फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Jayant tried to take back political legacy of his grandfather and father by forming an alliance with BJP

UP: दादा व पिता की राजनीतिक विरासत वापस लेने में अहम जयंत का गठबंधन दांव, 1977 से इस सीट पर रालोद का कब्जा

Sun, 11 Feb 2024 01:05 AM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ, बागपत Published by: कपिल kapil Updated Sun, 11 Feb 2024 01:05 AM IST
सार

Lok Sabha Election 2024 : बागपत लोकसभा सीट पर वर्ष 1998 को छोड़कर लगातार चौधरी चरण सिंह परिवार का कब्जा रहा है। वर्ष 1977 में चौधरी चरण सिंह पहली बार यहां से लोकसभा चुनाव लड़कर जीत दर्ज करते रहे।

विज्ञापन
Jayant tried to take back political legacy of his grandfather and father by forming an alliance with BJP
चौधरी जयंत सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा के साथ रालोद का गठबंधन तय हो चुका है, अब केवल औपचारिक घोषणा होनी बाकी है। जयंत का गठबंधन का यह दांव दादा चौधरी चरण सिंह और पिता चौधरी अजित सिंह की राजनीतिक विरासत वापस लेने में अहम होगा। भाजपा के साथ गठबंधन होने के बाद रालोद के लिए बागपत सीट सबसे सुरक्षित मानी जा रही है।

विज्ञापन


बागपत लोकसभा सीट पर वर्ष 1998 को छोड़कर लगातार चौधरी चरण सिंह परिवार का कब्जा रहा है। वर्ष 1977 में चौधरी चरण सिंह पहली बार यहां से लोकसभा चुनाव लड़कर जीत दर्ज करते रहे। उनके बाद वर्ष 1989 में उनके बेटे चौधरी अजित सिंह ने यहां से जीत दर्ज की तो वह 1997 तक सांसद रहे। वर्ष 1998 में जरूर उलटफेर हुआ और सोमपाल शास्त्री ने उनको हरा दिया। इसके बावजूद वह ज्यादा समय तक सांसद नहीं रह सके और वर्ष 1999 में हुए चुनाव में चौधरी अजित सिंह ने फिर जीत दर्ज करते हुए लगातार कब्जा जमाए रखा।

विज्ञापन

वहीं, वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. सत्यपाल सिंह ने उनको हरा दिया। उसके बाद वर्ष 2019 में खुद चौधरी जयंत सिंह यहां से चुनाव मैदान में उतरे और सपा व बसपा के साथ गठबंधन होने के बाद भी वह चुनाव नहीं जीत सके। इस तरह लगातार दस साल से बागपत पर भाजपा का कब्जा है और जयंत को दादा व पिता की कर्मभूमि वापस लेने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मगर अब भाजपा के साथ रालोद का गठबंधन होता है तो चौधरी चरण सिंह व चौधरी अजित सिंह की कर्मभूमि दोबारा से चौधरी परिवार को मिल सकती है।

यह भी पढ़ें: जन्म से मृत्यु तक का सफर: चौधरी साहब ने देश में किए थे ये बड़े बदलाव, पढ़िए किसान मसीहा बनने की पूरी कहानी

बागपत सीट पर यह वोटरों की स्थिति
बागपत लोकसभा सीट में बागपत, बड़ौत, छपरौली विधानसभा के अलावा मेरठ की सिवालखास, गाजियाबाद की मोदीनगर विधानसभा सीट है। इस तरह लोकसभा क्षेत्र में पंद्रह लाख से ज्यादा वोटर हैं। इनमें सबसे ज्यादा जाट वोटर शामिल हैं तो मुस्लिम, दलित भी काफी हैं। इनके अलावा गुर्जर, त्यागी, ठाकुर वोटरों की संख्या भी काफी है। इनमें भाजपा का कोर वोटर व जाट के सहारे रालोद के लिए यह सीट सुरक्षित मानी जा रही है। हालांकि, भाजपा के साथ गठबंधन होने के बाद रालोद को मुस्लिम वोटर मिलना मुश्किल है जो सपा या कांग्रेस का प्रत्याशी आने पर उसके पास जा सकता है।

यह भी पढ़ें: Mission 2024: वेस्ट UP में हुए सियासी नुकसान की भरपाई पर BJP की नजर, RLD कोटे से मुस्लिम की लग सकती है लॉटरी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed