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आईटीआई में छात्रों का हंगामा, तालाबंदी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Sat, 09 Jul 2016 02:00 AM IST
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आईटीआई में हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
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आईटीआई की वर्ष 2013 की परीक्षा का परिणाम निरस्त करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कई दिन से आईटीआई में धरना दे रहे छात्रों ने शुक्रवार को जमकर हंगामा कर प्रदर्शन किया। दो छात्रों के अभिभावकों ने आत्मदाह करने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने उन्हें समय रहते रोक लिया। वहीं छात्रों ने तालाबंदी कर कर्मचारियों और शिक्षकों को बंधक बना लिया। सूचना पर पुलिस पहुंची तो उससे छात्रों की नोकझोंक हो गई। काफी समझाने के बाद छात्रों ने ताला खोला।
कई दिन से साकेत स्थित आईटीआई में छात्र रिजल्ट निरस्त किए जाने के विरोध में धरने पर बैठे हैं। शुक्रवार को छात्रों ने प्रधानाचार्य के ऑफिस के बाहर हंगामा कर शासन और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान दो छात्रों के अभिभावक देवराज और धर्मपाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने समय रहते दोनों को रोक लिया। गुस्साए छात्रों ने आईटीआई कॉलेज कैंपस में मौजूद संयुक्त निदेशक आईटीआई के दफ्तर पर हंगामा किया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को समझाने की कोशिश की। इस दौरान छात्रों की पुलिस से नोकझोंक हो गई।
छात्रों का कहना था कि प्रधानाचार्य योगेश कुमार और जेडी डीके सिंह अपने दफ्तर में नहीं है। कोई भी अधिकारी ज्ञापन तक लेने नहीं आया। हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने प्रधानाचार्य योगेश कुमार को बुलाया। छात्रों ने अपनी मांग रखी तो उन्होंने कहा कि शासन से मामले में बात चल रही है। समस्या के समाधान के लिए एक माह का समय चाहिए, क्योंकि यह समस्या मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के आईटीआई के छात्रों की है। छात्र नेता एक माह का वक्त देने पर सहमत हो गए। उन्होंने कहा कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो भूख हड़ताल की जाएगी। हर्ष ठाकुर, मनीष शर्मा, रोबिन शर्मा, शुभम भारद्वाज, प्रवीण भड़ाना आदि मौजूद रहे।
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विवि के छात्र नेताओं ने दिया था समर्थन
आईटीआई में धरना दे रहे छात्रों को समर्थन देने के लिए शनिवार को विवि के छात्र नेता राहुल विकल, आयुष पंवार और दुष्यंत तोमर के नेतृत्व दर्जनों छात्र पहुंचे थे। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से समस्या के समाधान की मांग की थी।
कर्मचारी और शिक्षक बनाए बंधक
गुस्साए छात्रों ने तालाबंदी कर कर्मचारियों और शिक्षकों को बंधक बना लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को जैसे तैसे समझा बुझाकर काफी देर बाद ताला खुलवाया।
यह है मामला
वर्ष 2011 में आईआईटी में प्रवेश लेने वाले छात्रों की मुख्य परीक्षा साल 2013 में हुई थी। शैक्षिक सत्र 2012 में सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया था। इसका 2011 सत्र के छात्रों को भी पंजीकरण कराना था। हंगामा करने वालों छात्रों का पंजीकरण नहीं हो सका था। उनका कहना है कि सर्वर डाउन होने के कारण प्रदेश में सरकारी और निजी आईटीआई में पढ़ने वाले तमाम छात्रों का पंजीकरण नहीं हो पाया था। इस मामले में जेडी के माध्यम से पंजीकरण की तिथि खत्म होने के बाद भी सरकार को अवगत करा दिया गया था। मुख्यमंत्री के आदेश पर मामले की जांच कराई गई और फिर सभी छात्रों को साल 2013 में परीक्षा में शामिल होने की इजाजत दे दी गई। छात्रों ने परीक्षा दी, लेकिन रिजल्ट के समय पंजीकरण को आधार मानकर रिजल्ट घोषित करने से इनकार कर दिया गया था।
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कई दिन से साकेत स्थित आईटीआई में छात्र रिजल्ट निरस्त किए जाने के विरोध में धरने पर बैठे हैं। शुक्रवार को छात्रों ने प्रधानाचार्य के ऑफिस के बाहर हंगामा कर शासन और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान दो छात्रों के अभिभावक देवराज और धर्मपाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने समय रहते दोनों को रोक लिया। गुस्साए छात्रों ने आईटीआई कॉलेज कैंपस में मौजूद संयुक्त निदेशक आईटीआई के दफ्तर पर हंगामा किया। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को समझाने की कोशिश की। इस दौरान छात्रों की पुलिस से नोकझोंक हो गई।
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छात्रों का कहना था कि प्रधानाचार्य योगेश कुमार और जेडी डीके सिंह अपने दफ्तर में नहीं है। कोई भी अधिकारी ज्ञापन तक लेने नहीं आया। हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने प्रधानाचार्य योगेश कुमार को बुलाया। छात्रों ने अपनी मांग रखी तो उन्होंने कहा कि शासन से मामले में बात चल रही है। समस्या के समाधान के लिए एक माह का समय चाहिए, क्योंकि यह समस्या मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के आईटीआई के छात्रों की है। छात्र नेता एक माह का वक्त देने पर सहमत हो गए। उन्होंने कहा कि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो भूख हड़ताल की जाएगी। हर्ष ठाकुर, मनीष शर्मा, रोबिन शर्मा, शुभम भारद्वाज, प्रवीण भड़ाना आदि मौजूद रहे।
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विवि के छात्र नेताओं ने दिया था समर्थन
आईटीआई में धरना दे रहे छात्रों को समर्थन देने के लिए शनिवार को विवि के छात्र नेता राहुल विकल, आयुष पंवार और दुष्यंत तोमर के नेतृत्व दर्जनों छात्र पहुंचे थे। उन्होंने कॉलेज प्रशासन से समस्या के समाधान की मांग की थी।
कर्मचारी और शिक्षक बनाए बंधक
गुस्साए छात्रों ने तालाबंदी कर कर्मचारियों और शिक्षकों को बंधक बना लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने छात्रों को जैसे तैसे समझा बुझाकर काफी देर बाद ताला खुलवाया।
यह है मामला
वर्ष 2011 में आईआईटी में प्रवेश लेने वाले छात्रों की मुख्य परीक्षा साल 2013 में हुई थी। शैक्षिक सत्र 2012 में सरकार ने ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया था। इसका 2011 सत्र के छात्रों को भी पंजीकरण कराना था। हंगामा करने वालों छात्रों का पंजीकरण नहीं हो सका था। उनका कहना है कि सर्वर डाउन होने के कारण प्रदेश में सरकारी और निजी आईटीआई में पढ़ने वाले तमाम छात्रों का पंजीकरण नहीं हो पाया था। इस मामले में जेडी के माध्यम से पंजीकरण की तिथि खत्म होने के बाद भी सरकार को अवगत करा दिया गया था। मुख्यमंत्री के आदेश पर मामले की जांच कराई गई और फिर सभी छात्रों को साल 2013 में परीक्षा में शामिल होने की इजाजत दे दी गई। छात्रों ने परीक्षा दी, लेकिन रिजल्ट के समय पंजीकरण को आधार मानकर रिजल्ट घोषित करने से इनकार कर दिया गया था।