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कपसाड़ कांड: रूबी का रिश्ता टूटा, एसडीएम से मिलकर भाई नरसी बोला- वादे पूरे करो, नहीं तो छोड़ देंगे गांव

Sun, 15 Feb 2026 01:00 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Sun, 15 Feb 2026 01:00 PM IST
सार

Meerut News: मेरठ के सरधना स्थित कपसाड़ गांव में सुनीता की हत्या कर दी गई थी और उनकी बेटी रूबी का अपहरण कर लिया था। इस मामले में आरोप पारस सोम जेल में है। वहीं रूबी का रिश्ता टूट गया है। परिजनों ने सुरक्षा, आर्थिक मदद, गांव से बाहर बसाने समेत कई मांगें की हैं। 

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Kapsaad incident: Ruby's relationship broke, brother Narsi met SDM and said - fulfill promises
एसडीएम से मिलने आए रूबी के परिजन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कपसाड़ प्रकरण की पीड़िता रूबी का रिश्ता टूट गया है। उसके परिजन न्याय और सुरक्षा की मांग को लेकर लगातार प्रशासन के पास पहुंच रहे हैं। अप्रैल में तय हुई शादी के टूटने के बाद परिवार मानसिक और सामाजिक दबाव में है।
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रूबी के बड़े भाई नरसी ने बताया कि प्रशासन ने पिस्टल लाइसेंस, जमीन का पट्टा और परिवार के एक सदस्य के लिए संविदा नौकरी देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ। परिवार को घटना के बाद दस लाख रुपये की आर्थिक मदद मिली, लेकिन अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हुई। 
 
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बता दें कि बीते 8 जनवरी को अनुसूचित जाति के नरसी की बहन रूबी का गांव के ही आरोपी पारस सोम ने अपहरण कर लिया था। आरोप है कि विरोध करने पर पारस ने नरसी की मां सुनीता पर धारदार हथियार से हमला किया। घायल सुनीता की उपचार के दौरान अस्पताल में मृत्य हो गई थी। इस घटना के बाद मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया। 
 
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नरसी ने कहा कि परिवार का पालन-पोषण मजदूरी पर निर्भर है, लेकिन गांव में काम नहीं मिल रहा। अंतिम संस्कार के समय प्रशासन ने परिवार को दूसरे स्थान पर बसाने की बात कही थी, लेकिन अब अधिकारी पीछे हट गए हैं। 
 

शनिवार को परिजन एसडीएम उदित नारायण सेंगर से मिले और दस दिन के भीतर मांगें पूरी न होने पर गांव छोड़ने की चेतावनी दी। नरसी ने बताया कि शुक्रवार को सुबह से दोपहर तक एसडीएम से मिलने का प्रयास किया, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। शनिवार को उन्हें बुलाकर आश्वासन दिया गया, लेकिन परिजन को अब भी भरोसा नहीं है। नरसी ने कहा हमारी सुरक्षा और रोजगार की मांगें पूरी नहीं होने तक हम गांव में रहने में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। प्रशासन से जल्दी कार्रवाई की उम्मीद है।
 

एसडीएम उदित नारायण सेंगर ने कहा कि पीड़ित परिवार की जमीन के पट्टे, नौकरी, शस्त्र लाईसेंस और अन्य मांगों के लिए कागजी कार्रवाई जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांव से बाहर बसाने का कोई आश्वासन नहीं दिया गया था। रोजगार संबंधी मांगों को भी योग्यता के अनुसार पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। 

 
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