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किशोरों का सुधार गृह नहीं, अपराध की पाठशाला, इन कुख्यातों ने तैयार किए क्रिमिनल

Mon, 23 Apr 2018 05:38 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, गजेंद्र चौधरी, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, गजेंद्र चौधरी, मेरठ Updated Mon, 23 Apr 2018 05:38 PM IST
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Instead of improving the communication house, the juvenile emerged as a criminal
सम्प्रेक्षण गृह - फोटो : अमर उजाला

पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों में स्थित सुधार गृह किशोरों के लिए जरायम की पाठशाला बन गए हैं। किशोर यहां सुधरने की बजाय बड़े अपराधी बनकर निकल रहे हैं। इनमें कई अपराधी तो ऐसे हैं जो एक लाख रुपये तक के इनामी रहे और अब जेल में हैं जबकि कई इनामी अभी फरार हैं। किशोरावस्था में ही बड़े कुख्यात इन किशोरों को अपने गैंग में शामिल होने का ऑफर देते रहते हैं। 

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वेस्ट यूपी की कई बड़ी गैंगवार में दुश्मनों के खात्मे के लिए ऐसे क्रिमिनलों को मोहरा बनाया जाता हैं। यही वजह है कि जघन्य अपराध में कानून ने फेरबदल किया, जिसमें 17 साल की उम्र के किशोर को कानून की दृष्टि से जघन्य अपराध में बालिग मानने पर सहमति जताई गई। 
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इन कुख्यातों ने तैयार किए क्रिमिनल 
किशोर संप्रेक्षण गृह में बंद शातिर किशोरों पर कई कुख्यातों की नजर होती हैं। बडे़ कुख्यात किशोरों को अपराध करने की ट्रेनिंग देते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में धर्मा गैंग, बिजेंद्र गैंग, सुंदर भाटी, सुशील मूंछ और मुस्तफा उर्फ कग्गा गैंग में ऐसे क्रिमिनल तैयार किए गए, जिनके अब अपने-अपने गैंग बने हैं। धर्मा गैंग से अजय जडे़जा, सुशील मूंछ गैंग से भूपेंद्र सिंह, बिजेंद्र गैंग से योगेश भदौड़ा व उधमसिंह, सुंदर भाटी गैंग से बलराज भाटी, मुस्तफा उर्फ कग्गा गैंग से मुकीम काला जैसे समेत कई बदमाश किशोरावस्था में सुधार गृह से निकले। 
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रंजिश का फायदा उठाते कुख्यात
वेस्ट यूपी में गैंगवार या फिर हत्या का बदले हत्या कराने का ठेका तक भी ऐसे ही क्रिमिनलों को दिया जाता है। बडे़ बदमाशों से हथियार देकर इन्हीं से खूनखराबा कराते है। वहीं, कुख्यात इसके बदले में अपने कई काम कराते हैं। जेल में बंद कुख्यात यह काम सबसे ज्यादा कराते है। कई कुख्यातों के शूटर सिर्फ सुपारी लेकर हत्या करते हैं। कोतवाली में पार्षद आरिफ हत्याकांड, सोहरका दोहरा हत्याकांड व सावित्री हत्याकांड की पटकथा जेल से रची गई। जिसमें कई बदमाश किशोरावस्था में सुधार गृह से जा चुके हैं।

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संप्रेक्षण गृह में कर चुके हत्या

Instead of improving the communication house, the juvenile emerged as a criminal
बड़े अपराधी

कौन नहीं जानता कि सुधार गृह में किशोरों को कैसी ट्रेनिंग दी जाती है। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने इसको बखूबी देखा है। सूरजकुंड स्थित संप्रेक्षण गृह में निरुद्ध किशोर सिपाही समेत चार लोगों की हत्या कर चुके हैं। हालत ऐसे थे कि रोजाना बवाल होना तय था। कई बार पुलिस अधिकारी तक पिटे। उसके बाद ही लखनऊ से एक्शन लेकर इस संप्रेक्षण गृह को जिला जिला परिसर में शिफ्ट किया गया। 

तब थे किशोर, अब कुख्यात
सन 2010 में परतापुर के अछरौंडा गांव निवासी सोनू और मोनू, कसेरू बक्सर निवासी कपिल, कोतवाली निवासी नदीम, लिसाड़ी गेट से जावेद सुधार गृह में थे। वहां से आने के बाद यह कुख्यात बने। मोनू और नदीम पर 50-50 हजार का इनाम है। अन्य बदमाश जेल में हैं। इससे पहले मुकीम काला, सुनील राठी, अजय जडे़जा, योगेश काला, सलमान, अमित भूरा समेत कई अपराधी जेल में हैं, जिन्होंने किशोरावस्था से क्राइम शुरू किया।   

मोहरा बनाते हैं कुख्यात
अधिकांश कुख्यात किशोरों को मोहरा बनकर अपराध कराते हैं। कई बदमाशों को पुलिस जेल भेज चुकी है, जोकि पूर्व में किशोर सुधार गृह में निरुद्ध रह चुके थे। कई अपराधियों के केस अभी सुधार गृह में चल रहे हैं, जो बड़ी जेल से तारीख पर लाए जाते हैं। -मंजिल सैनी दहल, एसएसपी

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