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कर्मों के आधार पर मिलते हैं मनुष्यों को सुख और दुख : विमर्श सागर
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कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
-कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 24वां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 24वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
स्वर्ण कलश से प्रमोद जैन, विजय जैन अंकित जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा विजय जैन, जिनेंद्र जैन शनि जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन शशि, प्रियंका, मंजू, अवण्या, अव्या जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
देव-शास्त्र-गुरु एवं आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाकर भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 102 परिवारों की ओर से विधान का कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ नीलम जैन ने किया।
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विधान के मध्य गुरुवर विमर्श सागर महाराज ने कहा कि कभी-कभी व्यक्ति के मन में आ जाता है कि जब इतने दुख भोग ही रहे हैं तो प्रभु को क्यों याद करूं। उन्हीं के कारण तो मुझे दुखों की प्राप्ति हो रही है लेकिन यह सोच गलत है। दुख कभी भी भगवान नहीं दे सकते। यह तुम्हारे ही द्वारा किए गए कर्म हैं जो तुम्हें दुख दे रहे हैं। यह भी याद रखना कि यदि सुख आ जाए तो भी प्रभु को न भूलना क्योंकि प्रभु निरंतर की गई भक्ति उनका स्मरण ही सुख को विस्तारित करता है और कष्टों का नाश करता है।
विधान का विसर्जन कुसुम जैन, कपिल जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रेखा जैन, राजेंद्र जैन, शैंकी जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन प्रवीण जैन और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मनोज जैन ने किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 24वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
स्वर्ण कलश से प्रमोद जैन, विजय जैन अंकित जैन ने अभिषेक किया। शांतिधारा विजय जैन, जिनेंद्र जैन शनि जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन शशि, प्रियंका, मंजू, अवण्या, अव्या जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
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देव-शास्त्र-गुरु एवं आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाकर भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 102 परिवारों की ओर से विधान का कराया गया। भक्तामर पाठ का शुभारंभ नीलम जैन ने किया।
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विधान के मध्य गुरुवर विमर्श सागर महाराज ने कहा कि कभी-कभी व्यक्ति के मन में आ जाता है कि जब इतने दुख भोग ही रहे हैं तो प्रभु को क्यों याद करूं। उन्हीं के कारण तो मुझे दुखों की प्राप्ति हो रही है लेकिन यह सोच गलत है। दुख कभी भी भगवान नहीं दे सकते। यह तुम्हारे ही द्वारा किए गए कर्म हैं जो तुम्हें दुख दे रहे हैं। यह भी याद रखना कि यदि सुख आ जाए तो भी प्रभु को न भूलना क्योंकि प्रभु निरंतर की गई भक्ति उनका स्मरण ही सुख को विस्तारित करता है और कष्टों का नाश करता है।
विधान का विसर्जन कुसुम जैन, कपिल जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रेखा जैन, राजेंद्र जैन, शैंकी जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन प्रवीण जैन और चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मनोज जैन ने किया।

कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद