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माध्यमिक विद्यालयों में कैसे हो पढ़ाई, शिक्षकों के 1380 पद पड़े हैं खाली

Mon, 07 Sep 2020 01:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2020 01:15 AM IST
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How to study in secondary schools, 1380 posts of teachers are lying vacant
माध्यमिक विद्यालयों में कैसे हो पढ़ाई, शिक्षकों के 1380 पद पड़े हैं खाली
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मेरठ। माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई का रोना तो हर कोई रोता है लेकिन यहां शिक्षकों की कमी किसी को दिखाई नहीं देती। अब प्रदेश सरकार ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 16 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की है। इससे मेरठ का कितना भला होगा यह तो पता नहीं, लेकिन माध्यमिक विद्यालयों के दिन जरूर बहुरेंगे।
यूपी बोर्ड के विद्यालयों में पढ़ाई में सुधार की कवायद तो की जा रही है, मगर शिक्षकों की कमी को पूरा नहीं किया गया है। शिक्षकों की कमी के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां राजकीय और एडेड के 178 विद्यालय हैं, जिनमें प्रवक्ता समेत 1380 शिक्षकों की कमी चल रही है। इन विद्यालयों में 3500 शिक्षक होने चाहिए, लेकिन हैं सिर्फ 2120 कार्यरत। जिले में यूपी बोर्ड के तहत वित्तविहीन के 230 विद्यालयों को शामिल करके यहां 408 माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें करीब दो लाख 35 हजार 448 विद्यार्थी पढ़ते हैं। रमसा के स्कूल लगाकर 45 राजकीय हैं और 133 अशासकीय सहायता प्राप्त हैं। इतना ही नहीं, इन शिक्षकों की भी ड्यूटी तमाम विभागीय कार्यों में लगाई जाती है। कई बार शिक्षक विभागीय कार्य के कारण कक्षाओं में पढ़ाने के लिए उपलब्ध ही नहीं हो पाते हैं। कहीं हिंदी विषय का प्रवक्ता नहीं है तो कहीं अंग्रेजी का। 45 राजकीय विद्यालयों में 699 शिक्षक पद स्वीकृत है जिनमें 353 की कमी है। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का हाल एडेड स्कूल 133 सहायक अध्यापक स्वीकृत पद 2005 कार्यरत 1166 कमी 839, एडेड स्कूल प्रवक्ता के स्वीकृत पद 796 कार्यरत 601, कमी 195।
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प्रधानाचार्यों के भी 49 पद खाली
शिक्षकों के ही नहीं, मेरठ के इन विद्यालयों में प्रधानाचार्यों के भी 49 पद खाली चल रहे हैं। इनमें 19 प्रधानाचार्य इंटर कॉलेज के हैं, जबकि 30 प्रधानाचार्य हाईस्कूल के विद्यालयों में प्रधानाचार्यों के हैं।
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शिक्षकों की भरपाई होनी जरूरी
जिला विद्यालय निरीक्षक गिरजेश चौधरी का कहना है कि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, जिनकी भरपाई होनी जरूरी है। राजकीय और शासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में रिक्तियों की सूचना शासन को समय- समय पर भेजी जाती है। अब उम्मीद की जा रही है कि इनकी भरपाई की जाएगी।
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