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आत्ममंथन का समय है चालीसा काल : मार्टिन रावत
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ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने की प्रार्थना
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। चालीसा काल के अवसर पर रविवार को ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता मरियम के दरबार में मत्था टेका और प्रभु यीशु से विशेष प्रार्थना की। फादर मार्टिन रावत ने बताया कि चालीसा काल वर्ष में एक बार मिलने वाला वह पावन समय है, जो आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धिकरण का अवसर प्रदान करता है।
यह काल श्रद्धालुओं के जीवन में आंतरिक और बाहरी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। फादर ने अपने संदेश में कहा कि ईश्वर हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि अपनाने और बचाने के लिए प्रेम करते हैं, ताकि कोई भी उनसे दूर न हो। इसी भावना के साथ श्रद्धालु पापमय जीवन का त्याग कर उपवास, परहेज और प्रार्थना के माध्यम से पवित्र जीवन की कामना करते हैं।
फादर वलेरियन पिंटो ने कहा कि पिछले सप्ताह के उपवास और चार दिनों के विशेष मनन-चिंतन सहित कुल 40 दिन का यह काल, प्रभु यीशु की पीड़ा, मृत्यु और पुनरुत्थान की याद दिलाता है। क्रूस के मार्ग पर चलते हुए कलवारी पहाड़ी तक उनका अनुसरण करना, उनके दुखों में सहभागी बनने का प्रतीक है। फादर ने कहा कि चालीसा काल पश्चाताप और आत्ममंथन का समय है, जिसमें श्रद्धालु अपने दुखों को यीशु के दुखों के साथ अर्पित कर ईश्वरीय क्षमा और अनंत शांति प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रभु की दृष्टि चकाचौंध करने वाली नहीं, बल्कि कोमल दीपक की तरह है, जो हमें अपनी अच्छाइयों को पहचानने, बुराइयों का एहसास करने और जीवन में सुधार लाने की प्रेरणा देती है।
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सरधना। चालीसा काल के अवसर पर रविवार को ऐतिहासिक रोमन कैथोलिक चर्च में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता मरियम के दरबार में मत्था टेका और प्रभु यीशु से विशेष प्रार्थना की। फादर मार्टिन रावत ने बताया कि चालीसा काल वर्ष में एक बार मिलने वाला वह पावन समय है, जो आध्यात्मिक और शारीरिक शुद्धिकरण का अवसर प्रदान करता है।
यह काल श्रद्धालुओं के जीवन में आंतरिक और बाहरी परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। फादर ने अपने संदेश में कहा कि ईश्वर हमें दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि अपनाने और बचाने के लिए प्रेम करते हैं, ताकि कोई भी उनसे दूर न हो। इसी भावना के साथ श्रद्धालु पापमय जीवन का त्याग कर उपवास, परहेज और प्रार्थना के माध्यम से पवित्र जीवन की कामना करते हैं।
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फादर वलेरियन पिंटो ने कहा कि पिछले सप्ताह के उपवास और चार दिनों के विशेष मनन-चिंतन सहित कुल 40 दिन का यह काल, प्रभु यीशु की पीड़ा, मृत्यु और पुनरुत्थान की याद दिलाता है। क्रूस के मार्ग पर चलते हुए कलवारी पहाड़ी तक उनका अनुसरण करना, उनके दुखों में सहभागी बनने का प्रतीक है। फादर ने कहा कि चालीसा काल पश्चाताप और आत्ममंथन का समय है, जिसमें श्रद्धालु अपने दुखों को यीशु के दुखों के साथ अर्पित कर ईश्वरीय क्षमा और अनंत शांति प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रभु की दृष्टि चकाचौंध करने वाली नहीं, बल्कि कोमल दीपक की तरह है, जो हमें अपनी अच्छाइयों को पहचानने, बुराइयों का एहसास करने और जीवन में सुधार लाने की प्रेरणा देती है।
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