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Meerut News: बगैर दवाओं के कैसे आयुष्मान हो आयुष्मान विंग

Fri, 06 Dec 2024 02:29 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Dec 2024 02:29 AM IST
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How to be healthy without medicines Ayushman Wing
मेरठ। आयुष विंग का कोई पुरसेहाल नहीं है। पिछले करीब ढाई साल से यहां दवाइयां नहीं आई हैं। बचीखुची दवाओं के भरोसे ही इलाज किया जा रहा है।
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आयुष के तहत जिले में 24 चिकित्सक हैं। इनके तहत मुख्यत: आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी के तहत इलाज किया जाता है। सबसे बड़ी आयुष विंग पीएल शर्मा जिला अस्पताल में हैं, जहां तीन चिकित्सक बैठते हैं। इनके अलावा महिला जिला अस्पताल में एक और 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर आयुष के अंतर्गत आने वाले चिकित्सक बैठते हैं।
ये सीएचसी मवाना, सरधना, किठौर, दौराला, पांचली, हस्तिनापुर, परीक्षितगढ़, माछरा और जानी आदि हैं। इन सभी चिकित्सा केंद्रों पर हर माह करीब 25 हजार मरीज आते हैं। इनके लिए आखिरी बार सात मई 2022 को दवाएं आई थीं। तब से अब तक इन्हीं दवाओं से काम चलाया जा रहा है। जिन मरीजों के मर्ज की दवा नहीं होती है उन्हें एलोपैथिक चिकित्सक के पास भेज देते हैं, या फिर कम दिनों की दवाएं देते हैं। इसी तरह जैसे-तैसे व्यवस्था चल रही है।
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पीएल शर्मा जिला अस्पताल में डॉ. भगत सिंह (आयुर्वेद), डॉ. विनोद कुमार (होम्योपैथी) और डॉ. अनीस अहमद (यूनानी) मरीज देखते हैं। इनका कहना है कि उनके पास हर रोज करीब 200 मरीज आते हैं। उनके पास जो उपलब्ध दवाएं हैं, वह दे देते हैं। दवाओं का टोटा है। ढाई साल पहले जो दवाएं आई थीं, उन्हीं से काम चलाया जा रहा है। दवाओं की बाबत मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अवगत कराया जा चुका है।
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बजट आ गया है, जल्द आएंगी दवाइयां
सीएमओ डॉ. अशोक कटारिया का कहना है कि आयुष के तहत दवाओं के लिए करीब साढ़े 15 लाख का दवाओं का बजट आ गया है। इसका टेंडर किया जा रहा है। जल्द ही दवाएं आ जाएंगी।


सिद्ध और प्राकृतिक चिकित्सा नहीं हो पाई शुरू
आयुष के तहत प्राकृतिक चिकित्सा और सिद्ध के तहत भी इलाज होना था, लेकिन ये दोनों इलाज अभी शुरू नहीं हो पाए हैं। प्राकृतिक चिकित्सा के तहत शरीर की आत्म-चिकित्सा क्षमता को बढ़ाने और स्वास्थ्य जीवन के सिद्धांतों पर आधारित चिकित्सा लोगों को सिखानी थी, जबकि सिद्ध में मरीज का इलाज नाड़ी, मूत्र, आंखों की जांच, आवाज के अध्ययन, शरीर के अंगों आदि से किया जाता है। लंबे समय से इन्हें शुरू करने की तैयारी है, मगर अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। सीएमओ का कहना है कि शासन को इसके लिए व्यवस्था करनी है।
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