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Meerut News: आरटीआई कार्यकर्ता संजय त्यागी के दो हत्यारों को उम्रकैद
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मेरठ। अदालत ने आरटीआई कार्यकर्ता संजय त्यागी की हत्या में आरोपी मुनेश कुमार उर्फ मुन्नू निवासी ग्राम भूनी और दिव्यांशु उर्फ दीपांशु निवासी गांव जुल्हेडा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायालय जिला जज संजीव पांडेय ने दोषियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। आरटीआई कार्यकर्ता की 11 साल पहले मुखबिरी के शक में रासना के जंगल में छह गोलियां मारकर हत्या की गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुरूरपुर थाने पर 24 मई 2014 को गांव रासना निवासी वैद्य सेवाराम त्यागी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ अपने बेटे संजय त्यागी की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उनका बड़ा बेटा संजय त्यागी (40) आरटीआई कार्यकर्ता और जन सूचना अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन का जिला उपाध्यक्ष था। 24 मई 2014 शनिवार दोपहर वह गांव के ही साथी पप्पू के साथ फसलों की सिंचाई के लिए बाइक से ट्यूबवेल पर गया था। दोपहर लगभग दो बजे संजय के मोबाइल पर फोन आया। इसके बाद वह कुछ काम बताकर पप्पू को छोड़कर चला गया। घंटों तक नहीं लौटा। पप्पू उसका मोबाइल मिलाता रहा, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद वह गांव की ओर चल दिया। रासना-बाड़म संपर्क मार्ग पर उसे रास्ते के किनारे संजय की बाइक दिखी। इस पर वह पास पहुंचा तो देखा कि पास में ही संजय का खून से लथपथ शव पड़ा था। सिर और शरीर में छह गोलियां मारकर उसकी हत्या की गई थी।
पुलिस की विवेचना के दौरान आरोपी मुनेश कुमार उर्फ मुन्नू, दिव्यांशु उर्फ दीपांशु और गुलजार उर्फ चांदू के नाम प्रकाश में आए। जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बहस से पूर्व एक आरोपी गुलजार उर्फ चांदू भाग गया। उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। न्यायालय में अपने केस को साबित करते हुए अभियोजन पक्ष ने 16 गवाह पेश किए। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखकर दोनों आरोपी मुनेश कुमार उर्फ मुन्नू और दिव्यांशु उर्फ दीपांरशु को सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद अदालत ने दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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ऐसे हुआ मुखबिरी का शक
मेरठ। भूनी निवासी मुनेश उर्फ मुन्नू का भाई दिनेश उर्फ बंटी एक डिंपल त्यागी नामक बदमाश का साथी था। पुलिस मुठभेड़ में डिंपल त्यागी मारा गया था तथा दिनेश उर्फ बंटी घायल हुआ था। वह उपचार के लिए रासना में संजय त्यागी के पिता वैद्य सेवाराम त्यागी के पास गया था। कुछ समय बाद दिनेश उर्फ बंटी की ऋषिकेश में कुछ बदमाशों ने हत्या कर दी थी। मुनेश उर्फ मुन्नू को शक था कि सेवाराम त्यागी ने ही दूसरे बदमाशों के लिए उसके भाई की मुखबिरी की है। भाई का बदला लेने के लिए उसने अपने साथियों जुल्हेड़ा के दिपांशु और गुलजार उर्फ चांदू से सम्पर्क किया और योजना बनाकर संजय त्यागी की हत्या कर दी थी।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, सुरूरपुर थाने पर 24 मई 2014 को गांव रासना निवासी वैद्य सेवाराम त्यागी ने अज्ञात लोगों के खिलाफ अपने बेटे संजय त्यागी की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उनका बड़ा बेटा संजय त्यागी (40) आरटीआई कार्यकर्ता और जन सूचना अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन का जिला उपाध्यक्ष था। 24 मई 2014 शनिवार दोपहर वह गांव के ही साथी पप्पू के साथ फसलों की सिंचाई के लिए बाइक से ट्यूबवेल पर गया था। दोपहर लगभग दो बजे संजय के मोबाइल पर फोन आया। इसके बाद वह कुछ काम बताकर पप्पू को छोड़कर चला गया। घंटों तक नहीं लौटा। पप्पू उसका मोबाइल मिलाता रहा, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद वह गांव की ओर चल दिया। रासना-बाड़म संपर्क मार्ग पर उसे रास्ते के किनारे संजय की बाइक दिखी। इस पर वह पास पहुंचा तो देखा कि पास में ही संजय का खून से लथपथ शव पड़ा था। सिर और शरीर में छह गोलियां मारकर उसकी हत्या की गई थी।
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पुलिस की विवेचना के दौरान आरोपी मुनेश कुमार उर्फ मुन्नू, दिव्यांशु उर्फ दीपांशु और गुलजार उर्फ चांदू के नाम प्रकाश में आए। जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बहस से पूर्व एक आरोपी गुलजार उर्फ चांदू भाग गया। उसकी पत्रावली अलग कर दी गई। न्यायालय में अपने केस को साबित करते हुए अभियोजन पक्ष ने 16 गवाह पेश किए। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों को सुनकर तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों को देखकर दोनों आरोपी मुनेश कुमार उर्फ मुन्नू और दिव्यांशु उर्फ दीपांरशु को सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद अदालत ने दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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ऐसे हुआ मुखबिरी का शक
मेरठ। भूनी निवासी मुनेश उर्फ मुन्नू का भाई दिनेश उर्फ बंटी एक डिंपल त्यागी नामक बदमाश का साथी था। पुलिस मुठभेड़ में डिंपल त्यागी मारा गया था तथा दिनेश उर्फ बंटी घायल हुआ था। वह उपचार के लिए रासना में संजय त्यागी के पिता वैद्य सेवाराम त्यागी के पास गया था। कुछ समय बाद दिनेश उर्फ बंटी की ऋषिकेश में कुछ बदमाशों ने हत्या कर दी थी। मुनेश उर्फ मुन्नू को शक था कि सेवाराम त्यागी ने ही दूसरे बदमाशों के लिए उसके भाई की मुखबिरी की है। भाई का बदला लेने के लिए उसने अपने साथियों जुल्हेड़ा के दिपांशु और गुलजार उर्फ चांदू से सम्पर्क किया और योजना बनाकर संजय त्यागी की हत्या कर दी थी।