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लापतागंज की इंदुमती को लुभाती है मेरठ की सर्दी
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इंदुमती को लुभाती है मेरठ की सर्दी
अभिनेत्री सुचेता खन्ना बनी मेरठ की मेहमान
कहा, चुटकी बजाकर बनती हैं पॉपकार्न फिल्में
मेरठ। दुनिया उन्हें इंदुमती के नाम से जानती है। कभी पीटरसन हिल की पिंकी चड्डा तो कभी हरी मिर्च लाल मिर्च की रितु खन्ना उनकी पहचान है। कॉमेडी के संसार की दमदार शख्सियत अभिनेत्री सुचेता खन्ना बृहस्पतिवार को शहर की मेहमान बनीं। निजी समारोह में शामिल होने मेरठ आईं सुचेता ने कहा कि मेरठ की सर्दी उन्हें बहुत पसंद है। हारमनी इन में बातचीत करते हुए इंदुमती बोली मेरठ से कोई निमंत्रण जब सर्दी में मिलता है तो उसे इंकार नहीं कर पातीं।
सुचेता कहती हैं वेब सीरीज क ा दायरा बढ़ रहा है। कई छोटे-छोटे मोबाइल एप हैं। अब वेब सीरीज का भविष्य है। वेब सीरीज में प्रजेंटेशन बहुत अच्छा आ रहा है। इन शो की शूटिंग एकदम फिल्मों जैसे हो रही है। पुरानी फिल्मों में संदेश होता था ये सच है। मुझे मम्मी-पापा के जमाने की फिल्में बहुत अच्छी लगती हैं। जो आजकल फिल्मों में चल रहा है वो पॉपकार्न जैसा है। इंडस्ट्री में 18-20 सालों से हूं। जब मैं इंडस्ट्री में आई थीं तब अलग-अलग तरह के लोग थे। आज वक्त बदला है। अब युवाओं की सोच बदली है बिल्कुल पॉपकार्न की तरह। चीजें चुटकी बजाकर शुरू होती हैं। चुटकी बजाकर खत्म होती हैं। फिल्मों में भी ऐसा ही है अगर ऐसी फिल्में चल रही हैं वो पॉपकार्न जैसी हैं। जो युवाओं को पकड़ती हैं। सुचेता खन्ना पंजाबी परिवार में जन्मी और उन्होंने मलयालम फिल्मों से कॅरियर की शुरुआत की थी। फिल्म यमला पगला दीवाना में पोली का कोमिक किरदार निभाया। अंजाना अंजानी व सैंडविच में भी काम किया। सब टीवी के मशहूर शो लापतागंज में इंदुमती की भूमिका से चर्चा में आईं। पीटरसन हिल की पिंकी चड्डा भी रहीं। डीडी के शो हरी मिर्च लाल मिर्च में किरदार निभाया।
बच्चों की फितरत सुधारें अभिभावक
मी टू, निर्भया और चांदनी जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुचेता कहती हैं, आज सोशल मीडिया पर लोग बहुत जागरूक हो चुके हैं। मुद्दा ये है कि स्त्री-पुरुष जो भी हो उसकी शिक्षा, संस्कार, तालीम सही होनी चाहिए। उसकी फितरत को सही होना चाहिए। हर परिवारों क ो इस पर काम करना चाहिए। अभिभावक बच्चों की फितरत, उनकी सोच और संस्कार पर काम करें।
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सर्दियों में मेरठ आने का अलग मज़ा
मेरठ मुझे बहुत पसंद है, यहां कई रिश्तेदार रहते हैं जो अब मुंबई शिफ्ट हो चुके हैं। मैंने सुना है कि मेरठ से 1857 की क्रांति शुरू हुई थी। यहां के लोग मुझे बहुत पसंद हैं। खासतौर पर सर्दियों में मेरठ आना बहुत अच्छा लगता है। क्योंकि सर्दियों में यहां शकरकंदी की चाट, उबले भुट्टे, गर्म आलू की चाट, गजक, रेवड़ी मिलती है।
