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सोशल साइट के जरिए पढ़े-लिखे युवाओं को निशाना बना रहे आतंकी संगठन, लड़कियों को सौंपा जाता है टास्क 

Sun, 21 Oct 2018 05:23 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sun, 21 Oct 2018 05:23 PM IST
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ISI girls targeting educated indian youth by social networking sites honeytrap meerut
मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई जहां पहले कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाती थी। वहीं, अब उसके निशाने पर पढ़े-लिखे युवा हैं। आईएसआई और आतंकी संगठनों को लगता है कि उनके जरिए ऑपरेशन को अंजाम देना ज्यादा आसान होता है।

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इंटरनेट की दुनिया के साथ खुफिया एजेंसियों को जो जानकारियां लेनी होती हैं, उसे किसी न किसी तरह से जुटा लेते हैं। ऐसे में आईएसआई सबसे ज्यादा युवाओं को सोशल साइट्स के जरिए निशाना  बना रही है। इसमें आईएसआई के नेटवर्क में शामिल लड़कियां अहम भूमिका निभा रही हैं।
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सेना के जवान कंचन सिंह के भी आईएसआई एजेंट के संपर्क में फोन द्वारा आने की बात कही जा रही है। इसके बाद से वो एंड्रॉयड मोबाइल पर बातचीत कर रहा था। ये भी माना जा रहा है कि आईएसआई एजेंट उससे ऑनलाइन बात करता था।
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अकेले कंचन ही नहीं उससे पहले जासूसी के आरोप में पकड़ा गया बीएसएफ का सिपाही अच्युतानंद मिश्रा हो या फिर नागपुर के रक्षा अनुसंधान में इंजीनियर निशांत अग्रवाल। इन दोनों को भी आईएसआई ने सोशल साइट्स पर हनी ट्रैप में फंसाकर गोपनीय जानकारियां हासिल कीं। 

ऐसे युवाओं को किया जाता है टारगेट

सैन्य अफसर बताते हैं कि ये ट्रेंड पिछले कुछ सालों में बदला है। पहले आईएसआई कम पढ़े-लिखे लोगों को पैसों का लालच देकर जासूसी कराती थी लेकिन अब वे पढ़े लिखे युवाओं के साथ ही सेना में भी सेंधमारी कर रही है।

जम्मू-कश्मीर में ये समस्या सबसे ज्यादा सामने आ रही है। इंटरनेट के जरिए ही घाटी में युवाओं को बरगलाने के बाद आईएसआई इस्तेमाल कर रहा है। कुछ दिन पहले जम्मू में आत्मघाती हमलावर होने के शक में जिस लड़की को कस्टडी में लिया गया था, वह नर्सिंग का कोर्स कर रही थी। इंटरनेट के जरिए ही उसे निशाना बनाया गया था। उसे शादी से लेकर दुनिया के सारे ख्वाब दिखाए गए थे। 

खुफिया एजेंसियों के लिए भी यह चिंता कस विषय बना हुआ है। सैन्य अफसर बताते हैं कि हम लोग सेना के जवानों-अफसरों को अक्सर इस बारे में जागरूक करते हैं कि सोशल साइट पर अगर आप हैं भी तो अपनी पहचान उस पर मत खोलिए।

खासतौर से जिनकी पहचान उजागर होती है, उनको आईएसआई के एजेंट निगरानी के बाद टारगेट कर लेते हैं। ऐसी प्रोफाइल्स को आईएसआई अपनी महिला एजेंट को देकर उनसे मैसेज कराता है। कई बार युवा इन लड़कियों के जाल में फंसकर देश की गोपनीय सूचनाएं भेजने लग जाते हैं। 

कंचन तक मोबाइल पहुंचाने वाले शख्स की तलाश

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का नेटवर्क मेरठ से दिल्ली तक फैला हुआ है। अपने किस जासूस को रकम भिजवानी है, किस जासूस को मोबाइल फोन और लैपटॉप आदि भेजने हैं। इन सब कामों के लिए आईएसआई यहीं के लोगों का इस्तेमाल कर रही है। ऐसे में कंचन सिंह को मोबाइल गिफ्ट करने वाला शख्स सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा टारगेट बना हुआ है। यही वो शख्स है जिसके पकड़े जाने के बाद कई और अहम राज उजागर हो सकते हैं।

इस बात की जानकारी हो सकती है कि ये शख्स दिल्ली और आसपास के जिलों में और कितने लोगों को आईएसआई का भेजा गया सामान मुहैया करा चुका है। खुफिया एजेंसियां आईएसआई और कंचन सिंह के बीच की कड़ी को तलाशने में जुटी हुई हैं। वो ये जानना चाहती हैं कि आखिर इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल रहे हैं। सेना और सिविल खुफिया एजेंसियों की मानें तो आईएसआई जब भी इस तरह की मुखबिरी कराती है तो वह सिर्फ एक जासूस के सहारे ऑपरेशन नहीं चलाती है।

उसके पीछे एक पूरा नेटवर्क काम करता है। कंचन सिंह भी आईएसआई का अकेला मोहरा नहीं था। इस नेटवर्क में दर्जनों लोगों के शामिल होने की आशंका है। सबसे अहम कड़ी तो वो शख्स है जिसने आईएसआई के मोबाइल फोन को कंचन तक पहुंचाया। इसके अलावा दिल्ली में खुफिया एजेंसियों की टीम काम रही है। इससे आशंका है कि मेरठ से दिल्ली तक जासूसी का एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। इसमें कितने लोग हैं। जासूसी कहां-कहां से की जा रही है। ये सब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। 

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