क्यों पश्चिमी यूपी के लिए खतरे की घंटी बनी मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी? पढ़िए खास रिपोर्ट
- मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के भर्ती किए जाते हैं यहां मरीज
- ऐसे में पुलिस, डॉक्टर और उनके परिवार वालों को खतरा है
- कोरोना से मरने वालों का एहतियात बरतकर किया जाता है अंतिम संस्कार
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी मेरठ समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों के लिए खतरे की घंटी बन रही है। मेडिकल में कोरोना और दूसरे कारणों से मरने वाले लोगों के शव मोर्चरी में एक ही जगह रखे जा रहे हैं। ऐसे में पोस्टमार्टम के बाद यहां से शव ले जाने वाले पुलिसकर्मी या मृतक के परिवार के लोग संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
मेडिकल कॉलेज के कोविड-19 अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज हो रहा है। कोरोना संक्रमण से मेडिकल में रोजाना मौत हो रही हैं। वहीं, मेडिकल के अलावा अन्य कोविड अस्पतालों में कोरोना से मरने वाले लोगों के शव भी मोर्चरी में रखे जाते हैं। जिसके बाद इनके शवों को बड़ी एहतियात के बाद उनका अंतिम संस्कार कराया जाता है। मेडिकल कॉलेज में मेरठ के अलावा नोएडा, गाजियाबाद, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, बिजनौर और आसपास के जिलों के मरीजों को भी भर्ती कराया जाता है। इनमें कोई जानलेवा हमले का मामला होता है तो किसी को गंभीर बीमारी के चलते मेडिकल में भर्ती कराया जाता है। ऐसे में मेडिकल में यदि ऐसे किसी भी मरीज की मौत होती है तो उसका शव भी पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखा जाता है। पुलिस केस के मामलों में मेडिकल थाना पुलिस ही शव का पोस्टमार्टम कराती है जिसके बाद शव को परिवार के लोगों को सौंप दिया जाता है।
क्या कहते हैं आंकड़े
मेडिकल के पोस्टमार्टम हाउस में 1 जनवरी से 15 जून तक 630 शवों का पोस्टमार्टम हुआ। 15 मार्च से 15 जून तक 319 शवों का पोस्टमार्टम हुआ। वहीं मेडिकल के कोविड-19 अस्पताल में मेरठ व आसपास के जिलों के 95 से ज्यादा कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है। पुलिस शव को कपड़े में ही सील करती है। अज्ञात शव जिसकी शिनाख्त नहीं हुई उसे सील भी नहीं किया जा सकता।
यह भी पढ़ें: मेरठ में कोरोना हुआ भयावह, तीन दिन में 13 मौत... मिले 101 नए संक्रमित मरीज, लोगों में दहशत
गाइडलाइन का पालन नहीं
एक वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन है कि यदि कोविड-19 के मरे मरीज का पोस्टमार्टम नहीं होगा। उसके शव को पीपीई किट में पैक कर सावधानी से अलग रूम में रखा जाएगा। कोरोना से मरने वाले और अन्य लोगों के शव एक साथ नहीं रखे जा सकते। क्योंकि भले ही सावधानी बरती जा रही हो लेकिन ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहता है।
शव देखकर दो लोग बेहोश
मेडिकल स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर मंगलवार को बॉबी सिंह निवासी अनूपशहर, बुलंदशहर का शव पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था। उसके सिर में गंभीर चोट लगी थी। जैसे ही परिवार वालों ने शव को देखा तो दो लोग बेहोश हो गए। जिसके बाद वहां अफरातफरी मच गई। पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे डॉक्टरों ने किसी तरह उन्हें संभाला।
इससे संक्रमण नहीं फैलता
मोर्चरी में कोविड व नॉन कोविड मरीजों के शव एक साथ ही रहे जा रहे हैं। कोविड मरीज के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता। सभी शवों को दवाइयां व केमिकल लगाकर सील कर दिया जाता है। इससे संक्रमण नहीं फैलता। - डॉ. हर्षवर्धन सिंह, ईएमओ, मेडिकल कॉलेज मेरठ
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/