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कैसे हो विकास: 20 साल की गारंटी वाली सड़कों का सपना टूटा, नहीं मिले ठेकेदार, गड्ढे तक न भर पाया निगम

Tue, 19 Sep 2023 08:07 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Tue, 19 Sep 2023 08:07 AM IST
सार

मेरठ में 20 साल तक चलने की गारंटी वाली सड़कों के निर्माण का दावा हवाई साबित हो रहा है। ठेकेदार न मिलने से शहर में व्हाइट टॉपिंग से सड़क बनाने का टेंडर खाली निकल गया, महापौर ने इसके लिए निगम के अधिकारियों को फटकार लगाई है।

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How should development happen: The dream of roads with twenty years guarantee broken, not found contractors
मेरठ की सड़कें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ में पिछले तीन महीने से 20 साल तक चलने की गारंटी वाली सड़कों के निर्माण का नगर निगम का दावा फुस्स पटाखा साबित हुआ। व्हाइट टॉपिंग तकनीकि से सड़क बनाने का टेंडर 42 दिन बाद सोमवार को खाली निकला। कोई ठेकेदार इस तकनीकि से सड़क बनाने के लिए आगे नहीं आया।

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इसके साथ ही 20 साल की गारंटी वाली सड़कों का सपना टूट गया और शहरवासियों को अभी टूटी सड़कों से ही गुजरना होगा। निगम की इस नाकामी पर महापौर ने सूरजकुंड स्थित कैंप कार्यालय में निगम के अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और मुख्य अभियंता को बुलाकर फटकार लगाई।

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नगर निगम की नई सरकार 13 मई 2023 को बनी थी। भाजपा नेता हरिकांत अहलूवालिया महापौर बने। ट्रिपल इंजन की सरकार बनने के साथ ही मेरठ शहर के विकास की उम्मीदें भी तीन गुना हो गईं। लेकिन जनता को न तो अभी तक कोई नई सड़क मिली न ही सड़कों के गड्ढे ही भरे गए। इस पर महापौर ने लोगों को बंगलूरू की तर्ज पर शहर में व्हाइट टॉपिंग तकनीकि से 20 साल तक चलने वाली सड़क बनवाने का सपना दिखाया। इसके चलते शहर में डेन्स की सड़क और नालों का निर्माण तक रोक दिया गया।

आठ अगस्त 2023 को व्हाइट टॉपिंग से सड़क बनाने के लिए ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई और 11 अगस्त को ऑनलाइन टेंडर नगर निगम ने अपलोड किया। पहले टेंडर में नगर निगम ने शहर की प्रमुख 14 सड़क व्हाइट टॉपिंग सहित 26 कार्य शामिल किए। उसके बाद निगम ने दो अन्य ऑनलाइन टेंडर डाले, जिसमें 25 सड़क व्हाइट टॉपिंग और डेन्स की सड़कों के साथ नालों को निर्माण होना शामिल है।


 

सड़क निर्माण का पहला टेंडर सोमवार को खुल गया। जिसमें व्हाइट टॉपिंग की सड़क के टेंडर में एक भी ठेकेदार ने आवेदन नहीं किया। टेंडर खाली निकलने पर निगम के अधिकारियों में खलबली मची। जनता को क्या जवाब देंगे इसको लेकर निगम में मंथन चल रहा था, तभी महापौर तक टेंडर खाली निकलने की जानकारी पहुंच गई। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने सूरजकुंड स्थित कैंप कार्यालय में बैठक बुलाई। जिसमें निगम के इंजीनियरों की जमकर क्लास ली। टेंडर खाली निकलने का ठीकरा महापौर ने निगम के इंजीनियरों पर फोड़ दिया।

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गड्ढे तक न भर पाया निगम
शहर की टूटी सड़कों का निर्माण तो दूर। नगर निगम गड्ढे तक नहीं भरवा पाया। चार महीने से नगर निगम के अधिकारी और महापौर शहरवासियों को भरोसा दे रहे थे कि 20 साल की गारंटी वाली चमचमाती व्हाइट टॉपिंग से सड़क बनाएंगे। जिससे शहर की सूरत बदल जाएगी। यह बात कहकर निगम ने शहर में गड्ढे तक नहीं भरे।

अधूरी तैयारी से डाला टेंडर, ठेकेदारों से बात तक नहीं 
व्हाइट टॉपिंग की शर्तो को लेकर निगम के अधिकारियों और स्थानीय ठेकेदारों में तकरार के हालात बने। स्थानीय ठेकेदारों ने नगर निगम के अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों से शिकायत की। इसे लेकर ठेकेदारों ने गढ़ रोड स्थित एक होटल में बैठक भी की थी। निगम ने अधूरी तैयारी के साथ टेंडर डाला, लेकिन ठेकेदारों से बात तक नहीं की। स्थानीय ठेकेदारों ने टेंडर में आवेदन नहीं किया और बाहर के बड़े ठेकेदारों से निगम के अधिकारियों की बातचीत नहीं हुई। नतीजा टेंडर खाली निकल गया।

निगम के अधिकारियों पर भड़के महापौर, बोले- मैं पहला महापौर हूं, जो निगम में धरने पर बैठेगा
व्हाइट टापिंग तकनीकि से सड़कें बनाने का टेंडर खाली निकलते ही महापौर भड़क उठे। उन्होंने निगम के अधिकारियों पर डेन्स की सड़क बनाने वाले ठेकेदारों से सांठगांठ करने का आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक कह डाला कि मैं पहला महापौर हूं, जो अधिकारियों की कार्यप्रणाली के खिलाफ नगर निगम में धरने पर बैठूंगा और नगर विकास मंत्री को शहर की बदहाली दिखाने के लिए गली-गली ले जाऊंगा। उन्होंने कहा कि टूटी सड़क के चलते लोग रोज हादसे हो रहे हैं, लेकिन अधिकारी काम करने को तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री ने दीपावली तक शहर गड्ढा मुक्त करने का लक्ष्य दिया है, इसके बावजूद अधिकारी गंभीर नहीं है। अब वह लखनऊ में मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने नगर निगम के मुख्य अभियंता देवेंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता अमित शर्मा, सहायक अभियंता विकास कुरील और अवर अभियंता के साथ सूरजकुंड स्थित कैंप कार्यालय में बैठक की। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि शहर का बुरा हाल है, जिसका मैं जवाब नहीं दे पा रहा हूं। शहर में गड्ढे ही गड्ढे हैं। व्हाइट टॉपिंग का सपना भी लोगों का टूट गया। महापौर के तीखे तेवर देखकर निगम के अधिकारी चुप्पी साध गए। निगम में क्या होता है, इसकी मुझे पूरी जानकारी है। डेन्स की सड़क निर्माण करने वाले ठेकेदारों से नगर निगम के अधिकारियों की सांठगांठ है, जिसके चलते व्हाइट टॉपिंग में जानबूझकर टेंडर का किसी ने आवेदन नहीं किया है।

व्हाइट टॉपिंग का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, महापौर को जानकारी नहीं
व्हाइट टॉपिंग से सड़क बनवाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए एक युवक ने हाईकोर्ट में याचिका डाल दी। नगर निगम से जवाब मांगा गया। तीन-चार दिन से मामला नगर निगम में चल रहा है। निगम के अधिकारियों ने महापौर को इसकी जानकारी देना भी मुनासिब नहीं समझ़ा। सोमवार को इसका जवाब हाईकोर्ट में देना था। महापौर ने निगम अधिकारियों से पूछा कि बताओ इस मामले की मुझे जानकारी क्यों नहीं दी गई।

मुख्य अभियंता से तीखे सवाल 
मुख्य अभियंता से महापौर ने पूछा कि बताओ शहर में गड्ढे और सड़क निर्माण क्यों नहीं हुआ। मुख्य अभियंता ने अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता से महापौर के सवालों का जवाब देने की बात कहीं। जिस पर महापौर बोले कि सवाल आपसे किया है, जवाब दीजिये।

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