मिशन 2019: प्रियंका गांधी के चंद्रशेखर से मिलने के पीछे की ये रही बड़ी वजह
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भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर से मिलने आईं प्रियंका गांधी भले ही कह रही हों कि इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं, पर सियासी गलियारों में कई अहम राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, पश्चिम यूपी में नए समीकरणों का फॉर्मूला तलाशने के लिए ही इस मुलाकात की पटकथा लिखी गई। साथ ही कांग्रेस ने यह भी साफ कर दिया कि अनुसूचित जाति के वोटरों पर सेंध लगाने के लिए कांग्रेस पूरी ताकत लगाएगी।
भले ही चंद्रशेखर कहते रहे हों कि वह प्रदेश की 79 सीटों पर गठबंधन के साथ हैं, पर उन्होंने एक दूसरा एलान कर कांग्रेस को नए फॉर्मूले की राह पकड़ा दी है। यह एलान रहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी ताल ठोंकने का। इस एलान ने ही कांग्रेस को यह सोचने पर मजबूर किया कि चंद्रशेखर कांग्रेस के लिए अनुसूचित जाति के वोटरों को जोड़ने का जरिया हो सकते हैं। चूंकि भीम आर्मी, खास तौर से चंद्रशेखर ने अनुसूचित जाति के युवाओं में खास पहचान बनाई है और बसपा भी इससे कहीं न कहीं सचेत है। बसपा को आशंका है कि उसका कैडर वोट कहीं भीम आर्मी के साथ खड़ा न हो जाए। यही कारण है कि बसपाई भीम आर्मी के साथ न होने की बात बार-बार कहते हैं।
इमरान मसूद रहे इस मुलाकात के सूत्रधार
चंद्रशेखर और सहारनपुर के कांग्रेस नेता इमरान मसूद की नजदीकियां जगजाहिर हैं। मई 2017 में शब्बीरपुर कांड के समय चंद्रशेखर पर जब रासुका लगी थी, तो इमरान मसूद उनके साथ खड़े थे। यह नजदीकी लगातार मजबूत होती चली गई और दोनों तरफ से समय-समय पर एक-दूसरे का साथ देने का इशारा किया गया। इमरान पश्चिम यूपी में कांग्रेस के कद्दावर नेता हैं। राहुल गांधी और प्रियंका के लखनऊ में निकाले गए रोड शो के दौरान भी वह अहम भूमिका में नजर आए थे। उन्होंने ही इस मुलाकात की पटकथा लिखी। हालांकि वह प्रियंका के साथ ही अस्पताल पहुंचना चाहते थे, पर पीछे रह गए और तब यहां पहुंचे, जब प्रियंका जा चुकी थीं। उन्होंने ही प्रियंका, राजबब्बर, ज्योतिरादित्य के जेहन में यह बात डाली कि चंद्रशेखर से मिलने का यह अच्छा अवसर है।
बन सकते हैं नए समीकरण
कांग्रेस पश्चिम में मुस्लिम समीकरण पर तो काम कर ही रही है, साथ ही अनुसूचित जाति के वोटरों को जोड़ने की भी मंशा है। चूंकि पश्चिम यूपी में पूरा गठबंधन ही इसी समीकरण पर लड़ रहा है तो कांग्रेस भी इसमें सेंध लगाना चाह रही है। इसके अलावा ब्राह्मण, अति पिछड़ों पर भी निगाह है।
चंद्रशेखर के नगीना से चुनाव लड़ने की चर्चा
इस नए समीकरण का ही असर रहा कि यह चर्चा शुरू हो गई कि कांग्रेस चंद्रशेखर को सुरक्षित सीट नगीना से चुनावी मैदान में उतार सकती है। हालांकि चंद्रशेखर ने इससे इंकार कर दिया है, पर राजनीति में चर्चा कब हकीकत में बदल जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता।
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