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कहीं शिक्षक नहीं, तो कहीं छात्र ही गायब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 27 Oct 2017 12:58 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नगरीय क्षेत्रों के प्राथमिक विद्यालयों का हाल बेहाल है। कहीं स्कूलों से शिक्षक नदारद हैं तो कहीं छात्र ही नहीं हैं। कुछ ऐसा ही हाल दिल्ली रोड स्थित पूर्वा महावीर स्थित लक्ष्मीनारायाण मंदिर में किराए पर चल रहे प्राथमिक विद्यालय का है। बृहस्पतिवार को अभियान के तहत अमर उजाला की टीम जब इस विद्यालय में पहुंची तो वहां की व्यवस्था बद से बदतर हालत में मिली।
मंदिर के प्रांगण में चलने वाले इस प्राथमिक विद्यालय की जर्जर बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है। स्कूल में दो कुर्सियों और एक मेज के अलावा नजर आ रहा था तो कबाड़ बन चुका फर्नीचर। पूरे प्रांगण में पत्थर के टुकड़े बिखरे पडे़ थे। ब्लैक बोर्ड का अतापता ही नहीं था। विद्यालय में दो शिक्षिकाएं रोजाना की तरह अपनी ड्यूटी पूरी कर रहीं थीं। शिक्षिकाओं ने बताया कि बिल्डिंग के हालात ने छात्रों की बैठने की व्यवस्था को खत्म कर दिया है। इस कारण वर्तमान में स्कूल में छात्रों की संख्या शून्य है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष तक एक छात्र विद्यालय आता था, लेकिन इस वर्ष से वह भी नहीं आता। खास बात यह है कि अधिकारियों को इन सभी बातों की जानकारी है, लेकिन कोई भी समस्या को दूर करने का बीडा नहीं उठाना चाहता है। शिक्षिकाओं ने बताया कि कई साल पहले मंदिर समिति द्वारा बिल्डिंग में कुछ काम कराया गया था, लेकिन स्थिति जस की तस रही। समाजसेवी राकेश शिशौदिया ने बताया कि स्कूल की हालत को देखकर उन्होंने अधिकारियों को मामले से अवगत कराया, पर नतीजा शून्य रहा।
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मंदिर के प्रांगण में चलने वाले इस प्राथमिक विद्यालय की जर्जर बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है। स्कूल में दो कुर्सियों और एक मेज के अलावा नजर आ रहा था तो कबाड़ बन चुका फर्नीचर। पूरे प्रांगण में पत्थर के टुकड़े बिखरे पडे़ थे। ब्लैक बोर्ड का अतापता ही नहीं था। विद्यालय में दो शिक्षिकाएं रोजाना की तरह अपनी ड्यूटी पूरी कर रहीं थीं। शिक्षिकाओं ने बताया कि बिल्डिंग के हालात ने छात्रों की बैठने की व्यवस्था को खत्म कर दिया है। इस कारण वर्तमान में स्कूल में छात्रों की संख्या शून्य है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष तक एक छात्र विद्यालय आता था, लेकिन इस वर्ष से वह भी नहीं आता। खास बात यह है कि अधिकारियों को इन सभी बातों की जानकारी है, लेकिन कोई भी समस्या को दूर करने का बीडा नहीं उठाना चाहता है। शिक्षिकाओं ने बताया कि कई साल पहले मंदिर समिति द्वारा बिल्डिंग में कुछ काम कराया गया था, लेकिन स्थिति जस की तस रही। समाजसेवी राकेश शिशौदिया ने बताया कि स्कूल की हालत को देखकर उन्होंने अधिकारियों को मामले से अवगत कराया, पर नतीजा शून्य रहा।
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