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Meerut News: गन्ना फसल पर कीटों का बढ़ा प्रकोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
दौराला। इस वर्ष गन्ना फसल पर कीटों का प्रकोप बढ़ने से किसान चिंतित हैं। शुरुआती दौर में तेज गर्मी के चलते अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन अब टॉप बोरर, जड़ बेधक, काला चिकटा, थ्रिप्स और टिड्डों के हमले ने फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। कीट तनों में छेद कर और पत्तियां खाकर गन्ने की वृद्धि प्रभावित कर रहे हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
गन्ना विशेषज्ञ डॉ. प्रणव राणा ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है और इसका सीधा असर चीनी मिलों व क्रशर इकाइयों पर पड़ता है। पिछले वर्ष भी उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में इस बार फसल की शुरुआत में ही कीटों का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। बताया कि मई माह कीट नियंत्रण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस समय टॉप बोरर की दूसरी पीढ़ी सक्रिय हो जाती है।
मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव भी कीटों के बढ़ने की एक बड़ी वजह है। बताया कि किसानों को राहत देने के लिए चीनी मिलों द्वारा अनुदान पर ट्रैप व कीटनाशक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही पेड़ी फसल में टैंकरों से दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वह समय रहते नियंत्रण के लिए उपाय अपनाएं। मई के अंतिम सप्ताह में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18 प्रतिशत (150 मिली प्रति एकड़) को 400 लीटर पानी में मिलाकर जड़ क्षेत्र में डालें और बाद में हल्की सिंचाई करें।
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दौराला। इस वर्ष गन्ना फसल पर कीटों का प्रकोप बढ़ने से किसान चिंतित हैं। शुरुआती दौर में तेज गर्मी के चलते अच्छी पैदावार की उम्मीद जताई जा रही थी लेकिन अब टॉप बोरर, जड़ बेधक, काला चिकटा, थ्रिप्स और टिड्डों के हमले ने फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। कीट तनों में छेद कर और पत्तियां खाकर गन्ने की वृद्धि प्रभावित कर रहे हैं, जिससे उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
गन्ना विशेषज्ञ डॉ. प्रणव राणा ने बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है और इसका सीधा असर चीनी मिलों व क्रशर इकाइयों पर पड़ता है। पिछले वर्ष भी उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में इस बार फसल की शुरुआत में ही कीटों का प्रकोप किसानों के लिए चिंता का कारण बन गया है। बताया कि मई माह कीट नियंत्रण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इस समय टॉप बोरर की दूसरी पीढ़ी सक्रिय हो जाती है।
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मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव भी कीटों के बढ़ने की एक बड़ी वजह है। बताया कि किसानों को राहत देने के लिए चीनी मिलों द्वारा अनुदान पर ट्रैप व कीटनाशक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही पेड़ी फसल में टैंकरों से दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है। विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वह समय रहते नियंत्रण के लिए उपाय अपनाएं। मई के अंतिम सप्ताह में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18 प्रतिशत (150 मिली प्रति एकड़) को 400 लीटर पानी में मिलाकर जड़ क्षेत्र में डालें और बाद में हल्की सिंचाई करें।
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