अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट: लोकसभा चुनाव से पहले ये तीन बड़े मुद्दे, जिन्हें नहीं भूलेगी जनता
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चुनाव में फिर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का मुद्दा गर्माएगा। चुनाव से पहले इस पर बहस भी शुरू हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने जीएसटी को गब्बर सिंह टैक्स बताते हुए चुनावी सभाओं में भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। भाजपा इसे अपनी उपलब्धि बता रही है। व्यापारी और उद्यमी भी इसमें सरलीकरण की मांग कर रहे हैं। 15 लाख के मुद्दे पर भी विपक्ष सरकार को घेर ही रहा है, साथ ही नोटबंदी पर भी घेरेगा। सियासी मंचों पर तो जीएसटी, नोटबंदी और 15 लाख का मुद्दा है, लेकिन आम लोगों की नजर में ये कितने बड़े मुद्दे, इस पर अमर उजाला की एक रिपोर्ट...
300 से ज्यादा बदलाव, पहले जैसा विरोध भी अब नहीं
जीएसटी लागू होने के बाद मेरठ में 19 हजार 39 नए व्यापारियों ने जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन कराया है। इससे पहले यहां 32 हजार व्यापारी वैट के तहत पंजीकृत थे। जीएसटी के तहत 51 हजार 39 व्यापारी पंजीकृत हैं। जीएसटी के तहत ओवरऑल बढ़ोतरी हुई है। वैट खत्म हुए करीब 20 माह का समय हो चुका है। जब वैट लागू हुआ था, तब जुलाई 2016 से फरवरी 2017 तक मेरठ में 587.78 रुपये करोड़ वैट वसूला गया था। जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई 2017 से फरवरी 2018 तक जीएसटी 562.66 करोड़ वसूला गया। यानि वैट से कम हो गया।
इसके बाद शासन ने सख्ती की। तब जुलाई 2018 से फरवरी 2019 तक 647.97 करोड़ रुपये टैक्स वसूला गया। हालांकि पिछले तीन माह में टैक्स घटा है। शुरू में व्यापारियों ने जीएसटी का काफी विरोध किया था। यही वजह है कि जीएसटी में अब तक 300 से ज्यादा बदलाव हो चुके हैं। अभी भी जीएसटी को लेकर व्यापारियों की मिश्रित प्रतिक्रिया है। अब पहले जितना विरोध नहीं है, हालांकि व्यापारी अभी भी जीएसटी में कुछ बदलाव चाहते हैं।
नोटबंदी से रियल स्टेट हुआ धड़ाम तो आम जनता रही परेशान
केंद्र सरकार ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी का फैसला लिया था। इस दौरान जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घंटों एटीएम पर खडे़ होकर कैश निकालना पड़ रहा था। नए नोटों के साइज के हिसाब से पुरानी मशीनों के बाक्स अलग थे। जिसके चलते यह परेशानी लंबे समय तक रही। शहर में आज भी कुछ एटीएम नोटबंदी के बाद चालू नहीं हैं। रियल इस्टेट का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ। परतापुर एसबीआई शाखा प्रबंधक हरीश वाधवा ने बताया नोटबंदी से पहले तैयारियां अधूरी थीं। जिसके चलते सभी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
बोले व्यापारी, जीएसटी-नोटबंदी ने किया परेशान
उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष राधेश्याम नारंग का कहना है कि व्यापारी अभी भी जीएसटी और नोटबंदी के प्रभाव से उबर नहीं पाए हैं। इसका असर आने वाले चुनावों पर भी साफ दिखाई देगा। बड़ौत के टाइल्स व्यापारी आकाश चौधरी कहते हैं कि नोटबंदी से फायदा कम और नुकसान अधिक हो गया है। वहीं बिजनौर से उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल जिलाध्यक्ष मनोज कुच्छल के अनुसार जीएसटी के बाद व्यापार बढ़ा है। शामली के उद्यमी अंकित गोयल कहते हैं कि जीएसटी और नोटबंदी को लोग भूल चुके हैं। पइस बार भी यह मुद्दा नजर नहीं आ रहा। द गुड़ खांडसारी मर्चेंट्स एसोसिएशन के मंत्री श्याम सिंह सैनी ने कहा कि अब व्यापारी जीएसटी समझ चुके हैं, और सरकार ने भी इसकी कठिनाईयों को दूर कर दिया है।
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