लोकसभा चुनाव 2019: पहले चरण में इन आठ सीटों का रहेगा अहम रोल, होगा महामुकाबला
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पहले चरण के मतदान के लिए 11 अप्रैल की तारीख तय की गई है। इस चुनाव के लिए लोकसभा सीटों पर नामांकन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। पश्चिमी यूपी की आठ महत्वपूर्ण सीटों पर भी इसी दिन मतदान होना है। इनमें पार्टियों की हार-जीत का रुख तय करने में अहम भूमिका निभाने वाली कई सीटें ऐसी हैं जो सांप्रदायिक सद्भाव के तौर पर काफी संवेदनशील मानी जाती हैं और राजनीति का गढ़ कही जाती हैं। आइए जानते हैं आखिर किन सीटों पर टिकी रहेगी सियासी नजर: -
कैराना लोकसभा सीट
यूपी के शामली की कैराना लोकसभा सीट 2019 चुनाव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 2014 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा के हुकुम सिंह ने जीत हासिल की थी। उनके निधन के बाद उपचुनाव में उनकी बेटी मृंगिका सिंह ने रालोद की प्रत्याशी तब्बसुम के खिलाफ चुनाव लड़ा, जिसमें बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। 2019 के लिए एक बार फिर तबस्सुम को टिकट दिया गया है। जाहिर है फिर से भाजपा और गठबंधन की तिकड़ी के बीच टक्कर का मुकाबला होगा। गौरतलब है कि उपचुनाव से पहले पलायन के मुद्दे को लेकर यह सीट काफी सुर्खियों में रही थी। सांप्रदायिक रूप से यह सीट बेहद संवेदनशील मानी जाती है।
मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट
जाट-गुर्जर व मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सीट पर भाजपा और गठबंधन अपनी- अपनी दावेदारी जता रहे हैं। 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद इस सीट पर सियासत और भी बढ़ गई और यह प्रदेश की सबसे संवेदनशील सीट मानी जाने लगी है। आगामी चुनाव में इस सीट पर राष्ट्रीय लोक दल के प्रमुख चौधरी अजित सिंह मैदान में उतरेंगे। वहीं भाजपा से जल्द ही प्रत्याशी का नाम साफ कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि अजित से संबंधों के चलते कांग्रेस ने इस सीट पर प्रत्याशी न उतारने का फैसला लिया है।
बागपत लोकसभा सीट
जाटलैंड के रूप में पहचानी जाने वाली इस सीट पर भी सियासत गरम है। जाट मतों के बाद इस सीट पर सबसे बड़ी संख्या मुस्लिम मतदाताओं की है। 2019 के चुनाव में भाजपा और गठबंधन के बीच यहां तगड़ा मुकाबला होने जा रहा है। चौधरी अजित सिंह का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर 2014 में भाजपा ने जीत हासिल की और सत्यपाल सिंह को सांसद चुना गया। इस बार बागपत सीट पर गठबंधन ने अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी को चुनावी मैदान में उतारा है। इस सीट पर भी कांग्रेस ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है, अब भाजपा और गठबंधन का सीधा मुकाबला होगा।
मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट
लंबे समय से मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती रही है। पिछले दो बार से भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल सांसद रह चुके हैं। 2014 में इस सीट पर बसपा के प्रत्याशी रहे हाजी शाहिद अखलाक ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। आगामी चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर के कयास लगाए जा रहे हैं। राजनीति का केंद्र कही जाने वाली इस सीट से चुनावी रैलियों की शुरुआत करने को भाजपा शुभ संकेत मानती है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्रांतिधरा से ही यूपी में चुनावी शंखनाद करने जा रहे हैं। पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने यूपी में अपनी रैलियों की शुरुआत इसी जिले से की थी।
बिजनौर लोकसभा सीट
मतों के लिहाज से यह पश्चिमी यूपी की महत्वपूर्ण लोकसभा सीट है। पिछले चुनाव में इस सीट से रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी। हालांकि इस सीट पर लंबे समय कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के पाले में गई। सपा दूसरे व बसपा तीसरे स्थान पर रहीं। रालोद यहां से चौथे नंबर पर रही थी। अब इन गठबंधन का हिस्सा हैं। ऐसे में भाजपा के आगे बड़ी चुनौती होगी। यह सीट बसपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं से बसपा सुप्रीमो मायावती ने पहली बार चुनाव लड़ा था और जीत हासिल कर सांसद बनी थीं।
नगीना लोकसभा सीट
पश्चिमी यूपी नगीना लोकसभा सीट एक आरक्षित सीट है। पहली बार ये सीट सपा के खाते में आई। इसके बाद 2014 के चुनाव में भाजपा ने यहां अपना परचम लहराया और यशवंत सिंह सांसद चुने गए। मुस्लिम व अनुसूचित मतदाताओं वाली इस सीट पर एक बार फिर भाजपा अपनी नजर गढ़ाए हुए है। इस सीट पर दूसरे चरण 18 अप्रैल को मतदान होना है। कांग्रेस ने नगीना सीट पर ओमवती देवी जाटव को अपना प्रत्याशी बनाया है।
सहारनपुर लोकसभा सीट
कांग्रेस इस सीट को अपनी पहली लिस्ट में शामिल करती है। हालांकि पिछले चुनाव में इस सीट पर भाजपा के राघव लखनपाल ने जीत हासिल की थी लेकिन, कांग्रेस से उसे कड़ी टक्कर मिली थी। वहीं आगामी चुनाव के लिए इस सीट पर कांग्रेस ने इमरान मसूद को मैदान में उतारा है। मुस्लिम मतों के हिसाब से यह सीट काफी महत्वपूर्ण है। इमरान मसूद यह कह भी चुके हैं कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का मुकाबला सिर्फ भाजपा के साथ होगा। अन्य राजनैतिक दल दौड़ से बाहर रहेंगे। गौरतलब है कि इमरान मसूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने के बाद सुर्खियों में आ गए थे।
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