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स्कूलों के पास नशे का धंधा, सिस्टम खामोश

Thu, 20 Jun 2019 05:08 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Thu, 20 Jun 2019 05:08 AM IST
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Intoxication near Schools, system silent
स्कूल के पास नशे का धंधा - फोटो : अमर उजाला
स्कूली छात्र और युवा नशे की गिरफ्त में हैं। उनके खून में नशे का जहर घोला जा रहा है और सिस्टम खामोश है। सब्जी का ठेला हो या फिर फलों की दुकान, धड़ल्ले से नशे का सामान सड़क पर बेचा जा रहा है। अमर उजाला ने स्टिंग कर नशे के कारोबार की पोल खोली है। सुबह से लेकर रात तक इन सौदागरों की दुकानों पर अफीम, चरस और स्मैक खरीदने वालों की लाइन लगी रहती है।
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स्कूल के पास सजती है दुकान
अमर उजाला की टीम बुधवार को गढ़ रोड स्थित मेडिकल कालेज के निकट दो स्कूल के पास पहुंची। यहां पर स्कूली बच्चे और युवा सौदागरों के पास से सड़क पर ही नशे का सामान खरीदते देखे गए, जिसे हमने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया।
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50 रुपये की एक पुड़िया
सौदागर एक फल वाले की दुकान पर खड़ा था। नशे का सामान खरीदने वाले इसे पहले से जानते थे। 50-50 रुपये लेकर वह पुड़िया बांट रहा था। उससे पूछा कि ये क्या है, तो उसने कहा चरस। तभी उसने दूसरी पुड़िया दिखाई और कहा कि ये 30 रुपये की है, लेकिन इसमें माल कम है।
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जैसा पैसा, वैसा माल
अमर उजाला ने सौदागर से नशे के अलग-अलग सामान के बारे में पूछा। उसने कहा कि मेरे पास चरस, गांजा, अफीम और भांग है। दूसरा नशे का सामान हेरोइन या फिर कुछ और चाहिए तो वो भी दिलवा दूंगा। जैसा पैसा खर्च करोगे, वैसा ही माल मिलेगा। सप्ताह में एक बार उसके पास नशे की खेप आती है। उससे 50 वाली पुड़िया 30 में देने को कहा तो वह बोला, साहब ऊपर तक पैसा जाता है। रेट कम नहीं होगा।
युवा हो रहे बर्बाद
शहर के युवाओं में नशे की लत के कारण अपराध बढ़ रहा है। कई बार पुलिस लूट-चोरी करते ऐसे युवाओं को पकड़ती है, जो नशे की हालत में होते हैं।

पुलिस और एसटीएफ ने कई बार भारी मात्रा में नशे का सामान बरामद कर सौदागरों को जेल भेजा है। स्कूलों के पास नशे का सामान बेचना सामाजिक दृष्टि से भी बड़ा अपराध है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


- डॉ. बीपी अशोक, एसपी क्राइम


शरीर को खोखला करता है नशा
डॉ. विश्वजीत बैंबी बताते हैं कि नशीले पदार्थ का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव मस्तिष्क पर पड़ता है। ये मानव मस्तिष्क की संचार प्रणाली को प्रभावित करता है। स्मरण शक्ति को कमजोर करता है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि राणा ने बताया कि नशीले पदार्थ के इस्तेमाल से मनुष्य की सोचने-समझने की क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। मस्तिष्क का सामान्य संचार तंत्र बाधित होता है।
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