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लोकसभा चुनाव 2019: पश्चिम यूपी में जाट, दलित और मुस्लिम फार्मूले का इम्तिहान

Sat, 23 Feb 2019 05:23 PM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Sat, 23 Feb 2019 05:23 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019 Examination of Jaat, Dalit and Muslim formulas in western UP
अखिलेश यादव, मायावती और अजित सिंह

सपा और बसपा के गठबंधन में तीसरा साथी रालोद है। लोकसभा चुनाव में तीनों दलों का ही नहीं बल्कि जाट, मुस्लिम और दलित समीकरण का भी इम्तिहान होगा। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन की तस्वीर भी इसी फार्मूले से साफ होगी। चुनाव प्रचार में बसपा अध्यक्ष मायावती के अगले कदम पर दलित वोटरों की निगाह टिकी हुई है। इसकी वजह यह है कि रालोद और बसपा के बीच सीधे तौर पर गठबंधन की कोई बात नहीं हुई है। कैराना उपचुनाव में मायावती प्रचार से दूर रही। देखने वाली बात यह होगी जाट मतदाता सपा और बसपा के प्रत्याशियों को कितने वोट देते हैं।

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सियासी दलों ने लोकसभा चुनाव की तैयारी को तेज कर दिया। दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही निकलता है। प्रदेश में भाजपा से मुकाबला करने के लिए सपा, बसपा और रालोद एक साथ चुनाव लड़ने जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि तीनों दलों के इस गठबंधन में पश्चिम उत्तर प्रदेश के जाट, मुस्लिम और दलित समीकरण के संकेत मिल रहे हैं। साल 2019 लोकसभा चुनाव में यह फार्मूला कामयाब रहा तो प्रदेश में साल 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी इसे आजमाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने प्रेस को जारी बयान में भी यह स्पष्ट किया है कि रालोद भविष्य में भी सपा और बसपा के साथ चलेगा, लेकिन इस गठबंधन में कई सवाल बाकी है। बसपा और रालोद की सीधे तौर पर कोई बातचीत नहीं हुई है। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच बातचीत हुई। इसमें बसपा ने सिर्फ तीनों सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारने पर सहमति जताई है। देखने वाली बात यह होगी कि बसपा अध्यक्ष लोकसभा चुनाव में क्या रालोद के लिए प्रचार में उतरेगी या फिर वह बिजनौर और मेरठ जैसी जाट समाज के प्रभाव वाली सीटों पर चौधरी अजित सिंह या जयंत चौधरी को भी प्रचार के लिए बुलाएंगी या नहीं। मतदाताओं में भी इस तरह की तमाम चर्चाएं हैं। मुजफ्फरनगर से चौधरी अजित सिंह के मैदान में उतरने के कारण इस बार यह सीट वीआईपी होगी। यहां देखने वाली बात यह होगी कि मुस्लिम और दलित वोटर रालोद को कितना वोट कर पाएंगे। इसी तरह कैराना में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस लोकसभा क्षेत्र के जाट मतदाताओं का क्या रुझान रहता है। बागपत में रालोद की सीधी टक्कर भाजपा से होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जाहिर है कि सियासत के गणित में जाट, दलित और मुस्लिम वोटरों के मिजाज का भी इस बार पश्चिम की सीटों पर इम्तिहान होगा।

इनसेट
कौन-कौन सी सीट छोड़ देगी कांग्रेस

सपा, बसपा और रालोद के गठबंधन ने अमेठी और रायबरेली की सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है। देखने वाली बात यह होगी कि क्या कांग्रेस भी गठबंधन के खास उम्मीदवारों के लिए इस तरह का फैसला करती है या नहीं। बहुत संभव है कि कांग्रेस मुजफ्फरनगर सीट को छोड़ दें।

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