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अभिनेत्री सुचेता खन्ना बनी मेरठ की मेहमान
कहा, चुटकी बजाकर बनती हैं पॉपकार्न फिल्में
मेरठ। दुनिया उन्हें इंदुमती के नाम से जानती है। कभी पीटरसन हिल की पिंकी चड्डा तो कभी हरी मिर्च लाल मिर्च की रितु खन्ना उनकी पहचान है। कॉमेडी के संसार की दमदार शख्सियत अभिनेत्री सुचेता खन्ना बृहस्पतिवार को शहर की मेहमान बनीं। निजी समारोह में शामिल होने मेरठ आईं सुचेता ने कहा कि मेरठ की सर्दी उन्हें बहुत पसंद है। हारमनी इन में बातचीत करते हुए इंदुमती बोली मेरठ से कोई निमंत्रण जब सर्दी में मिलता है तो उसे इंकार नहीं कर पातीं।
सुचेता कहती हैं वेब सीरीज क ा दायरा बढ़ रहा है। कई छोटे-छोटे मोबाइल एप हैं। अब वेब सीरीज का भविष्य है। वेब सीरीज में प्रजेंटेशन बहुत अच्छा आ रहा है। इन शो की शूटिंग एकदम फिल्मों जैसे हो रही है। पुरानी फिल्मों में संदेश होता था ये सच है। मुझे मम्मी-पापा के जमाने की फिल्में बहुत अच्छी लगती हैं। जो आजकल फिल्मों में चल रहा है वो पॉपकार्न जैसा है। इंडस्ट्री में 18-20 सालों से हूं। जब मैं इंडस्ट्री में आई थीं तब अलग-अलग तरह के लोग थे। आज वक्त बदला है। अब युवाओं की सोच बदली है बिल्कुल पॉपकार्न की तरह। चीजें चुटकी बजाकर शुरू होती हैं। चुटकी बजाकर खत्म होती हैं। फिल्मों में भी ऐसा ही है अगर ऐसी फिल्में चल रही हैं वो पॉपकार्न जैसी हैं। जो युवाओं को पकड़ती हैं। सुचेता खन्ना पंजाबी परिवार में जन्मी और उन्होंने मलयालम फिल्मों से कॅरियर की शुरुआत की थी। फिल्म यमला पगला दीवाना में पोली का कोमिक किरदार निभाया। अंजाना अंजानी व सैंडविच में भी काम किया। सब टीवी के मशहूर शो लापतागंज में इंदुमती की भूमिका से चर्चा में आईं। पीटरसन हिल की पिंकी चड्डा भी रहीं। डीडी के शो हरी मिर्च लाल मिर्च में किरदार निभाया।
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बच्चों की फितरत सुधारें अभिभावक
मी टू, निर्भया और चांदनी जैसी घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुचेता कहती हैं, आज सोशल मीडिया पर लोग बहुत जागरूक हो चुके हैं। मुद्दा ये है कि स्त्री-पुरुष जो भी हो उसकी शिक्षा, संस्कार, तालीम सही होनी चाहिए। उसकी फितरत को सही होना चाहिए। हर परिवारों क ो इस पर काम करना चाहिए। अभिभावक बच्चों की फितरत, उनकी सोच और संस्कार पर काम करें।
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सर्दियों में मेरठ आने का अलग मज़ा
मेरठ मुझे बहुत पसंद है, यहां कई रिश्तेदार रहते हैं जो अब मुंबई शिफ्ट हो चुके हैं। मैंने सुना है कि मेरठ से 1857 की क्रांति शुरू हुई थी। यहां के लोग मुझे बहुत पसंद हैं। खासतौर पर सर्दियों में मेरठ आना बहुत अच्छा लगता है। क्योंकि सर्दियों में यहां शकरकंदी की चाट, उबले भुट्टे, गर्म आलू की चाट, गजक, रेवड़ी मिलती है।