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टिकटों को लेकर चल रहे दंगल में अखिलेश को झटका, शिवपाल के उम्मीदवारों को मिला टिकट

Thu, 29 Dec 2016 02:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Thu, 29 Dec 2016 02:23 PM IST
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SP carrying Cirque tickets Akhilesh shock, Shivpal these candidates got ticket from Meerut
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

सपा में टिकटों को लेकर चल रहे दंगल में भतीजे पर चाचा ही भारी पड़े हैं। नई सूची में मेरठ में कोई फेरबदल नहीं हुआ है। यहां हारी हुई सीटों पर शिवपाल की ओर से दिए गए नामों पर ही मुहर लगी है। टीम अखिलेश को उम्मीद थी कि मेरठ कैंट, शहर और सरधना सीट पर मौका मिल सकता है। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। नई सूची में भी सरधना से अतुल प्रधान, कैंट से परविंदर सिंह ईशु और शहर से रफीक अंसारी को झटका लगा है। इन सीटों पर शिवपाल के खास माने जाने वाले पिंटू राणा, आरती अग्रवाल और अयूब अंसारी पर ही भरोसा जताया गया है। हालांकि, दक्षिण सीट पर किसी खेमेबंदी और विवाद से अलग हाजी आदिल चौधरी का टिकट बरकरार रखा गया है।

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शिवपाल यादव ने प्रदेश अध्यक्ष बनते ही मेरठ की तीन सीटों पर प्रत्याशी बदल दिए थे। सरधना से अतुल की जगह मैनपाल सिंह उर्फ पिंटू राणा, शहर से रफीक अंसारी की जगह अयूब अंसारी और कैंट से परविंदर सिंह ईशु की जगह आरती अग्रवाल को टिकट दे दिया। इसके बाद से सरधना सीट पर खुलेआम घमासान चल रहा है। अतुल को मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता है और उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा कर रखी है। सपा के घोषित प्रत्याशी पिंटू राणा और अतुल के बीच पोस्टर वार भी चला। अतुल ने अपने पोस्टरों पर सिर्फ मुख्यमंत्री का फोटो रखते हुए चुनाव प्रचार अभियान तक छेड़ रखा है। अतुल खेमा मान रहा था कि नई सूची में उन्हें टिकट मिल सकता है। लेकिन, शिवपाल यहां से अपने खासमखास पिंटू के नाम पर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह की भी मुहर लगवाने में कामयाब रहे। कहा यह भी जा रहा है कि सरधना सीट पर अपनी ताकत बरकरार रखने के लिए शिवपाल ने पिंटू की मुलायम से मुलाकात भी करवा दी। वहीं, एक खेमे का यह भी मानना है कि पिंटू को पिछले दिनों अतुल खेमे द्वारा की गई बयानबाजी का लाभ मिला है।
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नजदीकियों का मिला फायदा
रफीक अंसारी को रामगोपाल यादव के खेमे का माना जाता है। पिछले विधानसभा और मेयर के चुनाव में रफीक ने बेहतर प्रदर्शन किया था। इससे सपा ने उन्हें शहर सीट पर प्रत्याशी बनाया था। लेकिन, शिवपाल ने रफीक की जगह अयूब को टिकट दे दिया। रफीक समर्थकों को भी उम्मीद थी कि नई सूची में उन्हें जगह मिलेगी, लेकिन अयूब को शिवपाल के साथ होने का लाभ मिला है। अयूब ने दिन पहले ही शिवपाल पर टिप्पणी करने वाले संजय लाठर के खिलाफ बयान दिया था। वहीं, परविंदर सिंह ईशु को अखिलेश की यूथ ब्रिगेड का सदस्य कहा जाता है। लेकिन, आरती अग्रवाल उन पर फिर से भारी पड़ी हैं। आरती को महिला और वैश्य होने के साथ शिवपाल खेमे के कई नेताओं से नजदीकियों का फायदा मिला है। आरती सपा एमएलसी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल को अपनी मौसी कहती हैं। यह बात अलग है कि सपा का एक खेमा डॉ. सरोजिनी के सामने आरती को कैंट में चेहरा बनाना चाहता है।
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तीनों विधायकों पर भरोसा
पिछले विधानसभा चुनाव में किठौर से शाहिद मंजूर, हस्तिनापुर से प्रभुदयाल वाल्मीकि और सिवालखास से गुलाम मोहम्मद ने चुनाव जीता था। सपा ने अपने तीनों विधायकों को फिर से मौका दिया है। कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर पार्टी के मंझे हुए नेता हैं। उनके टिकट पर किसी को संशय नहीं था। वहीं, गुलाम मोहम्मद सिवालखास में पिछले चुनाव में मुस्लिम वोटों के एकमुश्त मिलने और जाट वोटों के बंटवारे से जीते थे। इस बार यहां बसपा ने भी मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है। जबकि हस्तिनापुर में प्रभुदयाल के सामने पिछली बार पीस पार्टी से से चुनाव लड़ने वाले योगेश वर्मा इस बार बसपा से हैं।

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