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Meerut News: मयूर विहार का नक्शा निरस्त कराने की याचिका हाईकोर्ट में दाखिल
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मेरठ। तेजगढ़ी चौराहे से पीवीएस रोड शास्त्रीनगर की ओर जाने पर पुल से उतरते ही बायी तरफ पड़ने वाली मयूर विहार कॉलोनी का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। कॉलोनी का नक्शा निरस्त कराने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका स्वीकृत हो गई है और अब जल्द ही इस पर सुनवाई होगी।
याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1996 में अनिल यादव ने हैफ्टी बिल्डटेक प्रा. लि. के माध्यम से मयूर विहार कॉलोनी के नाम से मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) से मानचित्र स्वीकृत कराया था। इसमें 45,680 वर्ग मीटर, मयूर विहार एक्सटेंशन फेस-2 में 34,020 वर्ग मीटर और 7,850 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के भूखंड शामिल हैं। इनसे संबंधित नक्शे क्रमश: 12 मई 1997, 1 फरवरी 2006 और 2 नवंबर 2010 को प्राधिकरण से स्वीकृत हुए थे। लोकेश खुराना का कहना है कि नक्शे स्वीकृत होने के सालों बाद भी कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित नहीं हुई। बिल्डर की ओर से मेडा से पूर्णता प्रमाण पत्र (कंपलीशन सर्टिफिकेट) भी हासिल नहीं किया गया।
कागजों में 12 मीटर का रास्ता, गेट ई-ब्लॉक में
याचिका में कॉलोनी के पहुंच मार्ग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लोकेश खुराना के अनुसार, कागजों में कॉलोनी के लिए 12 मीटर का पहुंच मार्ग दिखाया गया है, जबकि कॉलोनी का गेट आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर योजना के ई-ब्लॉक में खोला गया है। इस संबंध में मेडा में शिकायत की गई। वहां से जवाब दिया गया कि आवास एवं विकास परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं ली गई है।
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इसके बाद आवास एवं विकास परिषद से जवाब मांगा गया। परिषद ने बताया कि मयूर विहार और शास्त्रीनगर योजना आपस में मिली हुई हैं। इसी कारण लोग खुद ई-ब्लॉक रोड का इस्तेमाल करते हैं। परिषद की ओर से इसके लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है।
सात लोगों को बनाया प्रतिवादी
लोकेश खुराना ने मामले में स्टेट ऑफ यूपी, आवास आयुक्त, कमिश्नर मेरठ, मेडा उपाध्यक्ष, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और बिल्डर अनिल यादव को प्रतिवादी बनाया है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कॉलोनी का मानचित्र निरस्त करने की मांग की है।
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याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1996 में अनिल यादव ने हैफ्टी बिल्डटेक प्रा. लि. के माध्यम से मयूर विहार कॉलोनी के नाम से मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) से मानचित्र स्वीकृत कराया था। इसमें 45,680 वर्ग मीटर, मयूर विहार एक्सटेंशन फेस-2 में 34,020 वर्ग मीटर और 7,850 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के भूखंड शामिल हैं। इनसे संबंधित नक्शे क्रमश: 12 मई 1997, 1 फरवरी 2006 और 2 नवंबर 2010 को प्राधिकरण से स्वीकृत हुए थे। लोकेश खुराना का कहना है कि नक्शे स्वीकृत होने के सालों बाद भी कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित नहीं हुई। बिल्डर की ओर से मेडा से पूर्णता प्रमाण पत्र (कंपलीशन सर्टिफिकेट) भी हासिल नहीं किया गया।
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कागजों में 12 मीटर का रास्ता, गेट ई-ब्लॉक में
याचिका में कॉलोनी के पहुंच मार्ग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लोकेश खुराना के अनुसार, कागजों में कॉलोनी के लिए 12 मीटर का पहुंच मार्ग दिखाया गया है, जबकि कॉलोनी का गेट आवास एवं विकास परिषद की शास्त्रीनगर योजना के ई-ब्लॉक में खोला गया है। इस संबंध में मेडा में शिकायत की गई। वहां से जवाब दिया गया कि आवास एवं विकास परिषद से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं ली गई है।
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इसके बाद आवास एवं विकास परिषद से जवाब मांगा गया। परिषद ने बताया कि मयूर विहार और शास्त्रीनगर योजना आपस में मिली हुई हैं। इसी कारण लोग खुद ई-ब्लॉक रोड का इस्तेमाल करते हैं। परिषद की ओर से इसके लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है।
सात लोगों को बनाया प्रतिवादी
लोकेश खुराना ने मामले में स्टेट ऑफ यूपी, आवास आयुक्त, कमिश्नर मेरठ, मेडा उपाध्यक्ष, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और बिल्डर अनिल यादव को प्रतिवादी बनाया है। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कॉलोनी का मानचित्र निरस्त करने की मांग की है।