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Meerut News: हस्तिनापुर में आबादी से ज्यादा भूमि पर संचालित थे उद्योग धंधे

Sun, 21 Jul 2024 05:43 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 21 Jul 2024 05:43 AM IST
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In Hastinapur, industries were operated on more land than population.
हस्तिनापुर। कस्बे में स्थित सहकारी संघ लिमिटेड के भवन में रखे एक पुराने संदूक और अलमारी में जो पुराने दस्तावेज प्रशासनिक अधिकारियों को प्राप्त हुए हैं, उनमें हस्तिनापुर से संबंधित कई ऐसी जानकारी अधिकारियों को मिली है जो उनके पास मौजूद नहीं थी। बताया जा रहा है कि आबादी से ज्यादा भूमि पर यहां उद्योग धंधे संचालित थे।
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तीन दिन पूर्व कस्बे में सहकारी संघ लिमिटेड के भवन में रखे पुराने संदूक और अलमारी से हजारों फाइलें प्रशासनिक अधिकारियों को मिली हैं। यह करीब वर्ष 1950 के आसपास की बताई जा रही हैं। इन फाइलों में ऐसी जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को मिली हैं जो वर्तमान में किसी भी अधिकारी के पास नहीं थी।
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जानकारों का मानना है कि हस्तिनापुर में आने वाले समय में कई बड़ी कार्रवाई देखने को मिलेंगी, जो इन्हीं फाइलों के दम पर होंगी। इनमें कई ऐसे पुख्ता सबूत अधिकारियों के हाथ लगे हैं, जिनकी उन्हें पिछले कई वर्षों से तलाश थी। फिलहाल इन फाइलों को कब्जे में लेकर इनका अध्ययन किया जाएगा। उसके बाद ही प्राचीन हस्तिनापुर के विकास की योजना बनाई जाएगी।
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प्रशासनिक अधिकारियों को 1950 का मानचित्र मिला है। इसकी तलाश पिछले 70 वर्षों से नगर पंचायत को भी थी। उसे मानचित्र में हस्तिनापुर को एक विकसित शहर दर्शाया गया है, जिसमें आबादी से अधिक स्थानों पर उद्योग धंधे संचालित थे। परंतु वर्तमान में अरबों रुपये कीमत की भूमि पर अवैध कब्जे हैं।
प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हस्तिनापुर को विकसित करने के लिए बड़ा प्लान बनाया था, जिसकी जिम्मेदारी उस समय के कई आईएएस अधिकारियों को दी गई थी। जो सहकारी संघ के भवन में बैठकर हस्तिनापुर को विकसित करने का सपना देखते थे, परंतु समय के साथ-साथ सब कुछ बदल गया। वर्तमान में स्थिति ऐसी है कि यह महाभारत कालीन पांडवों की नगरी अपने विकास को तरस रही है। जो 70 साल पुराने दस्तावेज अधिकारियों को मिले हैं, अब उनके आधार पर ही हस्तिनापुर के विकास की उम्मीद है।


कई उद्योग धंधों की चल रही है जांच
कस्बे में करीब सौ बीघा भूमि पर पिछले लंबे समय से विनीता केमिकल्स के नाम से कब्जा था, जबकि इस भूमि पर आज तक यह केमिकल फैक्टरी नहीं लगाई गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने कुछ दिन पूर्व ही कब्जा कर इस कीमती भूमि को खाली कराया था। वहीं अब हस्तिनापुर में मौजूद अन्य बंद पड़ी फैक्टरियों की जांच शुरू हो चुकी है। जल्द ही यहां पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिलेगी।
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