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मिशन 2019: चुनावी रण का रुख तय करेगी गठबंधन की रैली, जातीय समीकरण पर रहेगी निगाह
Sun, 07 Apr 2019 12:28 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sun, 07 Apr 2019 12:28 PM IST
सार
- देवबंद में सहारनपुर मार्ग पर जामिया तिब्बिया मेडिकल कॉलेज के पास मैदान पर होनी है रैली
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बसपा सुप्रीमो मायावती
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विस्तार
भाजपा के खिलाफ बने गठबंधन की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहली चुनावी जनसभा आज होगी। सपा, बसपा और रालोद नेता एक मंच से चुनावी समीकरण साधने की कोशिश करेंगे। इस मंच पर अपने तरकश से निकले सियासी तीरों से चुनावी समीकरण पर निशाना साधेंगे। जाहिर है देवबंद में होने वाली गठबंधन की यह खास रैली चुनावी हवा का रुख तय करेगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होना है। चुनाव में पार्टी-प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए हर पार्टी दिल और जान से जुटी है। हालांकि गठबंधन में शामिल सपा, बसपा और रालोद की पश्चिमी यूपी में एकसाथ यह पहली रैली है। वहीं यह ऐसा पहला मौका है जबकि इन तीनों पार्टियों के नेता एक साथ मंच पर नजर आएंगे।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर पहले चरण में 11 अप्रैल को मतदान होना है। चुनाव में पार्टी-प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए हर पार्टी दिल और जान से जुटी है। हालांकि गठबंधन में शामिल सपा, बसपा और रालोद की पश्चिमी यूपी में एकसाथ यह पहली रैली है। वहीं यह ऐसा पहला मौका है जबकि इन तीनों पार्टियों के नेता एक साथ मंच पर नजर आएंगे।
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इससे पहले पांच अप्रैल को सहारनपुर के ही नानौता क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी यहां रैली कर चुके हैं। जहां मंच से उन्होंने सपा, बसपा और रालोद पर जमकर प्रहार किए। यहां तक कि मेरठ में पीएम मोदी ने रैली के दौरा सपा, रालोद और बसपा को 'सराब' की संज्ञा दे डाली थी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देवबंद में आयोजित इस रैली से बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और रालोद सुप्रीमो अजित सिंह मंच से इन्हें लेकर क्या सियासी पलटवार करेंगे।
एक तरफ जहां हर राजनीतिक दल पहले चरण के चुनाव से ही बढ़त बनाने की कोशिश में लगा है। वहीं जातीय समीकरणों को साधने की भी पूरा कवायद चल रही है। यही कारण है कि देवबंद क्षेत्र को चुना गया। वार-पलटवार के बीच गठबंधन के नेता मंच से पश्चिमी यूपी की जनता को कितना झुका पाएंगे यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन चुनाव से केवल चार दिन पहले होने वाली यह खास रैली चुनावी हवा का रुख बदल भी सकती है।
एक तरफ जहां हर राजनीतिक दल पहले चरण के चुनाव से ही बढ़त बनाने की कोशिश में लगा है। वहीं जातीय समीकरणों को साधने की भी पूरा कवायद चल रही है। यही कारण है कि देवबंद क्षेत्र को चुना गया। वार-पलटवार के बीच गठबंधन के नेता मंच से पश्चिमी यूपी की जनता को कितना झुका पाएंगे यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन चुनाव से केवल चार दिन पहले होने वाली यह खास रैली चुनावी हवा का रुख बदल भी सकती है।