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लोकसभा चुनाव 2024: आधी आबादी के लिए पश्चिम का मैदान सूखा, कैराना छोड़कर सभी सीटों पर पुरुषों का अधिपत्य

Tue, 19 Mar 2024 02:45 PM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 19 Mar 2024 02:45 PM IST
सार

हर क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहराने वाली महिलाओं को लोकसभा चुनाव में तवज्जो नहीं दी जा रही है। कैराना छोड़कर सभी सीटों पर पुरुषों का अधिपत्य नजर आ रहा है। अतीत की बात करें तो चंद महिलाएं ही सांसद-विधायक बन सकीं हैं।

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Lok Sabha Elections 2024: Western UP ground dry for Women, men dominate all sheets except Kairana
महिला मतदाता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महिलाएं भले ही हर क्षेत्र में नित नए आयाम गढ़ रही हों, अपनी काबिलियत का लोहा मनवा रही हों, लेकिन राजनीति में उन्हें वह मुकाम कभी नहीं मिला, जिसकी वे हकदार हैं। यहां से चंद महिलाएं ही सांसद और विधायक बन सकी हैं। आगामी  लोकसभा चुनाव में भी सिर्फ एक महिला को टिकट मिला है। कैराना से इकरा हसन को सपा ने टिकट दिया है। 

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मेरठ लोकसभा क्षेत्र से सिर्फ दो बार महिला सांसद मेरठ का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस क्षेत्र में कांग्रेस ने पांच बार महिला को अपना प्रत्याशी बनाया। बसपा, सपा और भाजपा ने कभी भी किसी महिला पर भरोसा नहीं जताया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी कई सीटें हैं जहां से अभी तक कोई महिला उम्मीदवार जीतकर संसद की चौखट तक नहीं पहुंच पाई हैं। 
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महिला मतदाता 
 मेरठ    12,29,889 
 सहारनपुर    12,25,125 
 बिजनौर    12,77,271 
 शामली    7,98,729 
 बागपत    6,82,482 
 मुजफ्फरनगर    9,88,919

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लोकसभा में जिलों का हाल 
मेरठ लोकसभा सीट
वर्ष 1980 में मेरठ लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने सबसे पहले महिला प्रत्याशी के रूप में मोहसिना किदवई को चुनाव मैदान में उतारा था। उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी विजय पताका फहराई। उन्होंने जनता पार्टी के प्रत्याशी हरीश पाल को 57,217 मतों से हराया था। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें फिर मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने लोकदल के मंजूर अहमद को 96,518 वोटों से हरा दिया। दोनों बार लोकसभा में मेरठ का प्रतिनिधित्व महिला सांसद ने किया।

 

वर्ष 1984 के चुनाव में जनता पार्टी से अंबिका सोनी और निर्दलीय प्रत्याशी नाहिदा मालिक ने भी इस क्षेत्र से भाग्य आजमाया था। वर्ष 1989 के चुनाव में कांग्रेस से मोहसिना किदवई और निर्दलीय प्रत्याशी नाहिदा मलिक चुनावी समर में आमने-सामने थीं। दोनों महिला प्रत्याशी हार गई थीं। वर्ष 1998 में कांग्रेस से फिर मोहसिना किदवई, जनता दल से शाहीन परवेज समेत तीन महिलाएं चुनाव मैदान में थीं, लेकिन तीनों हार गई थीं।

 

वर्ष 2004, 2009 में एक-एक महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में थी। 2014 में कांग्रेस ने फिर आधी आबादी पर विश्वास करते हुए सिने अभिनेत्री नगमा को चुनावी मैदान में उतार था। उन्हें 42,911 मत मिले थे और वह चौथे स्थान पर रहीं। वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस, सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा, किसी ने भी महिला प्रत्याशी को चुनावी रणभूमि में नहीं उतारा। 

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बिजनौर
1985 में पहली बार मीरा कुमारी यहां से सांसद चुनी गईं। इसके बाद 1989 के चुनाव में बिजनौर के लोगों ने बीएसपी से पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को चुनकर सांसद भेजा। 1998 में एसपी से ओमवती सांसद बनीं। 

कैराना
2004 में पहली बार आरएलडी की महिला उम्मीदवार अनुराधा चौधरी को सांसद बनाकर भेजा। 2009 में तबस्सुम हसन बीएसपी से सांसद बनीं। पिछले साल हुए उपचुनाव में तबस्सुम फिर से सांसद चुनी गईं। पूर्व सांसद हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह भी उपचुनाव लड़ी थीं।

मुरादाबाद
लोकसभा चुनाव में मुरादाबाद सीट से किसी भी महिला को अभी तक सांसद बनने का मौका नहीं मिल पाया है। हालांकि पार्टियों ने यहां से महिला प्रत्याशियों को उम्मीदवार बनाया, लेकिन उन्हें जीत हासिल नहीं हुई।

मुजफ्फरनगर-बागपत सहारनपुर
वेस्ट यूपी की दो अहम जिले मुजफ्फरनगर और सहारनपुर सीट पर भी आजादी के बाद आज तक कोई महिला सांसद नहीं चुनी गईं। कुछ ऐसा ही हाल बागपत संसदीय सीट का है जहां के लोगों ने आज तक किसी महिला को संसद में नहीं भेजा।

Lok Sabha Elections 2024: Western UP ground dry for Women, men dominate all sheets except Kairana
अलका तोमर - फोटो : अमर उजाला

राजनीतिक दलों को महिलाओं को भी अधिक से अधिक टिकट देने चाहिए। महिला बिल भी पास हो चुका है। वर्तमान सरकार के पास भी मौका है कि वह इसे साबित करे और महिलाओं को अधिक टिकट दे। - अलका तोमर, अर्जुर अवार्डी कुश्ती खिलाड़ी व कोच 

राजनीतिक दलों द्वारा महिलाओं को बहुत कम मौका दिया जा रहा है। खेल, सरकारी नौकरी व अन्य क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। पार्टियों को भी चाहिए कि वह उन्हें अधिक से अधिक मौका दें।    -जैनब खातून, अंतरराष्ट्रीय पावर लिफ्टर

महिलाएं आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता दर्शा रही हैं। बेहतर लीडर हैं। महिलाएं राजनीति में अगर कम हैं तो इसका बड़ा कारण उन्हें कम मौका मिलना भी है। उन्हें ज्यादा मौका मिलना चाहिए। -डॉ. मनीषा त्यागी, पूर्व सचिव, आईएमए

महिला लोकसभा में मेरठ का प्रतिनिधित्व करेंगी कई समस्याओं का समाधान होगा। महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। महिलाओं की हर क्षेत्र में भागीदारी आवश्यक है। - गरिमा विभोर अग्रवाल, अध्यक्ष, आईआईए वुमन सेल

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