कांवड़ यात्रा: कांवड़ियों के साथ परिजनों को भी करना होता है परहेज, ऐसा करने से मिलता है पूरा फल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बताया जाता है कि सावन माह में शिव अपने भक्तों से जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। भक्त इस माह में कावंड लाकर शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर उन्हें प्रसन्न करते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस यात्रा के दौरान कई नियमों का पालन करना होता है जिन्हें पूरा करने से यात्रा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
आइए जानते हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान किन चीजों का ध्यान रखना आवश्यक बताया गया है :-
कांवड़ यात्रा में ध्यान रखनी होती हैं ये बातें
कहा जाता है कि शिवभक्त कांवड़ यात्रा पूरी करता है उसे अश्वमेघ यज्ञ करने जितना फल प्राप्त होता है। हरिद्वार से जल लाकर ज्योर्तिलिंग पर चढ़ाने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। खास बात यह है कि इस यात्रा के दौरान गंगाजल लाने से लेकर जलाभिषेक करने तक का यह सफर नंगे पांव ही पूरा करना होता है। कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्त पूरे रास्ते भोलेनाथ के नाम के जयकारे लगाते हैं और बम-बम का उच्चारण करते हुए जाते हैं। कहा जाता है कि यात्रा के दौरान लगातार बोल-बम का जयघोष करना काफी फलदाई होता है।
परिजनों को भी कांवड़ यात्रा के दौरान करना होता है परहेज
यही नहीं रोटी को चपाती, मिर्च को लंका, चप्पल को खड़ाऊ, नहाने को स्नान, लोटे को सागर, कपड़ों को वस्त्र, कुत्ते को भैरव पुकारा जाता है। जहां कांवड़ रखी होती है, उस स्थान से ऊपर नहीं बैठ सकते नही। जमीन पर सोना होता है।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/