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किडनी प्रकरण: हाईकोर्ट ने केएमसी को दी राहत, बुलंदशहर की महिला मरीज से जुड़ा मामला

Mon, 05 May 2025 11:37 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Mon, 05 May 2025 11:37 AM IST
सार

मेरठ के लालकुर्ती क्रिस्टल पैलेस में केएमसी चिकित्सा संस्था के निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता ने प्रेस वार्ता की।

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Kidney case: High Court gives relief to KMC, case related to female patient from Bulandshahr
केएमसी अस्पताल में प्रेस वार्ता करते डॉक्टर सुनील - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ के लालकुर्ती क्रिस्टल पैलेस में केएमसी चिकित्सा संस्था के निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने बताया कि किडनी प्रकरण में हाईकोर्ट ने संस्थान को राहत दी है।

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उन्होंने कहा कि बुलंदशहर की महिला मरीज कविता पक्ष की ओर से किडनी निकालकर बेचने का आरोप लगाया गया था। इसकी एवज में 40 लाख रुपये की मांग की गई थी। यह प्रकरण कई अदालतों से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंचा। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में एफआईआर को क्वैश कर दिया है।
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डॉ. गुप्ता ने बताया कि सीपीए के नियमों के अनुसार किसी भी रोगी के अस्पताल में भर्ती के इलाज से संबंधित दस्तावेज दो साल तक ही रखने की अनिवार्यता है। विभिन्न अदालतों में जमा किए गए दस्तावेजों के अनुसार बुलंदशहर के बुगारसी निवासी कविता 2010 से अस्पताल की ओपीडी में इलाज कराने आती रही है।
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्वर्ष 2010 के बाद यह महिला 2017 में दिखाने के लिए आई। हर बार पेट दर्द और बुखार की बात कही गई। प्रत्येक बार अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार बायां गुर्दा असामान्य एवं अपनी सामान्य जगह पर न होना दर्शाया गया है। इसे एक्टोपिक किडनी कहते हैं। यह सामान्य नहीं होती है। 

इसके बाद करीब पांच साल बाद 13 दिसंबर-2022 को एक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर बायीं ओर नेफ्रेक्टोमी (गुर्दा निकालने की सर्जरी) दिखाई गई। यह अल्ट्रासाउंड विधि की तकनीकी सीमाओं का उल्लंघन है। इसके बाद इस पक्ष के अधिवक्ता ने अस्पताल को कानूनी नोटिस देकर आरोप लगाया कि बायां गुर्दा निकाल लिया है।

अस्पताल ने साक्ष्य मांगे तो बुलंदशहर बुलाकर सेटेलमेंट की बात कही गई। सुनील गुप्ता ने बताया कि वह बुलंदशहर नहीं गए। इस प्रकरण में जिला उपभोक्ता न्यायालय बुलंदशहर और फिर सत्र न्यायालय में वाद दायर किया गया। डॉ. सुनील के मुताबिक तीन जनवरी 2025 को छह चिकित्सकों को एफआईआर दर्ज की गई। अस्पताल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली।

वहीं, बुलंदशहर सीएमओ ने जांच समिति बनाई। जांच समिति ने भी आरोपों को गलत बताया। डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि हाईकोर्ट की ओर से भी 29 अप्रैल 2025 को चिकित्सकों के खिलाफ की गई एफआईआर को क्वैश कर दिया गया। 

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