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प्राचीन टीले पर मिले 2000 साल पुराने सिक्के, इतिहास पर डाले एक नजर

Fri, 16 Nov 2018 10:19 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बागपत Updated Fri, 16 Nov 2018 10:19 PM IST
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Lakshagraha barnava news, 2000 year old coins were found in excavation
सिक्कों के बारे में जानाकारी देते शोधकर्ता - फोटो : अमर उजाला

यूपी के बागपत में खपराना गांव के प्राचीन टीले पर शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक द्वारा किए गए सर्वेक्षण में ऊपरी सतह पर ही बिखरी पड़ी प्राचीन सभ्यता के मृदभांड के अलावा 1800-2000 साल पुरानी ताम्र मुद्राएं भी प्राप्त हुई। सिक्कों, मृदभांड की जांच के बाद यह बात पुष्ट हो रही है कि इस महत्वपूर्ण गांव के 100 बीघा परिक्षेत्र में फैले टीलों पर कुषाण कालीन समेत अन्य मानव सभ्यता मौजूद रही। इस प्रारंभिक सर्वेक्षण के दौरान प्राप्त दुर्लभ मुद्राओं, पुरावशेष के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार कर ली गई है, इसे अमित राय जैन द्वारा एएसआई को भेजा जाएगा। 

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बरनावा लाक्षा ग्रह से लगभग छह किलोमीटर दूरी पर स्थित खपराना गांव में 100 बीघा से भी अधिक परिक्षेत्र में प्राचीन टीले मौजूद हैं। इन टीलों पर प्राचीन सभ्यता के प्रमाण ऊपरी सतह पर ही बिखरे पड़े हैं। 
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शुक्रवार को शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने संबंधित टीले का प्रारंभिक सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के दौरान उन्हें यहां से खंडित मृदभांड के रूप में महिलाओं द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले कर्णाभूषण, होपस्कॉच, झावा (पैर साफ करने के लिए), बच्चों के खेल-खिलौने, खाद्य सामग्री रखने वाले पात्रों के अलावा बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में ताम्र मुद्राएं भी प्राप्त हुई। ये मुद्राएं मिट्टी की एक छोटी लुटिया में मौजूद थे। इस लुटिया में दो दर्जन से अधिक सिक्के मौजूद थे। मिट्टी से बनी यह लुटिया भी ऊपरी किनारे से थोड़ी खंडित थी। मिट्टी में अधिक समय तक दबे रहने के कारण सिक्के अधिक स्पष्ट नहीं थे।

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इन सिक्कों और अन्य प्राप्त पुरावशेष को लेकर अमित राय जैन शहजाद राय शोध संस्थान बड़ौत आ पहुंचे। यहां पर प्राप्त पुरा सामग्री का अध्ययन किया। 

उन्होंने बताया कि प्राप्त पुरातत्व सामग्री की एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर एएसआई, जिलाधिकारी को भेजी जाएगी। साथ ही वे एएसआई से मांग करेंगे कि खपराना गांव में विस्तृत रूप से फैले टीलों पर जल्द से जल्द उत्खनन कार्य कराया जाए, ताकि यहां की धरती में दफन प्राचीन सभ्यता को दुनिया के सामने लाया जा सके।

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