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Meerut News: बचपन में प्रीति पाल के कमजोर थे पैर, चल भी नहीं पाती थीं
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गंगानगर। गंगानगर निवासी पैरा एथलीट प्रीतिपाल मूलरूप से मुजफ्फरनगर के हाशिमपुर की रहने वाली हैं। उन्होंने अभी हाल ही में पैरा ओलंपिक खेलों में 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ दोनों इवेंट में कांस्य पदक जीता और मेरठ समेत पूरे देश का नाम रोशन किया।
प्रीति का जन्म साल 2000 में हुआ था। पैदा होने के छह दिन बाद ही कमजोर पैर के कारण उसपर प्लास्टर लगाया गया था। महज 5 साल की उम्र में वह कैलिपर्स पहनती थीं। अगले 8 साल तक उनका जीवन ऐसा ही रहा। उनके पिता अनिल कुमार डेयरी चलाते हैं। पैरालंपिक खेलों में T35 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिन्हें हाइपरटोनिया, अटैक्सिया, एथेटोसिस और सेरेब्रल पाल्सी जैसे समन्वय संबंधी विकार हैं। 17 साल की उम्र में उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला। वह यह सपना पूरा करने पहले मेरठ और उसके बाद फिर दिल्ली आ गई। यहां पैरा ऐथलीट फातिमा खातून की मदद से प्रीति ने 100 और 200 मीटर के इवेंट में हिस्सा लेना शुरू किया।
उपलिब्धयां..
- पैरालंपिक 2024 में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
- वर्ष 2021 से लगातार नेशनल में स्वर्ण पदक
- बंगलूरू में हुई ओपन नेशनल में 100 मीटर और 200 मीटर में स्वर्ण
- जापान में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
- खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक
- गोवा में हुए नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक
- पैरा एशियन गेम्स में चौथा स्थान
बयां नहीं कर सकती अपनी खुशी : प्रीतिपाल
गंगानगर। प्रीतिपाल ने बातचीत में बताया कि अर्जुन अवार्ड की लिस्ट में नाम होने की जानकारी उन्हें पहले मिल गई थी। जब बृहस्पतिवार दोपहर घोषणा की गई तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा मैं अपनी खुशी को बयां नहीं कर सकती हूं। मेरा सपना पूरा हो गया है। राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होना गर्व की बात है। अब 17 जनवरी को कोच, परिवार के एक सदस्य के साथ दिल्ली में अर्जुन अवार्ड सेरेमनी में शामिल होंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी को भी अर्जुन अवार्ड दिए जाने पर उन्हें बधाई दी। प्रीति की बहन नेहा पाल, दादी सरोज ने खुशी जाहिर की। अवार्ड मिलने की जानकारी पर भाजपा नेता चौधरी अजित सिंह, रजपुरा मंडल अध्यक्ष मोहित मालिक, प्रमोद गुर्जर, आशीष मालिक, अम्हेड़ा आदिपुर गांव के प्रधान पति रोबिन सिंह सिवाच, कुंवरपाल और विनोद गौड़ आदि ने बधाई दी।
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पांच साल बाद प्रीति ने खत्म किया अर्जुन अवार्ड का सूखा
मुजफ्फरनगर। पैरा एथलीट प्रीति पाल ने जिले के लिए अर्जुन अवार्ड का सूखा भी खत्म कर दिया। पांच साल पहले पहलवान दिव्या काकरान के बाद किसी खिलाड़ी को यह कामयाबी हासिल नहीं हो सकी थी। एथलेटिक्स में जिले के किसी खिलाड़ी को यह पहला अवार्ड है। बरवाल गांव के रहने वाले भारतीय कुश्ती टीम के कोच जगमिंद्र सिंह को अर्जुन और द्रोणाचार्य अवार्ड मिल चुका है। टेबिल टेनिस में संदीप गुप्ता को द्रोणाचार्य अवार्ड मिला था। निशानेबाजी में जानसठ के मुराद अली खान को अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। इसके बाद कबड्डी में मुंडभर के संजीव बालियान को अर्जुन अवार्ड मिला। कुश्ती में बढ़ेड़ी के अनुज चौधरी को खेल के सबसे बड़े पुरस्कार से नवाज जा चुका है।
अनिल पाल बोले, बेटी प्रीति ने हमारी पहचान बदल दी
मुजफ्फरनगर। पिता अनिल कुमार ने कहा कि बेटी ने दुनिया में हमारी शान बढ़ा दी है। पहचान बदल गई है। हमारे लिए यह गौरव के पल हैं। परिवार अब 17 जनवरी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
पेरिस पैरालंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर प्रीति पाल ने कामयाबी का डंका बजाया था। हाशमपुर की पहचान भी अब प्रीति पाल के गांव से होने लगी है। बृहस्पतिवार को खेल मंत्रालय की ओर से जारी सूची में एथलीट का नाम आने से परिवार में खुशी का माहौल बन गया। घर पर ग्रामीण बधाई देने पहुंचे। परिवार के लोग एकत्र हो गए और खुशी मनाई। एथलीट प्रीति पाल के पिता अनिल पाल हाशमपुरा गांव में दूध की डेयरी चलाते हैं। माता बालेश देवी गृहिणी हैं। इसके अलावा बहन नेहा पाल, भाई अनिकेत और विवेक पाल हैं।
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प्रीति का जन्म साल 2000 में हुआ था। पैदा होने के छह दिन बाद ही कमजोर पैर के कारण उसपर प्लास्टर लगाया गया था। महज 5 साल की उम्र में वह कैलिपर्स पहनती थीं। अगले 8 साल तक उनका जीवन ऐसा ही रहा। उनके पिता अनिल कुमार डेयरी चलाते हैं। पैरालंपिक खेलों में T35 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है जिन्हें हाइपरटोनिया, अटैक्सिया, एथेटोसिस और सेरेब्रल पाल्सी जैसे समन्वय संबंधी विकार हैं। 17 साल की उम्र में उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पैरालंपिक खेलों के बारे में पता चला। वह यह सपना पूरा करने पहले मेरठ और उसके बाद फिर दिल्ली आ गई। यहां पैरा ऐथलीट फातिमा खातून की मदद से प्रीति ने 100 और 200 मीटर के इवेंट में हिस्सा लेना शुरू किया।
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उपलिब्धयां..
