फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Lok Sabha election 2019: Big challenge, how will coalition manage big difference in west up seats

लोकसभा चुनाव 2019: गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती, न ध्रुवीकरण, न लहर, कैसे पार हो सीटों पर अंतर

Sun, 17 Mar 2019 01:46 PM IST
देव कश्यप अमित मुद्गल, अमर उजाला, मेरठ
अमित मुद्गल, अमर उजाला, मेरठ Published by: देव कश्यप Updated Sun, 17 Mar 2019 01:46 PM IST
सार

  • पिछले चुनाव में वेस्ट यूपी की सीटों पर 50 हजार से पांच लाख वोटों के अंतर से जीती थी भाजपा ।
  • गठबंधन के सामने बड़ी चुनौती, पिछले चुनाव में हार-जीत का अंतर था बड़ा।
  • कई सीटों पर अन्य मुख्य दलों के कुल योग पर भारी पड़े था भाजपाई उम्मीदवार।

विज्ञापन
Lok Sabha election 2019: Big challenge, how will coalition manage big difference in west up seats
मायावती-अखिलेश यादव

विस्तार

पश्चिमी उप्र में गठबंधन के सामने मैदान मारने की चुनौती है। लेकिन चिंता यह भी है कि पिछले चुनाव में भाजपा द्वारा खड़े किए मतों के पहाड़ को कैसे पार पाएं। इस बार न ध्रुवीकरण है और न कोई लहर, दबाव में भाजपा भी है...

विज्ञापन


2014 में वेस्ट यूपी की अधिकतर सीटें भाजपा पचास हजार से लेकर पांच लाख मतों के अंतर से जीती थी। कई सीटें तो ऐसी थीं, जिन पर अन्य दलों को कुल मिलाकर भी इतनी वोटें नहीं मिल पाई थीं जितनी भाजपाई उम्मीदवार को अकेले को मिल गई थी। मतों का यह पहाड़ इस चुनाव में भाजपा, गठबंधन और कांग्रेस सभी के लिए चुनौती रहेगा।
विज्ञापन


सीटों पर आकलन का खेल शुरू हो गया है। कौन, कहां से लड़ेगा इस पर मंथन चल रहा है। अब प्रत्याशियों का चयन शुरू हो गया है। भाजपा और गठबंधन दोनों ही दलों के लिए यहां चुनौती है। भाजपा के लिए पिछले प्रदर्शन को बरकरार रखना चुनौती है, तो वहीं गठबंधन के सामने उस दीवार को तोड़ने की चुनौती है जो भाजपा ने पिछले चुनाव में खड़ी कर दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


लोकसभा चुनाव 2014 में मोदी लहर का असर कहा जाए या कुछ और, लेकिन भाजपा के प्रत्याशी भारी मतों से जीते थे। वेस्ट यूपी की सीटों पर उम्मीदवारों की जीत का अंतर पांच लाख वोटों के पार चला गया था।

इन सीटों पर रहा था बड़ा अंतर
सहारनपुर में भाजपा उम्मीदवार राघव लखनपाल लगभग 65 हजार वोटों से चुनाव जीते थे। कैराना से हुुकुम सिंह की जीत का अंतर दो लाख 30 हजार के पार गया था। मुजफ्फरनगर में तो भाजपा ने गजब का प्रदर्शन किया था। यहां संजीव बालियान चार लाख वोटों के अंतर से जीते थे। बिजनौर में कुंवर भारतेंद्र की जीत का अंतर दो लाख के पार गया था। मेरठ में भी राजेंद्र अग्रवाल दो लाख तीस हजार वोटों से ज्यादा के अंतर से जीते थे। 

बागपत में सत्यपाल सिंह की जीत का अंतर दो लाख से ज्यादा था तो वहीं गाजियाबाद ने तो कमाल ही कर दिया  था। यहां जनरल वीके सिंह पांच लाख साठ हजार मतों से ज्यादा के अंतर से जीत गए थे। गौतमबुद्घनगर से महेश शर्मा दो लाख 80 हजार से ज्यादा वोटों से जीते थे।

बुलंदशहर से डा. भोला सिंह की जीत का अंतर चार लाख 21 हजार को पार कर गया था। नगीना में यशवंत सिंह की जीत का अंतर 92 हजार तो मुरादाबाद में कुंवर सर्वेश सिंह की जीत का अंतर 87 हजार के पार था।

सबके लिए चुनौती
भाजपा के सामने बड़ी चुनौती यह है कि इतने बड़े मतों के अंतर से जीतने वाले धुरंधरों को इस बार मैदान में उतारें या नहीं। कई जगह विरोध होने के बावजूद पिछले चुनाव के मतों का अंतर सूरमाओं का दावा मजबूत कर रहा है। दूसरी चिंता यह भी है कि इस बार सपा, बसपा, रालोद एक साथ सामने खड़े हैं। कांग्रेस अलग से है। ऐसे में कहीं यह मोर्चा भारी न पड़ जाए।

यदि जरा भी चूक हुई तो मामला बिगड़ते देर नहीं लगेगी। उधर, गठबंधन भी चिंतित है। वह इसलिए कि पिछली बार के चुनाव में सपा-बसपा को कुल मिलाकर भी कई सीटों पर इतने वोट नहीं मिले थे, जितने अकेले भाजपा उम्मीदवार को। जैसे मेरठ सीट पर दोनों से ज्यादा वोट राजेंद्र अग्रवाल को मिले थे।

गाजियाबाद में तो वीके सिंह को इतने वोट मिल गए थे कि सारे प्रतिद्वंद्वी मिलकर भी इतना वोट नहीं ले पाए थे। कैराना में भी यही हुआ था। बुलंदशहर, अलीगढ़ आदि में यही स्थिति थी। इसी आधार पर टिकटों के मंथन से लेकर आगे की रणनीति तय करना सभी के लिए अहम होगा।

2014 में कौन कहां से कितने अंतर से जीता 
सीट  
 प्रत्याशी     मतों का अंतर
मेरठ     राजेंद्र अग्रवाल    232326 
सहारनपुर     राघव लखनपाल     65090
कैराना     हुकुम सिंह     236828
मुजफ्फरनगर    डॉ. संजीव बालियान    401150 
बिजनौर     कुंवर भारतेंद्र सिंह    205774
बागपत    सत्यपाल सिंह     209866
गाजियाबाद     वीके सिंह      567260
गौतमबुद्ध नगर    महेश शर्मा    280212
नगीना     यशवंत सिंह     92390  

-वेस्ट के नौ जिलों में सबसे कम मतों में सहारनपुर और सबसे अधिक मतों का गाजियाबाद में रहा अंतर।
-कई सीटों पर सपा-बसपा को मिलकर भी नहीं मिले थे इतने वोट जितने भाजपा उम्मीदवार को मिले थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed