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अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस 2020: अपने हुनर से हथेली पर खींच ली तरक्की की लकीर
Fri, 16 Oct 2020 02:17 AM IST
कपिल kapil
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Fri, 16 Oct 2020 02:17 AM IST
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स्वयं सहायता समूह में सिलाई करतीं महिलाएं और आराध्या महिला स्वयं सहायता समूह में काम करती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
हाथों में हुनर था और मन में हालातों को बदलने की प्रचंड अभिलाषा। अपनी जंग खुद लड़ने के जज्बे से भरीं ये ग्रामीण महिलाएं भारतीय संस्कृति और रस्म से पीछा नहीं छुड़ातीं। बस चाहती हैं कि इनके लिए माहौल बदले। बदलाव की इसी चाहत ने आज हजारों महिलाओं को स्वयंप्रभा बना दिया है। बिना डिग्री और महंगी पढ़ाई के ये महिलाएं आज आंत्रप्रेन्योर के रूप में खुद को स्थापित कर चुकी हैं। हुनर से इन्होंने अपने हाथों में तरक्की की नई रेखा खींच ली है।
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अपने लिए खुद लड़नी होती है लड़ाई
काम से पहचान बनाने वाली शहनाज कहती हैं कि अपने लिए खुद लड़ना होता है। दुनिया, समाज औरतों की मजबूरी का फायदा उठा सकती है, हस सकती है। लेकिन उसके आगे बढ़ने के रास्ते नहीं बना सकती। हमारा भारत महिला स्वयं सहायता समूह है। महलका में हम यह समूह चलाते हैं। इसमें हम महिलाएं ट्रैकसूट व कपड़े सिलती हैं। हमारा सामान सरस केंद्र व अन्य जगहों पर जाता है। जैसे काम मिलता है आमदनी भी हो जाती है।
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अच्छे बदलाव की नई तस्वीर
दतावली, गेसुपुर गांव में आराध्या महिला स्वयं सहायता समूह की सोहनबीरी कहती हैं कि अच्छे बदलाव को होने में बहुत वक्त लगता है। हम लोग भी कोशिश कर रहे हैं कि गांव में आने वाली बहुएं, बेटियां नई पीढ़ी को कुछ अच्छा दे सकें। उनको वो माहौल न मिले जिससे आज से दस-पांच साल पहले गांवों की औरतें जूझती थीं। इसमें स्वयं सहायता समूह काफी काम आ रहे हैं। घर के घर में काम होता है, सामान बिकता है तो आय भी हो जाती है। कुछ बचत भी कर लेते हैं।
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काम में सुकून, सम्मान और सीख
मुजफ्फरपुर सैनी गांव में मोहिनी समूह से जुड़ी बबीता अपनी सहेलियों के साथ मोती के गहने व सजावटी सामान बनाकर बेचती हैं। बबीता कहती हैं कि पहले जो महिलाएं घरों में काम, मजदूरी करती थी वो अब बहुत सुखी हैं। यहां उन्हें आय भी सही मिल रही है और पूरा सम्मान मिलता है। अब काम के लिए भटकना नहीं पड़ता। काम खुद चलकर आता है। भले हम गांव में रहते हैं लेकिन सुकून, आत्मसम्मान पढ़े-लिखों जैसा मिलता है।
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