वेस्ट में भाजपा का सूपड़ा साफ, कैराना में जीतीं तबस्सुम, नूरपुर विधानसभा सीट सपा ने छीनी
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कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में विपक्ष के महागठबंधन की घेराबंदी के आगे भाजपा हार गई। गठबंधन की तरफ से रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने 44,618 मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। खास बात यह है कि लोकसभा उपचुनाव में शामली जनपद की तीनों विधानसभा क्षेत्रों से भाजपा जीती, लेकिन सहारनपुर जनपद की नकुड़ और गंगोह विधानसभा क्षेत्र के बड़े अंतर ने भाजपा को हरा दिया। उधर, नूरपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में सपा ने कब्जा कर लिया है। महागठबंधन के प्रत्याशी नईमुल हसन इस सीट पर विजयी रहे। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अवनी सिंह को पांच हजार 678 वोटों से हराया। नईमुल हसन को 94 हजार 866 व अवनी सिंह को 89 हजार 188 वोट मिले हैं।
पूर्व सांसद हुकुम सिंह के निधन से रिक्त हुई कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 28 मई को मतदान हुआ। वीवी पैट की खराबी के कारण कैराना लोकसभा क्षेत्र में 73 बूथों पर 30 मई को पुनर्मतदान हुआ। इसके अलावा 356 डाक मतपत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 99 निरस्त हो गए, जबकि 257 मतपत्र मान्य हुए। कुल 9,38,742 लोगों ने मतदान किया। वहीं, बृहस्पतिवार को शामली जनपद के तीन विधानसभा क्षेत्र शामली, थानाभवन और कैराना की मतगणना शामली स्थित मंडी परिसर में हुई, जबकि नकुड़ और गंगोह की मतगणना सहारनपुर में हुई। मतगणना के पहले चरण से लेकर अंतिम चरण तक गठबंधन प्रत्याशी ने बढ़त बनाकर रखी। हालांकि शामली जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्रों की गणना में भाजपा को गठबंधन प्रत्याशी से 810 वोट अधिक प्राप्त हुए, लेकिन सहारनपुर जनपद के गंगोह और नकुड़ विधानसभा क्षेत्र में अंतर लगातार बढ़ता गया और गठबंधन की जीत सुनिश्चित हो गई। अंतिम परिणाम घोषित होने पर गठबंधन से रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन को 4,81,182 वोट प्राप्त हुए, जबकि भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को 4,36,564 वोट मिले। इस लिहाज से भाजपा प्रत्याशी 44,618 वोटों के अंतर से हार गईं। पूरे लोकसभा क्षेत्र में 4389 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया। जिला निर्वाचन अधिकारी इंद्र विक्रम सिंह और चुनाव प्रेक्षक आर गिरीश कुमार ने विजेता घोषित तबस्सुम हसन को प्रमाण पत्र सौंपा।
कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजें-
लोकसभा सीट-
कैराना (यूपी) पहले अब लोकदल प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी
भाजपा लोकदल (जीत) तबस्सुम हसन मृगांका सिंह
विधानसभा सीट-
नूरपुर (यूपी) पहले अब सपा प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशी
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भाजपा समाजवादी पार्टी (जीत) नईमुल हसन अवनी सिंह
नूरपुर में हारी भाजपा
बता दें कि नूरपुर से भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान की सीतापुर जिले के पास 21 फरवरी को सड़क हादसे में हुई मौत के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ था। उपचुनाव में महागठबंधन से सपा ने नईमुल हसन को फिर से चुनाव मैदान में उतारा था। 2017 के चुनाव में लोकेंद्र चौहान ने नईमुल हसन को परास्त किया था। भाजपा ने विधायक स्व.लोकेंद्र चौहान की पत्नी अवनी सिंह पर दांव खेला था। स्व.लोकेंद्र चौहान नूरपुर सीट पर लगातार दो बार विधायक बने थे। नईमुल हसन व अवनी सिंह के बीच चुनाव में कांटे का मुकाबला रहा। सपा प्रत्याशी नईमुल हसन को बसपा, कांग्रेस, रालोद, महान दल, पीस पार्टी का खुला समर्थन मिला। नईमुल हसन ने चुनाव में अवनी सिंह को परास्त कर दिया।
कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में घोषित परिणाम से भाजपा को जोर का झटका लगा है। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी की मेहनत रंग लाई। छोटे चौधरी वर्ष 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे के बाद बिखरे जाट-मुस्लिम गठजोड़ को एक सूत्र में पिरोने में सफल हो गए। कैराना में तबस्सुम की जीत से रालोद को संजीवनी मिल गई है।
पहले काफी लंबे समय तक रालोद की जातीय ताकत जाट-मुसलिम गठजोड़ रहा था। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगे के बाद से जाट-मुस्लिम समीकरण पूरी तरह बिखर गया था। इसका सबसे बड़ा खामियाजा रालोद को ही भुगतना पड़ा था। इसी कारण 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में रालोद को बड़ा नुकसान हुआ था। मुजफ्फरनगर और शामली जिले में एक भी सीट रालोद को नहीं मिल सकी थी। इसके बाद रालोद ने जाट-मुस्लिम गठजोड़ में जान फूंकने के लिए कवायद की। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने मुजफ्फरनगर से ही सामाजिक समरसता का अभियान शुरू किया। मुजफ्फरनगर और शामली में जाट-मुस्लिमों को एक मंच पर लाने के लिए सम्मेलन किए। साथ ही कई मुसलिम नेताओं को रालोद में शामिल करके भी यही संदेश दिया गया।
खूब चला जोड़ तोड़ का प्रयास
कैराना लोकसभा उपचुनाव में प्रत्याशी का चयन करने में भी इस बात का ध्यान रखा गया कि किस तरह जाट- मुसलिम को एक मंच पर लाया जा सके। यही वजह है कि सपा विधायक नाहिद हसन की मां तबस्सुम हसन को रालोद के टिकट पर प्रत्याशी बनाया गया। प्रत्याशी चयन को लेकर पहले राजनीतिकगलियारों में यह चर्चा रही कि रालोद ने गलत दांव खेल दिया है। हालांकि चुनावी पारा चढ़ते ही समीकरणों में बदलाव प्रारंभ हो गया। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने शामली और सहारनपुर जनपद में चुनाव प्रचार के दौरान भी जाट-मुसलिम गठजोड़ को मजबूत करने पर जोर दिया। वहीं, शामली जिले के गठवाला खाप के गांवों में लगातार यह संदेश दिया कि पुराने झगड़ों को भूलकर भाजपा के खिलाफ एक मंच पर आने की जरूरत है। इसके साथ ही चौधरी अजित सिंह यह संदेश देने में भी कामयाब रहे कि यदि इस चुनाव में मजबूती नहीं दिखाई, तो भविष्य के लिए बड़ा नुकसान हो जाएगा। चुनाव परिणाम से स्पष्ट हो गया कि छोटे चौधरी जाट और मुसलिम मतदाताओं को साधने में कामयाब हो गए।
खुद को प्रत्याशी बताकर लड़ाया चुनाव
रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बनाकर लड़ा। यही नहीं चुनावी सभाओं और जनसंपर्क के दौरान वह जाट बिरादरी के बीच संदेश देना भी नहीं भूले कि जीत और हार तबस्सुम हसन की नहीं, बल्कि रालोद की होगी। रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने तो शामली में सभा के दौरान यह तक कहा था कि प्रत्याशी मैं हूं। इन संदेशों का असर चुनावी जंग में जीत के रूप में निकला।
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