कागजों में ही सिमटा ट्रैफिक प्लान, जाम से जूझ रहा शहर
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शहर में जाम की समस्या को देखते हुए बनाया गया प्लान कागजों में ही सिमटकर रह गया। आए दिन शहर जाम से जूझ रहा है, लेकिन न तो पुलिस मुख्य चौराहों और सड़कों से अतिक्रमण हटवा सकी है और न ही अवैध तरीके से खड़े वाहनों पर कोई कार्रवाई की है। पहले पुलिस राजनीतिक दबाव के चलते अपने कदम पीछे खींच लेती थी। लेकिन अब आचार संहिता लगते ही ट्रैफिक पुलिस चालान काटने और चेकिंग कर हूटर और झंडे उतारने में लगी है। एक माह पहले एसपी ट्रैफिक ने शहर में तीन स्थानों पर भीड़भाड़ को देखकर वन-वे व्यवस्था लागू की थी। उसके बाद पशु चलित वाहन भी प्रतिबंधित कर दिए गए थे। लेकिन पुलिस अफसरों के आदेश दो दिन में ही हवा हो गए। वहीं ट्रैफिक पुलिस में एसपी ट्रैफिक, सीओ ट्रैफिक, एक इंस्पेक्टर, तीन टीएसआई, 9 एचसीपी और 90 कांस्टेबल हैं, बावजूद शहर में जाम से निजात नहीं मिल रही है।
ये की गई थी व्यवस्था
ट्रैफिक पुलिस ने बैलगाड़ी, भैंसा बुग्गी, घोड़ा गाड़ी के साथ ही ट्रैक्टर ट्रॉली को प्रतिबंधित किया था। इसके अनुसार सुबह 9 बजे से 11 बजे, दोपहर एक बजे से 3 बजे और शाम पांच बजे से आठ बजे तक इन्हें शहर में बंद किया गया था।
यहां बंद किए थे पशु चलित वाहन
जीरोमाइल से बेगमपुल की तरफ।
तेजगढ़ी से हापुड़ अड्डे तक।
सीताराम पुलिया से सूरजकुंड और गांधी आश्रम तक।
बागपत अड्डा मेट्रो प्लाजा की तरफ से रेलवे रोड की तरफ।
कमिश्नरी आवास चौराहे से पुलिस लाइन की तरफ।
एल ब्लॉक से हापुड़ अड्डे की तरफ पशु चलित वाहन और ट्रैक्टर ट्रॉली भी बंद की गई थी।
यहां की गई थी वन-वे व्यवस्था
खैरनगर से सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस तक।
पीएल शर्मा रोड से कचहरी पुल तक।
शिव चौक छीपी टैंक से एनएएस कॉलेज तक।