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जिगर के टुकडे़ को बचाने के लिए 

Fri, 02 Mar 2018 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 02 Mar 2018 12:37 AM IST
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jigar ke tukre ko bachaane ke liye
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शाम 7:25 बजे थे। पैसे न देने पर अर्जुन बार बार पिस्टल निकाल कविंद्र को गोली मारने की धमकी दे रहा था। वहां पर मां सुमन भी थी। मोहल्ले के लोग भी तमाशा देख रहे थे। बहस बढ़ी तो अर्जुन ने गोली चला दी। पहली गोली कविंद्र की गर्दन में लगी। बेटा चिल्लाया तो मां सुमन गोलियां की बौछार के सामने अड़ गई। एक गोली सुमन के सीने में लगी। 
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घटना करीब 100 लोगों के सामने हुई। शास्त्रीनगर में अर्जुन राणा जबरन दरोगा के बेटे कविंद्र से जबरन पैसे लेना चाहता था। इसी बात पर विवाद हुआ। करीब पांच मिनट तक कविंद्र और अर्जुन की बहस चली। इसके बारे में जानकारी लगने पर उसकी मां सुमन भी वहां पहुंच गई थी। अर्जुन बार बार पिस्टल निकाला और धमकी देता कि गोली मार दूंगा। मां बेटे अर्जुन और उसके चचेरे भाइयों से अकेले जूझते रहे। मां व बेटे अड़े कि गोली क्यों मार देगा। लोग तमाशा देखते रहे और कोई सामने नहीं आया। गुंडागर्दी करने वालों को टोकना भी किसी ने उचित नहीं समझा। 
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गोली चली तो आगे आई सुमन 
लोगों ने बताया कि अर्जुन और उसके चचेरे भाई शिवा ने कई राउंड गोलियां चलाई। पहली गोली कविंद्र की गर्दन में लगी। बस फिर क्या था आरोपियों के सामने सुमन ने अपना सीना कर दिया। जिसमें दूसरी गोली सुमन को लगी। गोली लगते सुमन नीचे गिर गया। कविंद्र चिल्लाते बोला कि अर्जुन तूने यह ठीक नहीं किया। लेकिन उनके हाथों में पिस्टलें थी। फिर गोली चली, जिसमें दूसरी गोली कविंद्र के सीने में लगी। [
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अरे अब इनको बचाओ तो 
गोली चलते ही लोगों की भीड़ ओर बढ़ी। लोग चिल्लाई कि दरोगा के बेटे व पत्नी को गोली मार दी है। अरे अब इनको अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करो। मां और भाई को गोली लगने का पता लगते ही निशांत दौड़ा। निशांत ने मां और भाई को कार में डाला और सीधे आनंद हॉस्पिटल लाया। जहां उनको अस्पताल में भर्ती कर दिया। लोग निशांत को ढांढस बांधने में लगे थे। 

पहले तहरीर दो, रिपोर्ट होगी 
महिला की मौत हो गई और बेटा जिंदगी मौत से लड़ रहा है। अस्पताल में पहुंची पुलिस में जल्दबाजी थी कि बस मुकदमा दर्ज हो जाए। दरोगा फिरोज अख्तर बार बार निशांत से कह रहा था कि पहले तहरीर दो, रिपोर्ट के बाद ही अगली कार्रवाई होगी। जिस पर निशांत बोला कि मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा। मां की मौत हो गई व भाई गंभीर है। थोड़ा मौका तो दो संभलने के लिए। 

पापा सब कुछ खत्म हो गया 
निशांत ने अपने पापा को फोन किया। कहां कि पापा सब कुछ खत्म हो गया। मम्मी को मार दिया और भाई अस्पताल में है। उधर से आवाज आ रही थी कि बेटा घबराओ मत, मै आता हूं। दरोगा बृजपाल मेरठ के लिए रवाना हो गए। अस्पताल में लोगों का तांता लगा हुआ है। परिवार और रिश्तेदार अस्पताल पहुंच। पुलिस बोली कि होली पर आरोपी ने खून किया है। उसको हम नहीं छोड़ेंगे। आप हमारे परिवार के लोग हो। 


मामूली विवाद में बहता रहा है खून
मेरठ। शास्त्रीनगर में पीएसी के दरोगा की पत्नी की हत्या का मामला पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी गलियों से लेकर हाईवे पर मामूली विवाद में खून बहता रहा है। कई परिवार पल भर में ही तबाह हो गये। सात साल पहले लालकुर्ती में हुई क्रि केटर गगनदीप की हत्या भी कुछ ऐसी ही थी। कबाब की दुकान हुए विवाद में हमलावरों इकलौते घर के होनहार क्रिकेटर की जान ले ली थी। पांच साल पहले साकेत पेट्रोल पंप पर कार में तेल भरवाने को लेकर हुए विवाद में इंस्पेक्टर के इकलौते बेटे प्रांजल की भी चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी। सिविल लाइन में ही पांच साल पहले मेरठ कॉलेज के छात्रों ने दो छात्रों की मामूली विवाद में गोली मारकर हत्या कर दी थी। तीन साल पहले सुभारती के पास चाऊमीन के 35 रुपये के विवाद में तीन युवकों की हत्या कर दी गई थी। बेगमपुल पर तीन साल पहले दो रोटी के विवाद में युवक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। एक साल पहले सदर बाजार में शराब के ठेके पर बीस रुपये के विवाद में सेल्समैन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।  तेजगढ़ी चौराहे पर एक साल पहले मामूली विवाद में साथियों ने ही विवि के छात्रनेता प्रशांत चौधरी उर्फ रोबिन की गोलियों से भूनकर हत्या करदी थी। प्रशांत घर का इकलौता चिराग था। 
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