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इनर रिंग रोड मामला : महिलाओं समेत किसान खेतों में बैठ गए, निर्माण कार्य रुकवाया
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। किला परीक्षितगढ रोड स्थित इनर रिंग रोड के पास गंगानगर एक्सटेंशन योजना की भूमि पर कब्जे को लेकर चल रही खींचतान के बीच मंगलवार को महिलाओं समेत किसान खेतों पर पहुंचे। यहां चल रहे निर्माण कार्य को उन्होंने रुकवा दिया। इसके चलते मजूदरों को लौटना पड़ा। इससे पहले भी कब्जे को लेकर यहां टीम का काफी विरोध और हंगामा हुआ था।
बता दें कि सोमवार को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के सचिव आनंद कुमार के साथ टीम यहां पहुंची थी। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में टीम ने खेतों में खड़ी सरसों की फसल को उजाड़ दिया था और करीब बीस हजार मीटर जमीन पर कब्जा करते हुए हदबंदी कर नींव की खोदाई का कार्य शुरू कर दिया था। टीम की ओर से फसल उजाड़ने के विरोध में किसानों ने काफी हंगामा कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वे किसी तरह की मनमानी नहीं चलने देंगे। कुछ किसानों ने आत्महत्या करने की चेतावनी तक दे दी थी।
इसी मामले में मंगलवार को महिलाओं सहित अन्य किसान यहां पहुंचे। इस दौरान कुछ मजदूर खोदाई और निर्माण कार्य कर रहे थे। किसान इन खेतों में ही बैठ गए और कहा कि वे यहां काम नहीं करने देंगे। यह हालत देख मजदूर यहां से चले गए। किसान विजेंद्र, सुशील, धर्मेंद्र, रिशपाल सहित अन्य ने कहा कि वे इस कार्रवाई के नाम पर शोषण नहीं होने देंगे।
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मेरठ। किला परीक्षितगढ रोड स्थित इनर रिंग रोड के पास गंगानगर एक्सटेंशन योजना की भूमि पर कब्जे को लेकर चल रही खींचतान के बीच मंगलवार को महिलाओं समेत किसान खेतों पर पहुंचे। यहां चल रहे निर्माण कार्य को उन्होंने रुकवा दिया। इसके चलते मजूदरों को लौटना पड़ा। इससे पहले भी कब्जे को लेकर यहां टीम का काफी विरोध और हंगामा हुआ था।
बता दें कि सोमवार को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के सचिव आनंद कुमार के साथ टीम यहां पहुंची थी। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में टीम ने खेतों में खड़ी सरसों की फसल को उजाड़ दिया था और करीब बीस हजार मीटर जमीन पर कब्जा करते हुए हदबंदी कर नींव की खोदाई का कार्य शुरू कर दिया था। टीम की ओर से फसल उजाड़ने के विरोध में किसानों ने काफी हंगामा कर दिया था। उन्होंने कहा था कि वे किसी तरह की मनमानी नहीं चलने देंगे। कुछ किसानों ने आत्महत्या करने की चेतावनी तक दे दी थी।
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इसी मामले में मंगलवार को महिलाओं सहित अन्य किसान यहां पहुंचे। इस दौरान कुछ मजदूर खोदाई और निर्माण कार्य कर रहे थे। किसान इन खेतों में ही बैठ गए और कहा कि वे यहां काम नहीं करने देंगे। यह हालत देख मजदूर यहां से चले गए। किसान विजेंद्र, सुशील, धर्मेंद्र, रिशपाल सहित अन्य ने कहा कि वे इस कार्रवाई के नाम पर शोषण नहीं होने देंगे।
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