- पैरालंपिक 2024 में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
- वर्ष 2021 से लगातार नेशनल में स्वर्ण पदक
- बंगलूरू में हुई ओपन नेशनल में 100 मीटर और 200 मीटर में स्वर्ण
- जापान में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स में दोनों इवेंट में कांस्य पदक
- खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक
- गोवा में हुए नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक
- पैरा एशियन गेम्स में चौथा स्थान
बयां नहीं कर सकती अपनी खुशी : प्रीतिपाल
गंगानगर। प्रीतिपाल ने बातचीत में बताया कि अर्जुन अवार्ड की लिस्ट में नाम होने की जानकारी उन्हें पहले मिल गई थी। जब बृहस्पतिवार दोपहर घोषणा की गई तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा मैं अपनी खुशी को बयां नहीं कर सकती हूं। मेरा सपना पूरा हो गया है। राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होना गर्व की बात है। अब 17 जनवरी को कोच, परिवार के एक सदस्य के साथ दिल्ली में अर्जुन अवार्ड सेरेमनी में शामिल होंगे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी को भी अर्जुन अवार्ड दिए जाने पर उन्हें बधाई दी। प्रीति की बहन नेहा पाल, दादी सरोज ने खुशी जाहिर की। अवार्ड मिलने की जानकारी पर भाजपा नेता चौधरी अजित सिंह, रजपुरा मंडल अध्यक्ष मोहित मालिक, प्रमोद गुर्जर, आशीष मालिक, अम्हेड़ा आदिपुर गांव के प्रधान पति रोबिन सिंह सिवाच, कुंवरपाल और विनोद गौड़ आदि ने बधाई दी।
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पांच साल बाद प्रीति ने खत्म किया अर्जुन अवार्ड का सूखा
मुजफ्फरनगर। पैरा एथलीट प्रीति पाल ने जिले के लिए अर्जुन अवार्ड का सूखा भी खत्म कर दिया। पांच साल पहले पहलवान दिव्या काकरान के बाद किसी खिलाड़ी को यह कामयाबी हासिल नहीं हो सकी थी। एथलेटिक्स में जिले के किसी खिलाड़ी को यह पहला अवार्ड है। बरवाल गांव के रहने वाले भारतीय कुश्ती टीम के कोच जगमिंद्र सिंह को अर्जुन और द्रोणाचार्य अवार्ड मिल चुका है। टेबिल टेनिस में संदीप गुप्ता को द्रोणाचार्य अवार्ड मिला था। निशानेबाजी में जानसठ के मुराद अली खान को अर्जुन अवार्ड मिल चुका है। इसके बाद कबड्डी में मुंडभर के संजीव बालियान को अर्जुन अवार्ड मिला। कुश्ती में बढ़ेड़ी के अनुज चौधरी को खेल के सबसे बड़े पुरस्कार से नवाज जा चुका है।
अनिल पाल बोले, बेटी प्रीति ने हमारी पहचान बदल दी
मुजफ्फरनगर। पिता अनिल कुमार ने कहा कि बेटी ने दुनिया में हमारी शान बढ़ा दी है। पहचान बदल गई है। हमारे लिए यह गौरव के पल हैं। परिवार अब 17 जनवरी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
पेरिस पैरालंपिक में दो कांस्य पदक जीतकर प्रीति पाल ने कामयाबी का डंका बजाया था। हाशमपुर की पहचान भी अब प्रीति पाल के गांव से होने लगी है। बृहस्पतिवार को खेल मंत्रालय की ओर से जारी सूची में एथलीट का नाम आने से परिवार में खुशी का माहौल बन गया। घर पर ग्रामीण बधाई देने पहुंचे। परिवार के लोग एकत्र हो गए और खुशी मनाई। एथलीट प्रीति पाल के पिता अनिल पाल हाशमपुरा गांव में दूध की डेयरी चलाते हैं। माता बालेश देवी गृहिणी हैं। इसके अलावा बहन नेहा पाल, भाई अनिकेत और विवेक पाल हैं।