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मिशन 2019: तीन तलाक..., तीन लफ्ज़ पर खिंचीं सियासी तलवारें, चुनाव में कितना असर दिखाएगा मुद्दा  

Sun, 31 Mar 2019 12:40 PM IST
Dimple Sirohi शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 31 Mar 2019 12:40 PM IST
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Lok sabha Elections 2019:  political swords drawn on triple talaq issue in western u
तीन तलाक, नरेंद्र मोदी - फोटो : फाइल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ की सभा में तीन तलाक का जिक्र कर संकेत दिए हैं कि भाजपा इसे मुद्दा बनाएगी। पीड़ितों के लिए यह बड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि केवल तीन शब्दों से रिश्तों को खत्म नहीं किया जा सकता। उलमा का मानना है कि भाजपा अपने सियासी फायदे के लिए इस मुद्दे को उठाने का प्रयास करेगी, लेकिन आम लोगों के बीच यह मुद्दा नहीं है। वेस्ट यूपी में कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, रामपुर, संभल, मुरादाबाद व अलीगढ़ मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की प्रमुख सीटें हैं। यह मुद्दा कितना असरदार होगा, इस पर अमर उजाला की एक रिपोर्ट...
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तीन तलाक के मुद्दे ने वेस्ट यूपी के सियासी पारे को चढ़ा दिया है। इस पर मुस्लिम महिलाओं में उम्र और तजुर्बे का अंतर साफ नज़र आ रहा है। मेरठ में केवी की सेवानिवृत्त शिक्षिका नायब जेहरा जैदी कहती हैं जुमले किसी की सोच नहीं बदल सकते। लोग शरीयत को मानते हैं। शरीयत में तीन बार तलाक कहने से तलाक नहीं होता।
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करियर काउंसलर मदिहा शाह रसूल कहती हैं कि अब ऐसे मामले बहुत कम हैं। सोच बदली है। असिस्टेंट प्रोफेसर जैनब नकवी कहती हैं कि पिछले 50 सालों में मुस्लिम महिलाओं पर तीन तलाक के नाम पर अत्याचार हुआ है। अब इस सोच को बदलने का वक्त आया है। इस्माइल कॉलेज में एमए की छात्रा तबस्सुम कहती है तीन तलाक के नाम पर महिलाओं का जो शोषण हुआ है अब हम उसे नहीं सहेंगे। 
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बोले उलमा, भाजपा मुद्दा बनाए, पर फर्क नहीं पड़ेगा
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारूकी का कहना है कि तीन तलाक बिल हिंदुस्तान के बुुनियादी ढांचे और दस्तूर (कानून) के खिलाफ है। किसी भी हिंदुस्तानी के हक को खत्म न किया जाए, चाहे वह मुस्लिम हो हिंदू, सिख या फिर ईसाई हो। अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि भाजपा इसे चुनाव में मुद्दा बनाएगी, लेकिन इसका कोई असर चुनाव में होने वाला नहीं है। मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि भाजपा हमेशा कोई न कोई मुद्दा लाकर लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है, कभी राम मंदिर तो कभी तीन तलाक। जनता बहुत परेशान हो चुकी है और लोग अब परिवर्तन चाहते हैं। - देवबंद (नौशाद उस्मानी)

मुजफ्फरनगर में कोई नहीं कर रहा चर्चा
तीन तलाक मुद्दे पर न तो भाजपा नेता बोल रहे हैं और न ही गठबंधन के नेता कोई चर्चा कर रहे हैं। सामाजिक संस्था अस्तित्व की अध्यक्ष रेहाना अदीब कहती हैं कि तीन तलाक को लेकर यहां अधिक मामले सामने नहीं आए हैं।

तीन तलाक के मुद्दे का चुनाव में कोई असर नहीं पड़ेगा
जमीयत उलमा हिंद के सदर मौलाना साजिद और मौलाना अय्यूब कहते हैं कि इस मुद्दे का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। समाज शरीयत और कुरान से बाहर नहीं जाएगा। मुफ्ती साजिद का कहना है कि इससे मुस्लिम समाज की महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई है। इसका चुनाव और समाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। -शामली (संजीव शर्मा)

पीड़ितों के दिल में बड़ा मुद्दा
पीड़ितों का मानना है कि चुनाव में  तीन तलाक मुद्दा बनेगा। मुरादनगर (गाजियाबाद) निवासी रुखसार कहती हैं कि ससुराल में उसका उत्पीड़न हुआ, शौहर से मदद मांगी तो उसने मोबाइल फोन पर ही तीन तलाक बोल कर रिश्ता खत्म कर दिया। उसके पिता शौकीन कहते हैं कि जो बेटियां दर्द झेलती है, वही तीन तलाक की पीड़ा को समझ सकती है। तीन तलाक पीड़िता निवाड़ा निवासी नसरीन भी इस पर सख्त कानून बनाए जाने पर जोर देती है।  -बागपत(मदन बालियान)

अब बदल रहा नजरिया
नगीना स्थित शरई अदालत में तीन तलाक के 100 मुकदमे चल रहे हैं। किरतपुर के मोहल्ला लुहारान निवासी जैसमिन चौधरी, बिजनौर की रुखसाना और फरजाना भी तीन तलाक से पीड़ित हैं। मुस्लिम युवतियों के लिए यह बड़ा मुद्दा है। मदरसा जमीयतुल कुरान वस्सुन्नाह अलखयरियाह के संस्थापक मौलवी फुरकान का कहना है कि कुछ लोग चुनाव में तीन तलाक को मुद्दा बना सकते हैं। कितना बड़ा मुद्दा होगा यह कहा नहीं जा सकता है। 

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