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अपने हित से ज्यादा दूसरों के हित के बारे में सोचता है मनुष्य
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हस्तिनापुर में अष्टान्हिका पर्व में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु।
- फोटो : MAWANA
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हस्तिनापुर। नगर के प्राचीन दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर में पंचमेरू नंदीश्वरद्वीप जिनालय में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान के छठे दिन रविवार को सर्वप्रथम जाप अनुष्ठान एवं मुख्य वेदी के अभिषेक के उपरांत विधान स्थल पहुंचकर अभिषेक एवं शांतिधारा की गई।
शांतिधारा करने का सौभाग्य क्षेत्र के मंत्री प्रद्युम्न कुमार जैन विपिन जैन को प्राप्त हुआ। तदोपरांत श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान करते हुए 512 अर्घ्य मांडले पर समर्पित किए। क्षेत्र पर विराजमान मुनिश्री भाव भूषण जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आत्मा का स्वरूप सिद्धत अवस्था को प्राप्त करना है। आज व्यक्ति अपने हित को छोड़कर दूसरों के अहित में लगा हुआ है। वह अपने दु:ख से दु:खी न होकर दूसरों के सुख से दु:खी है। ऐसा नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को अपने अवगुण और दूसरे के गुण देखने चाहिए। उस जैसा बनने का प्रयत्न करना चाहिए। व्यक्ति यदि ऐसा करने लगे तो वह सर्वोच्च पद को प्राप्त करता है और वह जगत में महान हो जाता है। सायंकालीन शास्त्र सभा की गई। जिसमें माता जी ने नन्दीश्वरद्वीप का वर्णन विस्तारपूर्वक बतलाया। शास्त्र सभा के पश्चात मंगल आरती भजन व भक्ति का कार्यक्रम किया गया। जिसमें उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के बच्चों ने भाग लिया। देश-देशांतर से पधारे श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आज के पुरस्कार नीना जैन ने प्रदान किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश कुमार जैन मेरठ, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, अध्यक्ष विनोद जैन, मुकेश कुमार, अशोक जैन, उमेश, अतुल, कमल जैन, सौरभ जैन एवं मणीचंद आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
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शांतिधारा करने का सौभाग्य क्षेत्र के मंत्री प्रद्युम्न कुमार जैन विपिन जैन को प्राप्त हुआ। तदोपरांत श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान करते हुए 512 अर्घ्य मांडले पर समर्पित किए। क्षेत्र पर विराजमान मुनिश्री भाव भूषण जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आत्मा का स्वरूप सिद्धत अवस्था को प्राप्त करना है। आज व्यक्ति अपने हित को छोड़कर दूसरों के अहित में लगा हुआ है। वह अपने दु:ख से दु:खी न होकर दूसरों के सुख से दु:खी है। ऐसा नहीं होना चाहिए। व्यक्ति को अपने अवगुण और दूसरे के गुण देखने चाहिए। उस जैसा बनने का प्रयत्न करना चाहिए। व्यक्ति यदि ऐसा करने लगे तो वह सर्वोच्च पद को प्राप्त करता है और वह जगत में महान हो जाता है। सायंकालीन शास्त्र सभा की गई। जिसमें माता जी ने नन्दीश्वरद्वीप का वर्णन विस्तारपूर्वक बतलाया। शास्त्र सभा के पश्चात मंगल आरती भजन व भक्ति का कार्यक्रम किया गया। जिसमें उत्तर प्रांतीय गुरुकुल के बच्चों ने भाग लिया। देश-देशांतर से पधारे श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आज के पुरस्कार नीना जैन ने प्रदान किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के महामंत्री मुकेश कुमार जैन मेरठ, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, अध्यक्ष विनोद जैन, मुकेश कुमार, अशोक जैन, उमेश, अतुल, कमल जैन, सौरभ जैन एवं मणीचंद आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
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