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जेएनयू के खिलाफ अदालत जाएगी जमीयत उलमा-ए-हिंद : मदनी
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, सहारनपुर
Updated Wed, 23 May 2018 11:57 AM IST
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मौलाना महमूद मदनी
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में इस्लामी आतंकवाद के शीर्षक से कोर्स शुरू किए जाने की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा है कि आतंकवाद को इस्लाम से जोड़ना एक घिनौना षड्यंत्र और इस्लाम धर्म का अपमान है। अफसोस की बात है कि धर्मनिरपेक्ष चरित्र की पक्षधर यूनिवर्सिटी इतना नीचे स्तर पर आ कर सांप्रदायिक तत्वों के उद्देश्यों को पूरा कर रही है, जो देश के ताने बाने को छिन्न भिन्न करने पर उतारू हैं। उन्होंने कहा कि इसे वापस नहीं लिया गया तो जमीयत अदालती कार्रवाई करने पर मजबूर होगी।
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मंगलवार को जारी बयान में मौलाना महमूद मदनी ने इसे इस्लामोफोबिया का प्रोपेगंडा बताते हुए यह शंका प्रकट की है कि इससे अकादमिक सांप्रदायिकता को बढ़ावा मिलेगा। मौलाना मदनी ने कहा कि किसी भी धर्म को आतंकवाद से जोड़ना में गलत है। इस्लाम जैसे शांति प्रिय धर्म जिसकी नजर में एक इंसान का कत्ल पूरी मानवता के कत्ल के बराबर है। आतंकवाद के नाम पर पूरी दुनिया में जंग करने वाली बड़ी बड़ी ताकतें भी इस्लामी आतंकवाद की ऐसी परिभाषा अपनाने का साहस नहीं करतीं हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भी स्पष्ट तौर से इस्लामी आतंकवाद जैसी परिभाषा को गलत बताया और इनकी दलीलें थीं कि इस तरह की भाषा आतंकवादियों के उस प्रोपेगंडा को सही ठहराने के बराबर है जो अपने कार्यों को धार्मिक जंग बतला रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व व्यापी ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज करके अपने कार्यों से जेएनयू प्रशासन ने दुनियाभर के लाखों मुसलमानों का दिल दुखाया है। मदनी ने यह भी कहा कि भारत में जमीयत उलमा-ए-हिंद ने आतंकवाद के खिलाफ छह हजार उलमा के हस्ताक्षर से फतवा जारी किया और पिछले 15 वर्षों से हर मोर्चे पर मुकाबला कर रही है। हमने पूरे देश में कांफ्रेंस आयोजित करके यह संदेश दिया कि इस्लाम आतंकवाद को समाप्त करने वाला धर्म है।
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