अंतरराष्ट्रीय शोर जागरूकता दिवस: चारों तरफ ध्वनि प्रदूषण का जोर, दिल की बीमारियों काखता बढ़ा रहा शोर
चिकित्सकों का कहना है कि इस बात को समझना होगा कि शहरी क्षेत्र में वाहनों के शोर से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। यही नहीं इससे सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
विस्तार
एक सीमा से अधिक शोरगुल होने पर लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। तेज धुन से बजने वाले डैक, वाहनों का शोर, अधिक समय तक टीवी देखने और ध्वनि विस्तारित यंत्रों के ध्वनि प्रदूषण से हृदय रोग और सुने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
चिकित्सकों ने ध्वनि प्रदूषण से बचने की हिदायत दी है। इस संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल अप्रैल के आखिरी बुधवार को अंतरराष्ट्रीय शोर जागरूकता दिवस मनाया जाता है।
चिकित्सकों का कहना है कि इस बात को समझना होगा कि शहरी क्षेत्र में वाहनों के शोर के अलावा अधिक समय तक घरों में टीवी से चिपके रहने, ईयर फोन लगाकर घंटों गाने या फोन पर बात करने से बहरापन पनपने लगता है। रोड ट्रैफिक के कारण तेज हॉर्न बजने से स्वास्थ्य को नुकसान होता है। वैवाहिक कार्यक्रम के अलावा बर्थ डे आदि अन्य कार्यक्रमों में डीजे पर तेज ध्वनि से गानों को बजाने से कानों के पर्दे प्रभावित होते हैं।
शहर में शोर की स्थिति
संवदेनशील क्षेत्र ध्वनि
कैंट एरिया 57
जिला न्यायालय 69
व्यावसायिक क्षेत्र
रेलवे रोड 77
बेगम पुल 79
आवासीय क्षेत्र
शास्त्री नगर 68
कैंट बोर्ड 53
यह हैं मानक
संवेदनशील क्षेत्र 55
व्यावसायिक क्षेत्र 65
आवासीय क्षेत्र 50
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यह हैं सुनने की क्षमता के मानक
-15 से 20 डेसीबेल तक की आवाज से कान को कोई नुकसान नहीं होता है
-60 से 65 डेसीबेल के बाद कान को आवाज चुभने लगती है
-115 डेसीबेल की आवाज से कान का पर्दा फट सकता है
-85 से 120 डेसीबेल आवाज पटाखे की होती है
-85 से 115 डेसीबेल आवाज हेडफोन का होता है
स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
शहरी क्षेत्र में वाहनों के शोरगुल के अलावा अन्य माध्यमों से फैल रहा ध्वनि प्रदूषण सेहत के लिए हानिकारक है। 50 डेसिबल ध्वनि स्तर तक सेहत खराब नहीं होती, लेकिन यदि यही ध्वनि स्तर 80 डेसिबल हो जाता है तो वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। - डॉ. बीपी कौशिक, ईएनटी, जिला अस्पताल
घटने लगी सुनने की क्षमता
लगातार शोर-शराबे के बीच रहने से कान को नुकसान पहुंचता है। इससे सुनने की क्षमता घटने लगती है। लगातार शोर से संवेदी तंत्रिका को नुकसान हो सकता है। - डॉ. शिवम कुमार, ईएनटी
साइन बोर्ड लगाने चाहिए
स्कूलों और अस्पतालों जैसे क्षेत्रों के आसपास यातायात का प्रवाह जितना संभव हो कम से कम किया जाना चाहिए। साइलेंस जोन वाले साइन बोर्ड लगाए जाने चाहिए। - डॉ. अनिल नौसरान, पूर्व सचिव, आईएमए