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जम्मू के जवानों ने मेरठ में सीखे सुरक्षा के मंत्र, बोले- ड्यूटी पर काम आएगा यह विशेष प्रशिक्षण
Tue, 21 Jan 2020 03:21 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 21 Jan 2020 03:21 PM IST
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army jawan
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ की क्रांतिधरा पर जम्मू कश्मीर पुलिस पहली बार दंगा नियंत्रण प्रबंधन का प्रशिक्षण ले रही है। आरएएफ की 108 बटालियन स्थित अकादमी ऑफ पब्लिक ऑर्डर (रैपो) मेरठ में 300 जवान प्रशिक्षण के लिए आए हैं।
आठ जनवरी से शुरू हुए 12 दिन के इस विशेष प्रशिक्षण अभियान में आरएएफ के कमांडेंट शैलेंद्र कुमार, दूत्तिय कमान अधिकारी केएम बुनकर, असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सिंह और व अन्य प्रशिक्षित अधिकारियों ने दंगा नियंत्रण प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया। जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों ने कहा कि मेरठ में यह सुरक्षा का मंत्र उन्हें काम आएगा। आज मंगलवार को प्रशिक्षण के दौरान आरएएफ के आईजी अरुण कुमार भी मौजूद रहेंगे।
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आठ जनवरी से शुरू हुए 12 दिन के इस विशेष प्रशिक्षण अभियान में आरएएफ के कमांडेंट शैलेंद्र कुमार, दूत्तिय कमान अधिकारी केएम बुनकर, असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सिंह और व अन्य प्रशिक्षित अधिकारियों ने दंगा नियंत्रण प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया। जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों ने कहा कि मेरठ में यह सुरक्षा का मंत्र उन्हें काम आएगा। आज मंगलवार को प्रशिक्षण के दौरान आरएएफ के आईजी अरुण कुमार भी मौजूद रहेंगे।
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रैपो में भीड़ नियंत्रण पर 12 दिवसीय इंटरनेशनल कोर्स 8 जनवरी से शुरू हुआ था। जिसमें जम्मू कश्मीर पुलिस के 300 जवानों को ट्रेनिंग दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि दंगे में क्या करना चाहिए। हालात को कैसे भांपना चाहिए। हिंसक भीड़ गोलियां चला रही है, तो उसे कैसे संभालना चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान जवानों को बताया गया कि दंगे में जो काम पुलिस और दूसरे अर्धसैनिक बल नहीं कर पाते उसको आरएएफ जवान पूरा करते हैं। यही कारण है कि देश में कहीं भी दंगा होता है तो सबसे पहले आरएएफ को बुलाया जाता है। क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट के लिए आरएएफ के पास वज्र वाहन, बुलेट प्रूफ वाहन, वाटर कैनन वाहन मुख्य हैं।
आरएएफ के पास पांच विकल्प
आरएएफ पांच विकल्प लेकर चलती है। पहला विकल्प चेतावनी। दूसरा विकल्प आंसू गैस के गोले। इसके बाद भी भीड़ नहीं हटती है तो तीसरा विकल्प लाठीचार्ज का होता है। चौथे विकल्प में तौर पर आरएएफ वाटर कैनन का प्रयोग करती है। आखिरी विकल्प है फायरिंग। भीड़ कितनी भी उग्र हो, लेकिन किसी की जान लेना मकसद नहीं है। 45 डिग्री कोण से 90 डिग्री कोण पर ही फायरिंग करनी चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान जवानों को बताया गया कि दंगे में जो काम पुलिस और दूसरे अर्धसैनिक बल नहीं कर पाते उसको आरएएफ जवान पूरा करते हैं। यही कारण है कि देश में कहीं भी दंगा होता है तो सबसे पहले आरएएफ को बुलाया जाता है। क्राउड कंट्रोल मैनेजमेंट के लिए आरएएफ के पास वज्र वाहन, बुलेट प्रूफ वाहन, वाटर कैनन वाहन मुख्य हैं।
आरएएफ के पास पांच विकल्प
आरएएफ पांच विकल्प लेकर चलती है। पहला विकल्प चेतावनी। दूसरा विकल्प आंसू गैस के गोले। इसके बाद भी भीड़ नहीं हटती है तो तीसरा विकल्प लाठीचार्ज का होता है। चौथे विकल्प में तौर पर आरएएफ वाटर कैनन का प्रयोग करती है। आखिरी विकल्प है फायरिंग। भीड़ कितनी भी उग्र हो, लेकिन किसी की जान लेना मकसद नहीं है। 45 डिग्री कोण से 90 डिग्री कोण पर ही फायरिंग करनी चाहिए।