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मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट: जातीय और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का चक्रव्यूह, किसी की राह नहीं आसान
Wed, 10 Apr 2019 04:59 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 10 Apr 2019 04:59 PM IST
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हाजी याकूब कुरैशी, राजेंद्र अग्रवाल, हरेंद्र अग्रवाल
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वेस्ट यूपी की पहले दौर की आठ सीटों पर चुनाव पूरी तरह सांप्रदायिक और जातीय ध्रुवीकरण के जाल में उलझ गया है। पहले शाकंभरी से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने अभियान की शुरुआत की। बाद में प्रधानमंत्री ने मेरठ और सहारनपुर में भाजपा के प्रचार अभियान को आगे बढ़ाया। भाजपा की इन सभाओं में मोदी और योगी ने मुजफ्फरनगर दंगा और कैराना पलायन के मुद्दे उठाए गए थे। बाद में जबानी जंग और तेज हुई।
सपा-बसपा और रालोद गठबंधन ने अपनी रैलियों की शुरुआत देवबंद से की और बसपा सुप्रीमो मायावती ने खुलकर कहा कि मुसलमान भाइयों के वोट बंटने न पाएं। रैली में एससी और जाटों को भी गठबंधन के साथ रहने की अपील की गई। अखिलेश का भाषण भी लगभग इसी लाइन पर था और भाजपा को समाज बांटने वाला बताया। मायावती के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी हमलावर रुख अपनाया।
सबसे पहले योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब बिजनौर, मुजफ्फरनगर और बागपत की रैलियों में दिया और कहा कि गठबंधन को केवल मुस्लिमों का वोट चाहिये। पिछले चुनाव में वेस्ट यूपी की इन सीटों पर मुस्लिम और एससी वोटों के बिखराव ने भाजपा की राह बेहद आसान कर दी थी और उसने ये आठों सीटें बड़े अंतर से जीत ली थीं।
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सपा-बसपा और रालोद गठबंधन ने अपनी रैलियों की शुरुआत देवबंद से की और बसपा सुप्रीमो मायावती ने खुलकर कहा कि मुसलमान भाइयों के वोट बंटने न पाएं। रैली में एससी और जाटों को भी गठबंधन के साथ रहने की अपील की गई। अखिलेश का भाषण भी लगभग इसी लाइन पर था और भाजपा को समाज बांटने वाला बताया। मायावती के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने भी हमलावर रुख अपनाया।
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सबसे पहले योगी आदित्यनाथ ने इसका जवाब बिजनौर, मुजफ्फरनगर और बागपत की रैलियों में दिया और कहा कि गठबंधन को केवल मुस्लिमों का वोट चाहिये। पिछले चुनाव में वेस्ट यूपी की इन सीटों पर मुस्लिम और एससी वोटों के बिखराव ने भाजपा की राह बेहद आसान कर दी थी और उसने ये आठों सीटें बड़े अंतर से जीत ली थीं।
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इस बार गठबंधन की वजह से भाजपा के लिये अपनी सीटें बचाने की चुनौती बेहद कड़ी हो गई है। मतदान का रुख भी बहुत कुछ तय करेगा। चुप्पी साधे बैठे वोटर मतदान में भारी उलटफेर कर सकते हैं। चूंकि वेस्ट यूपी का पहले दौन का मतदान काफी कुछ आगे के चुनाव की दिशा तय करेगा इसलिए पूरे देश की निगाह यहां पर लगी हुई है...
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट- यहां किसी के लिए भी जीत की राह नहीं आसान
चुनावी महासंग्राम में उतरे सूरमाओं ने अपने पक्ष में समीकरण बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। सबके अपने-अपने जीत के दावे हैं। जातिगत आंकड़ों की फेहरिस्त हैं। मगर किसी के लिए भी राह आसान नहीं है।
भाजपा को ध्रुवीकरण और मोदी का सहारा
भाजपा उम्मीदवार राजेंद्र अग्रवाल हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में हैं। राजेंद्र अग्रवाल का मानना है कि इस बार वैश्य, गुर्जर, ब्राह्मण, जाट, पंजाबी, त्यागी, पिछड़ों का वोट उन्हें मिल रहा है। हालांकि भाजपा ध्रुवीकरण और मोदी के सहारे मैदान में है। एससी और मुस्लिम वोट भाजपा के लिए बड़ी चिंता का कारण है।
कांग्रेस से हरेंद्र अग्रवाल वैश्य वोटों में सेंध लगा सकते हैं। पिछली बार भाजपा को जाट वोट भरपूर मिले थे, लेकिन इस बार गठबंधन के कारण जाट वोटों को समेटना चुनौती होगा। भाजपाई रणनीतिकार मानते हैं कि ज्यादा मतदान हुआ, तो भाजपा को ही लाभ होगा।
मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट- यहां किसी के लिए भी जीत की राह नहीं आसान
चुनावी महासंग्राम में उतरे सूरमाओं ने अपने पक्ष में समीकरण बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। सबके अपने-अपने जीत के दावे हैं। जातिगत आंकड़ों की फेहरिस्त हैं। मगर किसी के लिए भी राह आसान नहीं है।
भाजपा को ध्रुवीकरण और मोदी का सहारा
भाजपा उम्मीदवार राजेंद्र अग्रवाल हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में हैं। राजेंद्र अग्रवाल का मानना है कि इस बार वैश्य, गुर्जर, ब्राह्मण, जाट, पंजाबी, त्यागी, पिछड़ों का वोट उन्हें मिल रहा है। हालांकि भाजपा ध्रुवीकरण और मोदी के सहारे मैदान में है। एससी और मुस्लिम वोट भाजपा के लिए बड़ी चिंता का कारण है।
कांग्रेस से हरेंद्र अग्रवाल वैश्य वोटों में सेंध लगा सकते हैं। पिछली बार भाजपा को जाट वोट भरपूर मिले थे, लेकिन इस बार गठबंधन के कारण जाट वोटों को समेटना चुनौती होगा। भाजपाई रणनीतिकार मानते हैं कि ज्यादा मतदान हुआ, तो भाजपा को ही लाभ होगा।
एससी-मुस्लिम वोटों से गठबंधन को आस
गठबंधन की ओर से हाथी पर सवार हाजी याकूब कुरैशी चुनावी मैदान में हैं। चूंकि सपा बसपा के साथ रालोद का भी समर्थन है तो याकूब को अलग अलग जाति के वोट बैंक से आस बंधी है। पिछले चुनाव में सपा और बसपा अलग-अलग लड़े थे।
बसपा के शाहिद अखलाक को तीन लाख और सपा के शाहिद मंजूर को दो लाख 11 हजार वोट मिले थे। लेकिन तब मोदी लहर का फैक्टर भी था। गठबंधन का भी यही मानना है कि मतदान प्रतिशत बढ़ा तो इसका फायदा उसे ही मिलेगा। एससी और मुस्लिमों का वोट प्रतिशत 70 तक कराने का प्रयास है।
कांग्रेस को परंपरागत वोटरों का आसरा
पिछले चुनाव में कांग्रेस से नगमा इस सीट पर प्रत्याशी थीं। इस बार से मैदान में हरेंद्र अग्रवाल हैं, जो जीत का समीकरण पार्टी के परंपरागत वोटरों के अलावा अपनी साफ छवि को मान रहे हैं। उनके पिता बाबू बनारसी दास गुप्ता प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
पार्टी थिंक टैंक का मानना है कि वैश्य बिरादरी के अलावा भाजपा विरोधी वोट भी कांग्रेस को मिलेंगे। पिछले चुनाव में रालोद से गठबंधन के चलते जाटों का जो वोट मिला था, उसका नुकसान हो सकता है। पार्टी मुस्लिम वोटबैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश में है।
गठबंधन की ओर से हाथी पर सवार हाजी याकूब कुरैशी चुनावी मैदान में हैं। चूंकि सपा बसपा के साथ रालोद का भी समर्थन है तो याकूब को अलग अलग जाति के वोट बैंक से आस बंधी है। पिछले चुनाव में सपा और बसपा अलग-अलग लड़े थे।
बसपा के शाहिद अखलाक को तीन लाख और सपा के शाहिद मंजूर को दो लाख 11 हजार वोट मिले थे। लेकिन तब मोदी लहर का फैक्टर भी था। गठबंधन का भी यही मानना है कि मतदान प्रतिशत बढ़ा तो इसका फायदा उसे ही मिलेगा। एससी और मुस्लिमों का वोट प्रतिशत 70 तक कराने का प्रयास है।
कांग्रेस को परंपरागत वोटरों का आसरा
पिछले चुनाव में कांग्रेस से नगमा इस सीट पर प्रत्याशी थीं। इस बार से मैदान में हरेंद्र अग्रवाल हैं, जो जीत का समीकरण पार्टी के परंपरागत वोटरों के अलावा अपनी साफ छवि को मान रहे हैं। उनके पिता बाबू बनारसी दास गुप्ता प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
पार्टी थिंक टैंक का मानना है कि वैश्य बिरादरी के अलावा भाजपा विरोधी वोट भी कांग्रेस को मिलेंगे। पिछले चुनाव में रालोद से गठबंधन के चलते जाटों का जो वोट मिला था, उसका नुकसान हो सकता है। पार्टी मुस्लिम वोटबैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश में है।
वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव का हाल
जीत के समीकरण
वैश्य 2,25,000
ठाकुर 60,000
ब्राह्मण 1,50,000
त्यागी 60,000
जाट 1,00,000
गुर्जर 90,000
मुस्लिम 5,50,000
दलित 3,00,000
पंजाबी 50,000
अन्य 3,30,000
इस सीट की विधानसभाएं- मेरठ शहर, मेरठ कैंट,मेरठ दक्षिण, किठौर, हापुड़
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| प्रत्याशी | पार्टी | मिले वोट |
| राजेंद्र अग्रवाल | भाजपा | 532981 |
| शाहिद अखलाक | बसपा | 300655 |
| शाहिद मंजूर | सपा | 211759 |
| नगमा | कांग्रेस | 42911 |
जीत के समीकरण
वैश्य 2,25,000
ठाकुर 60,000
ब्राह्मण 1,50,000
त्यागी 60,000
जाट 1,00,000
गुर्जर 90,000
मुस्लिम 5,50,000
दलित 3,00,000
पंजाबी 50,000
अन्य 3,30,000
इस सीट की विधानसभाएं- मेरठ शहर, मेरठ कैंट,मेरठ दक्षिण, किठौर, हापुड़
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