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जिले में कम हो गया 13537 हेक्टेयर कृषि जमीन का रकबा

Sat, 20 Feb 2021 01:52 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 20 Feb 2021 01:52 AM IST
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jile mein kam ho gaya 13537 hekteyar krshi jameen ka rakaba
जिले में कम हो गया 13537 हेक्टेयर कृषि जमीन का रकबा
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1997 में बागपत जिला बनने के बाद शहरीकरण और विकास कार्यों से सुविधाएं भी बढ़ीं
राजदीप जाखड़
मेरठ। गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र की उपजाऊ जमीन लगातार अधिग्रहण की भेंट चढ़ती जा रही है। जिले में पिछले 23 साल में 13,537 हेेक्टेयर कृषि जमीन शहरीकरण और विकास कार्यों के कारण कम हो गई है। हालांकि उपजाऊ जमीन पर लगातार हो रहे शहरीकरण से विकास के रास्ते खुलने के साथ सुविधाएं भी बढ़ी हैं लेकिन आने वाले दिनों में इससे खाद्यान्न संकट भी खड़ा हो सकता है।
1997 में मेरठ का बटवारा कर बागपत को अलग जिला बनाया गया था। इससे पहले भी मेरठ में एमडीए और आवास विकास परिषद ने कई कॉलोनियां बनाई थीं। इसमें काफी उपजाऊ जमीन चली गई थी। राज्य अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग से मिले आंकड़ों पर नजर डालें तो बागपत जिला बनने के बाद जिले की 13537 हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन कॉलोनियों, स्कूल, कालेज, राष्ट्रीय एवं राज्य मार्ग, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण और पुरानी सड़कों के चौड़ीकरण आदि में जा चुकी हैं।
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1998-99 में जिले में 2,09,329 हेक्टेयर रकबे में फसलें बोई गई थीं, वहीं 2017-18 में यह रकबा घटकर 1,96,416 हेक्टेयर रह गया। इसके बाद 624 हेक्टेयर रकबा डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, मेरठ-गढ़, मेरठ-करनाल, मेरठ-बुलंदशहर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और मेरठ-बिजनौर हाईवे के लिए अधिग्रहीत की जा चुकी है। हालांकि अधिग्रहीत की गई जमीनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया गया है। इससे उनकी जीवन शैली और खान-पान ही नहीं बदला है, शिक्षा व स्वास्थ्य को लेकर सोच भी बदली है।
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517 करोड़ रुपये की होती गन्ना और गेहूं की पैदावार
जिले का प्रति हेक्टेयर गन्ना औसत उत्पादन 910 क्विंटल है। अगर खत्म हुई कृषि जमीन में गन्ने की बुुवाई की जाती तो एक करोड़ 23 लाख क्विंटल से ज्यादा गन्ना पैदा होता। 325 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को 400 करोड़ रुपये की आमदनी होती. वहीं इसी जमीन पर 5,95,628 क्विंटल गेहूं पैदा होने पर 1975 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के हिसाब से 117 करोड़ रुपये से ज्यादा किसानों को मिलते।
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