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हज हाउस बंद होने से बढ़ीं मुश्किलें, यहां थी कागजों एवं पासपोर्ट की जांच की सुविधा
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
Updated Tue, 08 Aug 2017 08:16 PM IST
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हज हाऊस
- फोटो : हज हाऊस
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प्रदेश की योगी सरकार में गाजियाबाद स्थित हज हाउस बंद होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हज यात्रियों को इस बार भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन यात्रियों के परिजन हज समिति के सदस्यों को रोजाना ही परेशानियों से अवगत करा रहे हैं।
पूर्व में ये थीं सुविधाएं
गाजियाबाद में हज हाउस का निर्माण सपा शासनकाल में हुआ था। जहां हज यात्रियों के ठहरने के इंतजाम के साथ ही हज कमेटी की ओर से इन यात्रियों के कागजों एवं पासपोर्ट की जांच पड़ताल करने और फिर उन्हें यात्रा के टिकट के साथ बस द्वारा दिल्ली एयरपोर्ट तक ले जाने की व्यवस्था थी। बताया गया कि पिछली बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया था। लेकिन योगी सरकार में हज हाउस बंद होने पर इस बार हज यात्री इन सुविधाओं से दूर हैं।
हज यात्रियों का कोटा
देश भर में इस बार हज यात्रियों का कोटा 1.80 लाख निर्धारित होना बताया गया। जबकि उत्तर प्रदेश में यूपी हज कमेटी की ओर से करीब 26 हजार लोगों का हज यात्रा के लिए चयन किया गया। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, हापुड़, मुरादाबाद आदि जिलों से जाने वाले यात्रियों की संख्या करीब 15 हजार बतायी गयी। जबकि मेरठ से यह संख्या करीब एक हजार है।
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सुविधाओं से वंचित हुए हज यात्री
जिला हज समिति के सदस्य एवं नायब शहर काजी मेरठ जैनुरराशिदीन का कहना है कि मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर आदि जिलों से अधिकांश हज यात्री लगभग रवाना हो चुके हैं। जिनके परिवार जनों ने उन्हें बताया कि इस बार हज यात्रियों को एयरपोर्ट तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्योंकि पिछले वर्ष गाजियाबाद में हज हाउस होने से उन्हें हज कमेटी की तरफ से काफी सहूलियतें थीं। लेकिन इस बार ऐसी कोई सुविधा नहीं मिली।
भाजपा सरकार ने पैदा कीं दुश्वारियां
इस संबंध में ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के जिलाध्यक्ष कारी शफीकुर्रहमान कासमी का आरोप है कि केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार में इस बार हज यात्रियों को दुश्वारियों से गुजरना पड़ रहा है। गाजियाबाद में हज हाउस का मकसद हज यात्रियों को तमाम सुविधाएं देने के साथ ही दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर भीड़ को कम करना था। लेकिन इन यात्रियों को अब अपने वाहनों से एयरपोर्ट तक परिजनों के साथ जाना पड़ रहा है। हज हाउस की सुविधा न मिलने से यात्रियों को दिल्ली में कैंपों में ठहरना पड़ रहा है।
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पूर्व में ये थीं सुविधाएं
गाजियाबाद में हज हाउस का निर्माण सपा शासनकाल में हुआ था। जहां हज यात्रियों के ठहरने के इंतजाम के साथ ही हज कमेटी की ओर से इन यात्रियों के कागजों एवं पासपोर्ट की जांच पड़ताल करने और फिर उन्हें यात्रा के टिकट के साथ बस द्वारा दिल्ली एयरपोर्ट तक ले जाने की व्यवस्था थी। बताया गया कि पिछली बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश यात्रियों ने इस सुविधा का लाभ उठाया था। लेकिन योगी सरकार में हज हाउस बंद होने पर इस बार हज यात्री इन सुविधाओं से दूर हैं।
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हज यात्रियों का कोटा
देश भर में इस बार हज यात्रियों का कोटा 1.80 लाख निर्धारित होना बताया गया। जबकि उत्तर प्रदेश में यूपी हज कमेटी की ओर से करीब 26 हजार लोगों का हज यात्रा के लिए चयन किया गया। इनमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, हापुड़, मुरादाबाद आदि जिलों से जाने वाले यात्रियों की संख्या करीब 15 हजार बतायी गयी। जबकि मेरठ से यह संख्या करीब एक हजार है।
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सुविधाओं से वंचित हुए हज यात्री
जिला हज समिति के सदस्य एवं नायब शहर काजी मेरठ जैनुरराशिदीन का कहना है कि मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर आदि जिलों से अधिकांश हज यात्री लगभग रवाना हो चुके हैं। जिनके परिवार जनों ने उन्हें बताया कि इस बार हज यात्रियों को एयरपोर्ट तक ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। क्योंकि पिछले वर्ष गाजियाबाद में हज हाउस होने से उन्हें हज कमेटी की तरफ से काफी सहूलियतें थीं। लेकिन इस बार ऐसी कोई सुविधा नहीं मिली।
भाजपा सरकार ने पैदा कीं दुश्वारियां
इस संबंध में ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के जिलाध्यक्ष कारी शफीकुर्रहमान कासमी का आरोप है कि केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार में इस बार हज यात्रियों को दुश्वारियों से गुजरना पड़ रहा है। गाजियाबाद में हज हाउस का मकसद हज यात्रियों को तमाम सुविधाएं देने के साथ ही दिल्ली एयरपोर्ट के बाहर भीड़ को कम करना था। लेकिन इन यात्रियों को अब अपने वाहनों से एयरपोर्ट तक परिजनों के साथ जाना पड़ रहा है। हज हाउस की सुविधा न मिलने से यात्रियों को दिल्ली में कैंपों में ठहरना पड़ रहा है।