अपहरण: मां-बाप को भनक तक नहीं लगी, बेटी का बन चुका था पासपोर्ट, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
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मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में एक व्यापारी की बेटी के अपहरण का मामला सामने आया। वहीं पुलिस की जांच पड़ताल में मालूम चला कि चार नवंबर को ही युवती का पासपोर्ट बनकर आया था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवती को जल्द ही पता लगा लिया जाएगा। वहीं चौकाने वाली बात है कि घरवालों को बेटी के पासपोर्ट बनवाने के बारे में भनक तक नहीं लगी। वहीं इस पूरे मामले में एलआईयू की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं: -
कंकरखेड़ा निवासी यह युवती एक प्ले स्कूल में पढ़ाती थी। आठ नवंबर की सुबह युवती घर से निकली थी। लेकिन शाम तक भी नहीं लौटी। काफी तलाश के बाद भी युवती का सुराग नहीं लगा।
पुलिस में शिकायत की तो पुलिस युवती को बरामद करने के आश्वासन देती रही लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पर परिजन भाजपा सांसद के पास पहुंचे तब जाकर पुलिस ने पूरे मामले का गंभीरता से लिया।
पुलिस के अनुसार परिजनों का आरोप है कि उनकी बेटी को दुबई निवासी एक युवक के साथ जबरन भेजा गया है। जांच में सामने आया कि युवती की फेसबुक पर दुबई के एक युवक से बातें होती थीं। वह युवक दुबई का ही है या फिर उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बना रखी है, इसकी जांच क्राइम ब्रांच का साइबर सेल कर रहा है। चार नवंबर को ही युवती का पासपोर्ट बना था।
उधर परिजनों ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी की एक स्थानीय युवक से दोस्ती थी। उसी युवक ने उनकी बेटी को सऊदी अरब के दूसरे वर्ग के युवक के साथ भेजा है। पुलिस ने मंगलपांडे नगर निवासी इस युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ की। लेकिन युवक ने बताया कि उसे जानकारी नहीं है कि युवती कहां गई है। पुलिस ने सऊदी अरब के इस युवक का फेसबुक अकाउंट भी खंगाला है।
युवक की आईडी दुबई की
इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा बिजेंद्र राणा का कहना है कि अभी कई बातें जांच के बाद साफ होनी हैं। युवती की उम्र के आधार पर इसे गुमशुदगी में दर्ज किया गया। दूसरे वर्ग के जिस युवक से युवती की बातें होना सामने आया, उसकी आईडी दुबई की आ रही है। चार नवंबर को ही युवती का पासपोर्ट बनकर आया था।
आठ नवंबर की सुबह युवती घर से चली गई। इसकी पड़ताल की जा रही है कि आरोपी युवक उसे लेने दुबई से भारत आया या फिर खुद ही युवती दुबई गई है। इस संबंध में पासपोर्ट और वीजा की जांच के लिए संबंधित सरकारी विभागों से भी मदद ली जा रही है।
एलआईयू की भूमिका पर सवाल
युवती के जाने के बाद जब जांच हुई तो पता चला कि चार नवंबर को ही युवती का पासपोर्ट बनकर आया था। लेकिन युवती के परिजनों को इसकी भनक तक नहीं लगी। पासपोर्ट आवेदन की जांच एलआईयू और पुलिस द्वारा आवेदक के घर जाकर की जाती है। लेकिन इसका भी परिजनों को पता नहीं चला।
एलआईयू और थाना पुलिस परिजनों के सामने इंक्वायरी करने नहीं आई और पासपोर्ट बन गया। यह भी माना जा रहा है कि कहीं आरोपी युवक ने ही साठगांठ कर पासपोर्ट की इंक्वायरी घर नहीं जाने दी और युवती के परिजनों को पता नहीं चला। वहीं, कंकरखेड़ा थाने के बीट सिपाही और दरोगा भी संदेह के घेरे में है। मामला भाजपा सांसद तक पहुंचने के बाद एलआईयू और कंकरखेड़ा पुलिस चुप्पी साधे हुए है।