कांवड़ यात्रा 2018: भोले की आस्था के बाजार में 200 करोड़ की धन वर्षा
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धार्मिक आस्था के सैलाब के रूप में पहचान रखने वाली कांवड़ यात्रा अगले सप्ताह शुरू हो जाएगी। वहीं कावंड़ का बाजार भी सजना शुरू हो गया है। इस महापर्व पर अकेले मेरठ के बाजार में ही 200 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होने की उम्मीद है। इस कांवड़ यात्रा में शिवभक्त अपनी तैयारी के हिसाब से खरीददारी करेंगे ही, लेकिन उससे भी बड़ा व्यापार इन शिवभक्तों की सेवा में लगने वाले कांवड़ सेवा शिविरों से होगा। हर साल कांवड़ यात्रियों की संख्या में इजाफा होता आ रहा है। कांवड़ियों की संख्या में इस बार और इजाफा होने की उम्मीद है। पिछले साल यह आंकड़ा डेढ़ लाख के पार था तो इस बार संख्या दो लाख के आसपास मानी जा रही है।
तीन सौ से ज्यादा कांवड़ सेवा शिविर
जनपद में 300 सौ से ज्यादा कांवड़ सेवा शिविर लगते हैं। इन शिविरों में कांवड़ियों के नहाने के लिए ठंडे गर्म पानी से लेकर नाश्ता, रात के खाने और दूध आदि की व्यवस्था होती है। इसके अलावा सेवा शिविरों में अब फास्ट फूड की व्यवस्था होती है। ऐसे में एक कांवड़ सेवा शिविर पर एक लाख रुपये से 30 लाख रुपये तक का खर्च आता है। वहीं कांवड़ियों के लिए रुकने के लिए भी व्यवस्था कराई जाती है।
ट्रांसपोर्ट, दवाओं पर जोर
कांवड़ यात्रा के दौरान ट्रांसपोर्टरों का कारोबार भी बेहतर रहता है। कांवड़ियों के समूहों को हरिद्वार तक छोड़कर आने, डाक कांवड़ियों को लेकर जाने के लिए बड़ी संख्या में गाड़ियां बुक होती हैं। इस पूरी व्यवस्था पर करीब 20 करोड़ का खर्च आता है। वहीं कांवड़ यात्रा के दौरान चिकित्सा शिविरों के साथ मोबाइल चिकित्सा वैन भी घूमती है। कांवड़ यात्रा के दौरान दवाओं की अलग से होने वाली बिक्री का अनुमान 3 करोड़ तक बैठता है। उधर, भोले अपने साथ हॉकी, बेसबाल के बैट की मांग सबसे ज्यादा होती है। स्पोर्ट्स कारोबारियों के अनुसार करीब 50 लाख का कारोबार हो जाता है। एक कावंड़ियां यात्रा की तैयारी में औसतन दो से पांच हजार तक खर्च करता है। कपड़े, पिट्ठू बैग आदि कारोबार का यह आंकड़ा औसतन 50 करोड़ बैठता है।
झांकी पर होता है मोटा व्यय
कांवड़ यात्रा में पिछले कुछ सालों से डाक कांवड़ का चलन बढ़ा है। किसी विशेष थीम पर झांकी बनाकर शिव भक्तों की टोली हरिद्वार से जल लेकर आती है। इस झांकी को तैयार करने और अपनी मंजिल तक लाने के लिए एक लाख रुपये से लेकर दस लाख रुपये तक का खर्च आता है। ऐसे में मेरठ जनपद से तैयार होकर जाने वाली इस झांकी कांवड़ की तैयारी के लिए करीब 30 करोड़ का व्यापार हो जाता है।
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