने डॉ. संजीव बालियान को सरधना विधान सभा क्षेत्र से सबसे ज्यादा वोट मिले थे। अभी तक किसी भी प्रत्याशी को इतने वोट नहीं मिले हैं। सपा और बसपा प्रत्याशी को मिलाकर जहां इस विधानसभा क्षेत्र से 88 हजार वोट मिले थे तो अकेले भाजपा 1.26 लाख वोट ले गई थी।
कड़ा होगा मुकाबला, मजबूत हैं दावेदार
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद हुए चुनाव में भाजपा प्रत्याशी ने रिकॉर्ड जीत हासिल की थी। इस बार लोकसभा चुनाव में दोनों जाट प्रत्याशी ही मैदान में हैं, जिसको लेकर कड़ा मुकाबला होगा। ऐसा पहली बार हो रहा है कि यहां कोई मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं है। इसके बावजूद चुनाव और भी दिलचस्प हो गया है।
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