संक्रमण नहीं थमा तो होगा सांसों का संकट जिले में हर रोज हो रही 3800 ऑक्सीजन सिलिंडरों की आपूर्ति
- संक्रमण की रफ्तार कम न हुई तो आगे ऑक्सीजन को लेकर और बढ़ सकती है समस्या
विस्तार
एडीएम सिटी अजय तिवारी ने बताया कि बुधवार को कंसल गैस गोदाम मोहिउद्दीनपुर से 1184, मेडिओक्सी एजेंसी बिजौली हापुड़ रोड से 1035, अग्रवाल गैस गोदाम से 175, माहेश्वरी गैस गोदाम से 520, राजश्री गैस गोदाम से 540 ऑक्सीजन गैस सिलिंडर की आपूर्ति कराई गई। कुल 3754 सिलिंडर की आपूर्ति हुई।
एडीएम के मुताबिक कंसल गैस गोदाम के लिए बुधवार को 16 टन, अग्रवाल गैस को 5.5 टन, मेडिओक्सी बिजौली को सात टन एवं राजश्री को नौ टन ऑक्सीजन प्राप्त हुई। वहीं, स्वस्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले के 33 कोविड अस्पतालों में मंगलवार शाम को ऑक्सीजन वाले बेड पर 1891 लोग भर्ती थे, जबकि रोजाना करीब 3800 सिलिंडर की आपूर्ति हो रही है। ऐसे में आधे सिलिंडर लोग निजी रूप से ले रहे हैं।
परतापुर क्षेत्र के पुट्ठा रोड स्थित माहेश्वरी ऑक्सीजन गैस प्लांट पर बुधवार को संक्रमितों के लिए ऑक्सीजन लेने पहुंचे तीमारदारों की लंबी कतारें लगी रहीं। कुछ तीमारदारों ने सिलिंडरों की कालाबाजारी का आरोप लगाया और हंगामा किया। इस पर प्लांट मालिक, कर्मचारियों और तीमारदारों में मारपीट हो गई। कई तीमारदार घायल हो गए। मीडिया कर्मियों से भी अभद्रता की गई और कैमरा छीनने का प्रयास किया गया।
बुधवार को माहेश्वरी गैस और अग्रवाल गैसेज पर तीमारदारों की लंबी कतारें 24 घंट से लगी रहीं। गैस खत्म होने पर तीमारदारों के चेहरे लटक गए। इसी दौरान गोदाम से जैसे ही कुछ सिलिंडर निकले तो तीमारदारों ने कालाबाजारी का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया। उनका कहना था कि कुछ लोग ऑक्सीजन की सिलिंडर की कालाबाजारी कर रहे हैं। बुधवार अपराह्न ऑक्सीजन आई तब तीमारदारों ने राहत की सांस ली।
काम छूटा तो सिलिंडर भरवा रहे मजदूर
कोरोना कर्फ्यू में उद्योगों में काम कम होने के कारण कई मजदूरों ने नए विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। अधिकतर मजदूर इन दिनों ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने का काम कर रहे हैं। एक मजदूर दिन में दो सिलिंडर भरवाकर 500 से 700 रुपए की कमाई कर लेता है।
शहर में अधिकांश ऑक्सीजन फिलिंग स्टेशन औद्योगिक क्षेत्रों के पास हैं। इन क्षेत्रों में औद्योगिक इकाईयों में काम करने वाले काफी मजदूरों पर काम नहीं है। फैक्ट्रियां बंद हैं तो माल की सप्लाई और मांग ठप है। ऐसे में मजदूर रोजी रोटी के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर भरवाने की कतार में लग रहे हैं।
रोजाना सुबह से देर रात तक ये मजदूर ऑक्सीजन प्लांटों के बाहर खाली सिलिंडर लेकर उन्हें भरवाने के लिए लंबी कतारों में लगते हैं। धूप, गर्मी में दिनभर खड़े रहने के बाद जब नंबर आता है तो मजदूर सिलिंडर भरवाता है। सिलिंडर भरवाने के बाद मालिक को फोन पर उसकी सूचना देता है। तब संबंधित सिलिंडर मालिक की गाड़ी या रिक्शे में भरे हुए सिलिंडर को मंगवा लेता है।