मिशन 2019: ऐन वक्त पर चुनाव का रुख पलट देता है खाप पंचायतों का इशारा, ये रहा इतिहास
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सियासत से दूर रहने का दावा करने वाली खाप पंचायतों की धमक लखनऊ और दिल्ली तक सुनी जाती रही है। सीधे तौर पर भले ही खाप पंचायतें चुप हों, सीधे तौर खाप मुखिया भी किसी का समर्थन नहीं करने की बात कर रहे हैं, लेकिन ऐन वक्त पर इनका एक इशारा किसी के भी चुनाव का रुख पलट देता है। ऐसा पूर्व में कई बार हुआ है। शायद यही कारण है कि हर प्रत्याशी खाप चौधरियों की चौखट दस्तक दे रहा है। कैराना, मुजफ्फरनगर और बागपत में इनका रुख काफी अहम है।
सामाजिक सुधार और न्याय व्यवस्था के संचालन के लिए बनाई गई, खाप पंचायतों से 1857 के गदर में मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर ने भी पत्र लिखकर मदद मांगी थी। मुजफ्फरनगर के गांव सौरम की चौपाल से क्रांति का बिगुल बजा। आजादी के बाद समाज की हवा बदलने लगी। खाप पंचायतों के फैसले भी सुर्खियों में रहे हैं। कई बार इनपर सवाल भी खड़े हुए। बालियान खाप के गांव भौरा खुर्द के पंकज सिंह कहते हैं कि खाप चौधरी से बात करने के बाद ही मतदान किया जाएगा। जैसा वह कहेंगे, पूरा क्षेत्र तो उनके पीछे खड़ा है। मुजफ्फरनगर ही नहीं, बल्कि पूरी किसान बिरादरी उनका सम्मान करती है। बड़ौत के सौरभ कहते हैं कि चौधरी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन खाप के लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। मतदान से पहले उनका रूख भी जानने की कोशिश की जाएगी।
सियासत में रहा है खाप का दखल
- बालियान खाप के चौधरी एवं भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्व. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने संगठन का राजनीतिक विंग बनाया था।
- भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।
- भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत के चाचा भोपाल सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली से चुनाव लड़ा था।
- गुर्जर कलस्यान खाप की चौधराहट बाबू हुकुम सिंह के परिवार में रही है। सियासत में हुकुम सिंह का रसूख रहा, खाप भी सक्रिय रही।
- मुस्लिम गुर्जर खाप की चौधराहट कैराना में तबस्सुम हसन के परिवार में है। खाप के लोग हसन परिवार के साथ मिलकर खड़े नजर आते हैं।
- मुजफ्फरनगर में हरेंद्र मलिक, बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक और पूर्व विधायक पंकज मलिक का गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन मलिक से खास लगाव रहा है।
बालियान खाप
टिकैत का घर सियासी गहमागहमी का केंद्र बना
मुजफ्फरनगर के 84 गांव की बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत का घर सियासी गहमा गहमी का केंद्र बना हुआ है। पहले रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह, उसके बाद भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान और फिर रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी वहां पहुंचे। यहां की ‘लंच डिप्लोमेसी’ सियासी गलियारों में चर्चा का विषय है। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत कहते हैं कि गांव सिसौली खाप का घर है, जो भी आएगा पूरा सत्कार करेंगे। इसे राजनीति से जोड़ा जाना गलत है।
देशखाप
बागपत के बड़ौत की 84 गांव की देशखाप के चौधरी सुरेंद्र सिंह के घर भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यपाल सिंह और रालोद प्रत्याशी जयंत चौधरी वोट मांगने जा चुके हैं। चुनाव का जिक्र छिड़ते ही सुरेंद्र सिंह कहते हैं कि सबका सम्मान है। जनता खुद फैसला करें और अपनी मर्जी से वोट दें।
गठवाला खाप
शामली के लिसाढ़ गांव में 54 गांव की गठवाला खाप की चौधराहट है। चौधरी हरिकिशन मलिक (93) कहते हैं कि सब उनके अपने हैं। इस क्षेत्र ने दंगा झेला है, अब जरूरत समाज को जोड़कर चलने की है। उनके बेटे राजेंद्र सिंह कहते हैं कि वोट पर सबका अपना अधिकार है।
बत्तीसा खाप
बत्तीसा खाप का मुख्यालय गांव भैंसवाल में है। इस खाप के चौधरी सूरजमल कहते हैं कि खाप तो सबकी है, किसी एक की खास नहीं हो सकती। जो भी उनके घर पर आएगा, उसका सम्मान किया जाएगा। इसे राजनीति के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
क्या सोच रही कैराना की कलस्यान चौपाल
कलस्यान खाप गुर्जरों की बड़ी खाप है। इसका मुख्यालय कैराना में कलस्यान चौपाल है, जहां से सारी गतिविधियां संचालित की जाती रही है। पूर्व सांसद हुकुम सिंह का चुनाव संचालन भी इसी चौपाल से होता रहा है। हुकुम सिंह के परिवार के ही रामपाल सिंह इस खाप के चौधरी हैं। इस बार हुकुम सिंह की बेटी मृगांका का टिकट कटने से गुर्जरों में नाराजगी है। फिलहाल मृगांका भाजपा के मंचों पर दिखाई दे रही है, लेकिन इस बार खाप का मूड क्या होगा, इस पर भी सवाल है।
गठवाला और बालियान खाप में फंसा पेंच
इस बार गठवाला और बालियान खाप में पेंच भी फंसा है। भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान बालियान खाप से ही है। कैराना में चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी हरेंद्र मलिक गठवाला खाप के है। इन दोनों सीटों के नतीजे बताएंगे कि वोटों का ध्रुवीकरण कैसे हुआ।
खामोश है कश्यप 360
कश्यप बिरादरी का पश्चिम यूपी में बड़ा वोट बैंक है। कश्यप 360 के नाम से बिरादरी की चौधराहट खेकड़ा में हैं। चौधरी बबली कश्यप कहते हैं कि वह किसी एक का समर्थन नहीं करते हैं। सभी प्रत्याशी उनके घर आए हैं, वह तो सबका स्वागत कर रहे हैं। वोट का फैसला तो जनता खुद करती है।
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