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त्याग की शिक्षा प्रकृति से लें, परिग्रह से दूर रहें : प्रतीक सागर

Wed, 23 Sep 2026 05:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 05:51 PM IST
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Learn the lesson of renunciation from nature; stay away from possessiveness: Prateek Sagar
हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में चल रहे दस दिवसीय समवशरण महामंडल विधान में बुधवार को पर्यूषण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की आराधना की गई। विधान की मांगलिक क्रियाएं प्रात: मुख्य वेदी पर भगवान जिनेंद्र के अभिषेक और शांतिधारा से शुरू हुईं। विधानाचार्य पंडित आशीष जैन शास्त्री और पंडित दिलीप जैन शास्त्री ने समवशरण जिनालय में मंगलाष्टक के साथ विधान की क्रियाएं संपन्न कराईं।
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भगवान मल्लिनाथ को सभी इंद्रों के साथ जयघोष और संगीत की स्वर लहरियों के बीच समवशरण जिनालय की तीन प्रदक्षिणा कराकर पांडुक शिला पर विराजमान कराया गया। पर्वी जैन, प्रवीण जैन, नीता जैन, आकिंचन जैन परिवार ने शांतिधारा की। विधान में शामिल सभी पात्रों ने शांतिधारा में सहयोग किया। संयोजक विजय कुमार जैन और क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन ने श्रद्धालुओं का स्वागत किया।
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मुनि प्रतीक सागर महाराज ने उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन करते हुए कहा कि त्याग की शिक्षा प्रकृति से लेनी चाहिए। वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण कर ऑक्सीजन देते हैं और समय आने पर अपने पत्ते भी त्याग देते हैं। इसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी ग्रहण करने के साथ त्याग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि धन और वस्तुओं के संग्रह के पीछे राग होता है, जबकि त्याग परिग्रह से मुक्ति का मार्ग दिखाता है। धन की सार्थकता उसे जोड़ने में नहीं, बल्कि धर्म, समाज और जरूरतमंदों के हित में उपयोग करने में है।
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क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र जैन ने कहा कि धन की तीन गतियां दान, भोग और नाश हैं। धन का सदुपयोग धर्म, राष्ट्र और समाजहित में करना चाहिए। उत्तम त्याग औषधि, शास्त्र, अभय और आहार दान के रूप में किया जाता है।


रात्रि में 48 दीपकों से भक्तामर पाठ, संगीतमय आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। भक्ति नृत्य प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रवीण जैन और नीता जैन की ओर से पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम में महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, प्रवीण जैन और प्रबंधक मुकेश जैन आदि का सहयोग रहा।
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